दोस्तो, राहुल गांधी का दौरा खत्म हुआ, लेकिन सियासत की आग और भड़क गई। एक तरफ बीजेपी महिला मोर्चा सड़क पर उतरकर नारी शक्ति वंदन और दूसरे मुद्दों को लेकर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रदर्शन बताकर बीजेपी पर पलटवार कर रही है। इसी बीच बीजेपी विधायक विनोद चमोली ने राहुल गांधी पर सनातन के अपमान का आरोप लगाया, जबकि कांग्रेस ने आरोपों को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा, आखिर किसने किस पर क्या आरोप लगाए? किसने कैसे किया पलटवार? और राहुल गांधी के दौरे के बाद उत्तराखंड की सियासत में क्यों मचा है घमासान? राहुल आए, भीड़ भी आई! सवाल उठे सियासत भी गरमाई! एक तरफ युवा संवाद का दावा। दूसरी तरफ सियासी पलटवार का हमला! जी हां दोस्तो, राहुल गांधी का देहरादून दौरा खत्म हो गया, लेकिन उत्तराखंड की राजनीति में इसकी गूंज अब और तेज हो गई है। कांग्रेस इसे युवाओं की आवाज़ का मंच बता रही है, जबकि बीजेपी इसे पूरी तरह राजनीतिक कार्यक्रम और फ्लॉप शो करार दे रही है। महिला मोर्चे का प्रदर्शन, नारी शक्ति वंदन को लेकर सवाल, भीड़ पर आरोप-प्रत्यारोप और युवाओं की राजनीति। अब पूरा मुद्दा सियासी बहस का केंद्र बन चुका है। आखिर किसने क्या कहा और इस पूरे घटनाक्रम का आगामी चुनाव पर क्या असर पड़ सकता है? दोस्तो देहरादून में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने युवाओं से संवाद किया। कार्यक्रम में पेपर लीक, भर्ती प्रक्रिया, बेरोज़गारी और शिक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। कांग्रेस का दावा है कि बड़ी संख्या में युवा पहुंचे और उन्होंने खुलकर अपनी बात रखी। दोस्तो राहुल गांधी के कार्यक्रम के दौरान बीजेपी महिला मोर्चा ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान नारी शक्ति वंदन से जुड़े सवाल उठाए गए। कांग्रेस ने इस प्रदर्शन पर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया कि यह राजनीतिक संदेश देने की कोशिश थी।
उधर दोस्तो बीजेपी ने राहुल गांधी के पूरे दौरे पर तीखा हमला बोला। बीजेपी विधायक और मुख्य प्रवक्ता विनोद चमोली ने दावा किया कि यह कार्यक्रम युवाओं का नहीं बल्कि “फ्लॉप शो” था। उन्होंने कहा कि जिस Gen-Z से संवाद की बात की गई, वहां बड़ी संख्या में बुजुर्ग मौजूद थे। साथ ही उन्होंने कहा कि जिस नीट परीक्षा को लेकर राहुल गांधी सवाल उठा रहे हैं, उसकी परीक्षा हो चुकी है और लाखों छात्र सफल भी हुए हैं। बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस के पास उत्तराखंड के लिए कोई ठोस विजन नहीं है। राहुल गांधी के इस दौरे ने एक बात साफ कर दी है कि उत्तराखंड की राजनीति में युवाओं का मुद्दा अब केंद्र में आ चुका है। कांग्रेस बेरोज़गारी, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाना चाहती है, जबकि बीजेपी अपने विकास कार्यों, भर्ती प्रक्रिया और योजनाओं को सामने रखकर विपक्ष के आरोपों का जवाब दे रही है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि राज्य में बड़ी संख्या में युवा मतदाता हैं। ऐसे में शिक्षा, रोजगार और पारदर्शी भर्ती जैसे मुद्दे आने वाले चुनावों में अहम भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, यह मतदाताओं पर निर्भर करेगा कि वे किस दल के तर्कों और वादों को अधिक विश्वसनीय मानते है। फिलहाल राहुल गांधी का दौरा खत्म हो चुका है, लेकिन सियासी बहस अभी जारी है। एक पक्ष इसे युवाओं की आवाज़ बताता है, तो दूसरा इसे महज़ राजनीतिक कार्यक्रम कह रहा है। अब देखने वाली बात होगी कि क्या यह बहस चुनावी मंचों तक ही सीमित रहेगी, या फिर रोजगार, शिक्षा और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर नीतिगत बदलाव और ठोस फैसले भी देखने को मिलेंगे। यही सवाल आने वाले समय में उत्तराखंड की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है।