कब सामने आएगा पूरा सच? | Rekha Arya | Girdhari Lal Sahu | SIT Investigation | Uttarakhand News

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जी हां दोस्तो, कब सामने आएगा पूरा सच? उत्तराखंड की सियासत में एक ऐसा मामला गरमाया हुआ है, जिसमें सवाल सिर्फ एक कैबिनेट मंत्री के परिवार का नहीं, बल्कि पुलिस की कार्रवाई और सत्ता के रसूख का भी है! एक तरफ मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू पर गंभीर आरोपों को लेकर दर्ज मुकदमा, दूसरी तरफ 210 करोड़ रुपये की कथित संपत्ति और भ्रष्टाचार के आरोप, जिन्हें रेखा आर्या खारिज कर चुकी हैं। आखिर गिरधारी लाल साहू कहां हैं? एसआईटी की जांच में अब तक क्या सामने आया है? और इस पूरे विवाद में उठ रहे सवालों के जवाब कब मिलेंगे? पूरी खबर देखिए दोस्तो खास का ये हाल है तो आम की बात करना ही बेमानी लगता है। दोस्तो उत्तराखंड की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी, सबसे सनसनीखेज और झकझोर देने वाली खबर! एक ऐसी खबर जिसने देवभूमि की पुलिसिंग, कानून व्यवस्था और सत्ता के रसूख को कटघरे में खड़ा कर दिया है। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के घर से उठा पारिवारिक विवाद अब सरकार और सिस्टम के लिए गले की हड्डी बन चुका है। बड़ा सवाल ये कि आखिर कहाँ गायब है मंत्री का आरोपी पति गिरधारी लाल साहू? देहरादून से लेकर हल्द्वानी और बरेली से लेकर नेपाल बॉर्डर तक पुलिस की कटी नाक छापेमारी जारी है, दावे बड़े हैं, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात! आज जनता पूछ रही है कि जब प्रदेश की एक कद्दावर कैबिनेट मंत्री के केस में पुलिस का ये हाल है, तो किसी आम आदमी के इंसाफ का क्या होता होगा? क्या इस पूरे मामले को आगामी चुनावों को देखते हुए लटकाया और भटकाया जा रहा है?

दोस्तो मै आपको ये खबर विस्तार से बताउंगा कहां छिपा बैठा है गिरधारधारी लाल साहू। दोस्तो, सोमेश्वर में अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने और मंत्री रेखा आर्य पर लगे 210 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की मांग को लेकर जनता सड़कों पर उतर आई है। प्रदर्शनकारियों ने दोनों मामलों में निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग उठाई। आखिर जनता की इन मांगों पर सरकार क्या कदम उठाती है? चलिए दोस्तो उत्तराखंड में अपराधियों पर ‘जीरो टॉलरेंस’ का दम भरने वाली पुलिस और 10 सदस्यीय हाई-प्रोफाइल SIT की नाक के नीचे से आरोपी गिरधारी लाल साहू हवा हो चुका है। मंत्री रेखा आर्या ने पति पर मारपीट, जातिसूचक शब्द कहने और जान से मारने की साजिश रचने जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। लेकिन ताज़ा अपडेट ये है कि एसआईटी की टीमें देहरादून, हल्द्वानी और बरेली में हाथ मारती रह गईं, और गिरधारी लाल अंडरग्राउंड हो गया। अब सुरक्षा एजेंसियों के बीच सुगबुगाहट है कि कहीं वो चम्पावत या ऊधमसिंह नगर के रास्ते नेपाल तो नहीं भाग गया? खुफिया एजेंसियां अब अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर अलर्ट मोड में हैं। सवाल उठता है कि एक रसूखदार आरोपी को भागने का इतना वक्त कैसे मिल गया? क्या खाकी जानबूझकर सुस्त पड़ी है? दोस्तो ये मामला सिर्फ एक पति-पत्नी या एक मंत्री का नहीं रह गया है। यह सीधे तौर पर आम जनता के भरोसे पर चोट है।

देश और प्रदेश की जनता आज ये सोचने पर मजबूर है कि जिस राज्य में खुद महिला एवं बाल विकास मंत्री सुरक्षित नहीं हैं, जहां खुद एक कैबिनेट मंत्री को रो-रोकर अपनी और बच्चों की जान की भीख मांगनी पड़ रही है, वहां आम महिलाओं और आम नागरिकों की सुनवाई कैसे होती होगी? अगर पुलिस एक मंत्री के आरोपी को हफ़्तों तक नहीं ढूंढ पाती, तो आम जनता की फाइलों पर तो सिर्फ धूल ही फंकती होगी! सिस्टम का यह दोहरा रवैया जनता के बीच गहरे आक्रोश को जन्म दे रहा है। दोस्तो शुरुआत में सोशल मीडिया पर आकर ताबड़तोड़ वीडियो और ऑडियो क्लिप जारी करने वाली मंत्री रेखा आर्या ने अब अचानक मीडिया से दूरी बना ली है। वह कैमरे के सामने आने से बच रही हैं और कहा जा रहा है कि अब केवल सरकारी या आधिकारिक बयानों का इंतजार किया जा रहा है। लेकिन इस रहस्यमयी चुप्पी के पीछे की टाइमिंग को समझिए। आगे उत्तराखंड में चुनाव हैं और विपक्ष को बैठे-बिठाए सरकार को घेरने का सबसे बड़ा हथियार मिल गया है। भाजपा के भीतर और बाहर इस पूरे मामले को लेकर सरकार की भारी किरकिरी हो रही है। चर्चाएं गर्म हैं कि क्या चुनावी नुकसान से बचने के लिए इस मामले को ठंडे बस्ते में डालने, लटकाने या भटकाने की स्क्रिप्ट तो नहीं लिखी जा रही है? दोस्तो इस पूरे विवाद का सबसे खतरनाक पहलू है— 210 करोड़ रुपये के अवैध साम्राज्य का संगीन आरोप! गिरधारी लाल साहू ने वीडियो जारी कर सीधे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से गुहार लगाई थी कि मंत्री रेखा आर्या के विभागों में पिछले 10 सालों से चल रहे भ्रष्टाचार और उनकी 210 करोड़ की काली कमाई की जांच कराई जाए। हालांकि रेखा आर्या ने इसे 100% निराधार बताते हुए कहा है कि उनकी जिंदगी खुली किताब है और वो जांच के लिए तैयार हैं, लेकिन दोस्तो सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यही है कि इस 210 करोड़ के कथित भ्रष्टाचार का सबूत और जानकारी कौन देगा? जब तक गिरधारी लाल साहू पुलिस की गिरफ्त में नहीं आता, तब तक इस महा-भ्रष्टाचार की फाइलों के पन्ने कैसे खुलेंगे? क्या वो सच में कोई बड़ा धमाका करने वाला है या सिर्फ खुद को बचाने के लिए कीचड़ उछाल रहा है? जनता को इन सारे सवालों के जवाब चाहिए, किसी बंद कमरे की तफ्तीश नहीं! दोस्तो 210 करोड़ का ये कथित घोटाला और एक रसूखदार आरोपी का पुलिस की गिरफ्त से बाहर होना, क्या यह महज एक इत्तेफाक है या फिर किसी सोची-समझी क्रोनोलॉजी का हिस्सा? चुनाव सिर पर हैं, सरकार की साख दांव पर है, और उत्तराखंड पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान लग चुके हैं। देखना यह होगा कि क्या एसआईटी वाकई मुस्तैदी से गिरधारी लाल साहू को सलाखों के पीछे ला पाती है, या फिर यह हाई-प्रोफाइल केस भी रसूख की भेंट चढ़कर फाइलों में ही दफन हो जाएगा!