देहरादून में नामी स्कूल पर गंभीर सवाल! आखिर क्लासरूम में ऐसा क्या हुआ कि 15 छात्राओं को एक साथ शिकायत लेकर सामने आना पड़ा? फिजिक्स टीचर पर अनुचित तरीके से छूने के आरोप हैं, तो स्कूल प्रबंधन पर शिकायत के बाद दबाव बनाने के आरोप भी लगाए गए हैं। मामला इतना बढ़ा कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। लेकिन सबसे बड़ा सवाल—जब बच्चे ही स्कूल में खुद को असुरक्षित महसूस करने लगें, तो जिम्मेदारी किसकी है? देखिए, मेरी पूरी खबर। दोस्तो शिक्षा के मंदिर जब कलंकित होने लगें, तो समाज अपने बच्चों को कहाँ भेजे? एक ऐसा ही दहला देने वाला मामला उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के एक बेहद नामी स्कूल से सामने आया है, जहाँ एक शिक्षक पर लगे आरोपों को सुनकर आप दंग रह जाएंगे। फिजिक्स के एक सीनियर टीचर पर आरोप है कि वो क्लास की बच्चियों को गलत नीयत से छूता था, यानी ‘बैड टच’ करता था।हैरानी की बात यह है कि यह किसी एक बच्ची का आरोप नहीं है, बल्कि 15 छात्राओं ने एक साथ हस्ताक्षर करके स्कूल प्रबंधन को लिखित शिकायत दी थी। उससे भी ज्यादा चौंकाने वाला दावा यह है कि शिकायत के बाद इंसाफ करने के बजाय मामले को दबाने की कोशिश की गई। पीड़ित छात्रा, उसकी माँ और पुलिस इस पूरे मामले पर क्या कह रही है सब बताउंगा आपको।
दोस्तो देहरादून का एक नामी और प्रतिष्ठित स्कूल इस वक्त विवादों के घेरे में है। ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्राओं ने अपने ही भौतिक विज्ञान (फिजिक्स) के शिक्षक पर बेहद गंभीर और शर्मनाक आरोप लगाए हैं। छात्राओं का आरोप है कि शिक्षक पिछले करीब डेढ़ महीने से उन्हें अनुचित तरीके से छू रहा था। जब पानी सिर से ऊपर चला गया, तो हिम्मत जुटाकर 15 छात्राओं ने एक साथ मिलकर स्कूल के प्रिंसिपल को लिखित शिकायत सौंप दी। इधर दस्तो बेटी के साथ स्कूल में हुई इस बदसलूकी की खबर जब मां को लगी, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। मां का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने पहले तो आरोपी शिक्षक को हटाने का भरोसा दिया, लेकिन बाद में शिकायत वापस लेने और मामले को दबाने के लिए दबाव बनाने लगे। यहाँ तक कि जब वो दोबारा स्कूल पहुंचीं, तो उन्हें अंदर बंद कर गेट पर ताला तक लगा दिया गया। दोस्तो इधर स्कूल परिसर में मचे इस भारी हंगामे के बाद मौके पर पुलिस बल को बुलाना पड़ा। पुलिस ने तुरंत मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच की टीम गठित कर दी है। स्कूल प्रबंधन से भी पूछताछ की जा रही है और सीसीटीवी फुटेज समेत सभी दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है। बहरहाल, स्कूल प्रशासन का कहना है कि उन्होंने शिकायत मिलते ही शिक्षक को निलंबित कर दिया था, लेकिन जिस शिक्षक पर ये आरोप लगे वो भी समाने आकर सफाई दे रहे हैं, लेकिन अब इस मामले को तूल दिया जा रहा है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या सिर्फ नौकरी से हटा देना ही ऐसे गंभीर अपराध की सजा है? देवभूमि को शर्मसार करने वाली इस घटना ने एक बार फिर स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, हालांकि पुष्टी जांच के बाद होगी।