Sahastratal Trek Accident: हाई एल्टीट्यूड ट्रैकिंग के लिए तैयार होगी एसओपी

सहस्त्रताल ट्रैक पर हुई घटना के बाद अब हाई अल्टीट्यूड ट्रैकिंग के लिए जिला स्तर पर एसओपी बनाए जाने का निर्णय लिया है।

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उत्तराखंड में ट्रेकिंग को बढ़ावा देने के लिए खूब प्रचार-प्रसार हो रहा है और ट्रेकर भी बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं। Uttarkashi Sahastra Tal Trek Accident आश्चर्यजनक पहलू यह कि ट्रेकिंग के लिए दो वर्ष पूर्व सरकार ने जो नियम तय किए थे, उनके क्रियान्वयन की अब तक कोई व्यवस्था नहीं की है। उत्तरकाशी जिले में जो सिंगल विंडो सिस्टम बनाया गया है, वह महज खानापूर्ति तक ही सीमित है। अगर ट्रेकिंग के व्यावहारिक नियमों का ही कुछ हद तक पालन हुआ होता तो सहस्रताल में कर्नाटक के नौ ट्रेकर की जान न जाती। सहस्त्रताल ट्रैक पर हुई घटना को देखते हुए जिले के अधिक ऊंचाई वाले ट्रैक रूट्स पर ट्रैकिंग के मानकों के सख्ती से अनुपालन एवं सुरक्षा प्रबंधों को लेकर जिला स्तर पर मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाए जाने का निर्णय लिया है। संबंधित विभागों, विशेषज्ञ संगठनों व अन्य हितधारकों से विचार-विमर्श कर इस एसओपी को जल्द अंतिम रूप दिया जाएगा।

जिलाधिकारी ने इस संबंध में शासन एवं राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के स्तर पर हुई बैठकों में भी अपने विचार रखे। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने सहस्त्रताल रेस्क्यू ऑपरेशन संचालित करने में तत्परता, बेहतर समन्वय के लिए जिला प्रशासन की सराहना की है। साथ ही हाई अल्टीट्यूड ट्रैकिंग के लिए सख्त नियामक प्राविधान किए जाने पर जोर दिया है।सिल्ला-कुशकल्याण-सहस्त्रताल की ट्रैकिंग पर गए 22 सदस्यीय दल के नौ सदस्यों की मृत्यू होने की घटना का शासन एवं प्रशासन के स्तर से अत्यधिक गंभीरता से लेते हुए ऐसी घटनाओं दोबारा न हो, इसके लिए हाई अल्टीट्यूड ट्रैकिंग हेतु सख्त नियामक उपाय और कड़े सुरक्षा मानकों का निर्धारण किए जाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।