दोस्तो, जब मेहनत किसी छात्र की हो, लेकिन किस्मत पेपर लीक तय करे, तो सवाल सिर्फ एक परीक्षा का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की साख का बन जाता है। रातें जागकर पढ़ने वाले युवा पूछ रहे हैं—क्या हमारी मेहनत की कोई कीमत नहीं? क्या हर भर्ती से पहले डरना अब हमारी किस्मत बन गया है? एक पेपर एक वार! सपनों पर क्यों अत्याचार? उठी आवाज ऐसी की युवाओं ने कह दिया भरोसा टूटा, भविष्य डोला! युवाओं का आखिर क्यों फूटा शोला? दोस्तो देहरादून में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में युवाओं का यही दर्द खुलकर सामने आया। छात्रों ने कहा—पेपर लीक ने सिर्फ नौकरी नहीं छीनी, बल्कि सरकार और व्यवस्था पर भरोसा भी हिला दिया। और चेतावनी भी दी कि अगर युवाओं का विश्वास ऐसे ही टूटता रहा, तो यह सिर्फ बेरोजगारी नहीं, बल्कि सामाजिक आपदा का कारण बन सकता है। आखिर युवाओं ने और क्या कहा वो आपको दिखाउंगा। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 17 जुलाई शुक्रवार को देहरादून में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के जरिए युवाओं से संवाद किया। उन्होंने पेपर लीक के मुद्दे को मंच से उठाया और सरकार और सिस्टम को दोषी करार दिया. कार्यक्रम में हजारों के संख्या में युवाओं, उनके माता-पिता समेत अन्य लोगों ने भी हिस्सा लिया। दोस्तो कांग्रेस ने इस कार्यक्रम को राजनीतिक न बनाते हुए पूरी तरह से युवाओं और छात्रों पर केंद्रित रखा। राहुल गांधी ने भी मंच से केवल छात्रों से जुड़ी बातें की। इस दौरान उन्होंने कई छात्रों को मंच पर बुलाया और उनको अपनी बातों को रखने का अवसर दिया। इस दौरान छात्रा रिया का पिता से भी उन्होंने मंच पर बात की। नीट पेपर लीक के बाद रिया ने आत्मघाती कदम उठाया था। रिया थापा के पिता ने अपनी पीड़ा को सभी के सामने रखा। ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में पहुंची मसूरी की छात्रा ज़ेब अली ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम स्थल को लेकर हुई व्यवस्थाओं से बड़ी संख्या में छात्र परेशान हुए। उनका कहना है कि इससे छात्रों के कार्यक्रम पर असर पड़ा और कई युवा वापस लौट गए।
इसके अलावा दोस्तो मसूरी की रहने वाली युवा छात्रा इक़रा अली ने ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में अपनी पढ़ाई, बेरोज़गारी और पेपर लीक से जुड़े दर्द को खुलकर साझा किया। उन्होंने कहा कि डिग्री होने के बावजूद नौकरी नहीं मिल रही, परिवार संघर्ष कर रहा है और युवाओं का भविष्य लगातार अनिश्चित होता जा रहा है। पेपर लीक ने सिर्फ एक परीक्षा नहीं, कई युवाओं के सपने भी रोक दिए, बिहार के रहने वाले अमित सिंह का कहना है कि एक पेपर लीक ने उनकी तैयारी और करियर की दिशा बदल दी। आज वे नौकरी के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। सुनिए, उनकी जुबानी उनका संघर्ष। पेपर लीक ने सिर्फ परीक्षा नहीं, पूरी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्र किताबों से ज्यादा नौकरी की मजबूरी में उलझे हैं, और अभिभावक बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। आखिर युवाओं का यह गुस्सा क्यों बढ़ रहा है? सुनिए, छात्रों की जुबानी उनकी पीड़ा। तो दोस्तो, ये सिर्फ पेपर लीक का मुद्दा नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भरोसे का सवाल है। जब छात्र कहें कि मेहनत से ज्यादा सिस्टम पर भरोसा टूट रहा है, जब डिग्री के बाद भी नौकरी की गारंटी न हो, और जब माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य को लेकर डरने लगें, तो यह किसी एक छात्र की नहीं, पूरे समाज की चिंता बन जाती है। देहरादून के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में युवाओं ने अपनी बात खुलकर रखी। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ये आवाज़ सिर्फ मंच तक सीमित रह जाएगी, या फिर पेपर लीक, भर्ती में पारदर्शिता और रोजगार जैसे मुद्दों पर ठोस बदलाव भी देखने को मिलेगा?आपकी क्या राय है? क्या पेपर लीक पर अब और सख्त कानून और तेज़ कार्रवाई की ज़रूरत है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखिए।