Rishikesh हाईवे प्रोजेक्ट पर ब्रेक! देखिए बड़ा U-टर्न | CM Dhami | Rahul Gandhi | Uttarakhand News

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दोस्तो सड़क भी चाहिए, जंगल भी बचाना है! विकास भी करना है, पर्यावरण भी सजाना है! 3000 पेड़ों पर चल रही थी आरी, लेकिन सरकार की फिलहाल रोक की तैयारी! क्या राहुल गांधी के कारण बैकफुट पर आई सरकार? आखिर ऋषिकेश में आखिर 3000 पेड़ों की कटाई पर लगे ब्रेक को कांग्रेस ने कैसे बता दिया अपनी जीत। भारी हंगामे के बीच क्यों उत्तराखंड सरकार ने क्यों लिया बड़ा फैसला। दोस्तो, देहरादून-ऋषिकेश सिक्स लेन परियोजना को लेकर पिछले कई दिनों से चल रहे विरोध के बीच बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राज्य सरकार ने फिलहाल करीब 3 हजार पेड़ों की कटाई रोकने का फैसला लिया है। यह निर्णय पर्यावरण को लेकर उठ रही चिंताओं और लगातार हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच आया है। वहीं परियोजना से जुड़े अधिकारी कहते हैं कि सड़क चौड़ीकरण और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने के विकल्पों पर भी काम किया जा रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या यह सिर्फ अस्थायी रोक है या परियोजना के स्वरूप में कोई बदलाव होगा? गांधी का ऋषिकेश मामले में क्या आया था रिएक्शन जिसको बुनियाद बना कर कांग्रेस कह रही है ये राहुल गांधी का दबाव में लिया गया फैसला है। दोस्तो एक तरफ राहुल गाधी का ये रिएक्शन था तो वहीं दूसरी तरफ ऋषिकेश के भनियावाला के बीच सड़क चौड़ीकरण के लिए तीन हजार पेड़ों को काटे जाने के मामले पर बड़ी खबर सामने आ गई। राज्य सरकार ने केंद्र से बात कर तीन हजार पेड़ों के काटे जाने पर फिलहाल रोक लगा दी है। राज्य सरकार का कहना है कि जब तक सभी पक्षों के साथ संतोषजनक सहमति और विश्वास का वातावरण नहीं बन जाता, तब तक इस परियोजना के अंतर्गत आने वाले पेड़ों का कटान स्थगित रखा जाएगा। दोस्तो आपको बता दूं कि राहुल गांधी ने अपने देहरादून दौरे पर इस मामले का संज्ञान लिया था। जहां लोगों ने राहुल गांधी से मदद की मांग की थी और राहुल गांधी ने इस बात का आश्वासन दिया था कि वो इस मामले को देश की संसद में आगामी सत्र के दौरान उठाएंगे।

दोस्तो उधर सुबह लोगों ने राहुल गांधी से मदद मांगी, तो इधर शाम होते होते प्रदेश के मुख्यमंत्री धामी का एक्स पोस्ट मामले आ गया। ये परियोजना भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की एक महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजना है, जिस पर माननीय हाई कोर्ट के निर्देशों और सभी आवश्यक वैधानिक और पर्यावरणीय स्वीकृतियों एवं प्रक्रियाओं का पालन करते हुए कार्यवाही की जा रही थी। परियोजना में वन्यजीव संरक्षण को ध्यान में रखते हुए लगभग 3.5 किलोमीटर लंबे हाथी अंडरपास तथा छोटे वन्यजीवों के आवागमन के लिए विशेष कल्वट जैसी व्यवस्थाओं का भी प्रावधान किया गया है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष एवं सड़क दुर्घटनाओं में वन्यजीवों की मृत्यु की घटनाओं में कमी लाने में सहायता मिलेगी, जो अक्सर इस रास्ते में देखा जाता है। और भी बहुत कुछ लेकिन इधर इस मामले में सियासत भी शोर करने लगी। दोस्तो कांग्रेस कह रही है कि सात मोड पर कई दिनों से लगातार पेड़ों का कटान चल रहा था बीते रोज प्रदर्शन कर रहे कुछ लोगों ने राहुल गांधी जी का काफिला रोका और उनसे इस कार्रवाई पर रोक लगाने की गुहार लगाई, राहुल गांधी जी ने संसद के सत्र में मुद्दे को उठाने का दिया आश्वासन तो धामी सरकार आई बैक फुट पर और पेड़ों का कटान तत्काल रूप से रोक दिया गया है। इधर बीजेपी वाले इस फैसले को लेकर अपना अलग तर्क दे रहे हैं।

खैर दोस्तो इधर उत्तराखंड की धामी सरकार का बड़े फैसले पर कहना है कि उत्तराखंड की प्रकृति, जनभावनाएं और प्रदेश का विकास तीनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं. सरकार संवाद, सहमति और व्यापक जनहित के आधार पर ही आगे बढ़ेगी। तो दोस्तो, फिलहाल 3 हजार पेड़ों की कटाई पर ब्रेक लग गया है, लेकिन सियासत अभी थमी नहीं है। एक तरफ कांग्रेस इसे राहुल गांधी के हस्तक्षेप और जनता के दबाव की जीत बता रही है, तो दूसरी तरफ सरकार का कहना है कि यह फैसला जनभावनाओं, संवाद और सभी पक्षों से सहमति बनने तक के लिए लिया गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या यह सिर्फ अस्थायी रोक है या परियोजना के स्वरूप में कोई बड़ा बदलाव होगा? क्या सड़क चौड़ीकरण और पर्यावरण संरक्षण के बीच ऐसा रास्ता निकलेगा, जिसमें विकास भी हो और हजारों पेड़ भी बच जाएं?इसका जवाब आने वाले दिनों में सरकार, एनएचएआई और संबंधित एजेंसियों के अगले फैसलों से साफ होगा।आपकी क्या राय हैक्या सड़क चौड़ीकरण के लिए पेड़ों की कटाई अंतिम विकल्प होनी चाहिए, या सरकार को ऐसा वैकल्पिक मॉडल अपनाना चाहिए जिससे विकास और पर्यावरण दोनों साथ चल सकें? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखिए।