Rudrapur Farmers Protest क्यों हुआ उग्र? DM ऑफिस में डाला डेरा! | CM Dhami | Uttarakhand News

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दोस्तो जब अधिकारों की बात आती है, तो देश का अन्नदाता पीछे नहीं हटता! उत्तराखंड के उधमसिंह नगर के रुद्रपुर से एक ऐसी ही महा-संग्राम की तस्वीरें सामने आ रही हैं, जिसने शासन और प्रशासन के पसीने छुड़ा दिए हैं। भारतीय किसान यूनियन टिकैत के बैनर तले हजारों किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ रुद्रपुर कलेक्ट्रेट का घेराव करने पहुंच गए। पुलिस की कड़े सुरक्षा घेरे और भारी बैरिकेडिंग को ताश के पत्तों की तरह तोड़ते हुए किसान कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर घुस गए और बीच सड़क पर ही अटूट लंगर शुरू कर दिया। आखिर मुफ्त बिजली और अपनी जमीनों के मालिकाना हक को लेकर किसानों ने सरकार के खिलाफ ये आर-पार की जंग क्यों शुरू की है? दोस्तो उत्तराखंड का तराई क्षेत्र यानी रुद्रपुर इस समय भारी किसान आंदोलन की आग में सुलग रहा है। भारतीय किसान यूनियन टिकैत के आह्वान पर हजारों की संख्या में उग्र किसान रुद्रपुर कलेक्ट्रेट की ओर बढ़े। प्रशासन ने उन्हें रोकने के लिए 2 SDM, 3 सीओ और भारी पुलिस फोर्स तैनात की, लेकिन भारी हुंकार के साथ किसानों ने बैरिकेडिंग को तहसनहस कर दिया और कलेक्ट्रेट परिसर तक जा पहुंचे। दोस्तो यहां आपको बता दूं कि किसानों का साफ कहना है कि अब केवल वार्ताओं से काम नहीं चलेगा, जब तक सरकार लिखित आदेश नहीं देती, तब तक यह कलेक्ट्रेट ही उनका घर रहेगा। अब दोस्तो बात आती है मांगों की पहले आप वो देख लीजिए क्यों किसान आगबबूला हुए हैं।

मांग 1, किसानों और आम जनता के लिए 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली! मांग 2- 20 गांवों में लंबे समय से रह रहे लोगों को जमीन का मालिकाना हक मिले! दोस्तो कहने को तो ये दो मांग लेकिन अन्नदाताओं का ये गुस्सा बेवजह नहीं है। किसानों की तीन प्रमुख मांगें हैं, जिनमें सबसे बड़ी मांग उत्तराखंड में 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की है। इसके अलावा तराई के 20 गांवों में जो लोग दशकों से रह रहे हैं, उन्हें उनकी जमीनों का मालिकाना हक देने की मांग पर किसान अड़े हैं। दोस्तो अपनी मांगों को मनवाने के लिए किसानों ने कलेक्ट्रेट के ठीक बाहर मुख्य मार्ग पर ही टेंट गाड़ दिए हैं और बड़े-बड़े बर्तनों में सड़क पर ही लंगर पकाना शुरू कर दिया है। वहीं दोस्तो आंदोलन के उग्र होते ही सुरक्षा एजेंसियां भी पूरी तरह अलर्ट पर आ गईं। इसी बीच कलेक्ट्रेट गेट पर चेकिंग के दौरान सितारगंज के एक किसान के पास से अचानक लोडेड लाइसेंसी शॉटगन (बंदूक) बरामद होने से हड़कंप मच गया। पुलिस ने तुरंत बंदूक को अपने कब्जे में लिया और माहौल बिगड़ने से बचाने के लिए किसान को कड़ी चेतावनी देकर छोड़ा। वर्तमान में मौके पर भारी संख्या में पीएसी, पुलिस बल और दमकल की गाड़ियां तैनात की गई हैं। प्रशासन ने किसानों से वार्ता के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन भी किया है। दोस्तो भारतीय किसान यूनियन ने साफ कर दिया है कि यह तीन दिन का अल्टीमेटम है। अगर धामी सरकार ने उनकी जायज मांगों पर तुरंत मुहर नहीं लगाई, तो पूरे उत्तराखंड का चक्का जाम किया जाएगा और दिल्ली की तर्ज पर उग्र आंदोलन को तेज किया जाएगा। दोस्तो मुफ्त बिजली की इस लड़ाई पर आपकी क्या राय है? क्या किसानों की मांगें पूरी होनी चाहिए? कमेंट बॉक्स में अपनी राय दें और तराई के किसानों की इस गूंज को सरकार तक पहुंचाने के लिए वीडियो को फेसबुक और यूट्यूब पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करें, जय उत्तराखंड