Tehri Pratapnagar Reshma Bisht केस में सबसे बड़ा खुलासा! | Missing Case | Uttarakhand News

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दोस्तों, 36 दिन बीत गए, लेकिन रेशमा बिष्ट का अब तक कोई सुराग नहीं! आखिर एक बेटी कहां गायब हो गई और पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी तलाश अब तक क्यों नहीं हो पाई?सबसे बड़ा सवाल ये है कि रेशमा के लापता होने के मामले में पुलिस की जांच आखिर किस दिशा में बढ़ रही है? क्या हर संभावित पहलू की गंभीरता से जांच हो रही है, या फिर परिवार को सिर्फ इंतजार ही करना पड़ रहा है?और उससे भी बड़ा सवाल। ‘समझौता’ करने का दबाव बनाने वाले वो चेहरे कौन हैं? क्या पुलिस ने उन आरोपों को भी जांच के दायरे में लिया है?36 दिन बाद भी जवाब नहीं, तो सवाल पुलिस की कार्यशैली पर भी उठेंगे। आखिर रेशमा कब मिलेगी और इस पूरे मामले की सच्चाई कब सामने आएगी? दोस्तो उत्तराखंड के पहाड़ों से एक ऐसी सनसनीखेज खबर, जिसने पुलिस प्रशासन की नींद उड़ा दी है! एक हंसता-खेलता परिवार। 28 महीने बाद दुबई से लौटता है पति, घर में खुशियों का माहौल होना चाहिए था, लेकिन महज 4 दिन के भीतर 26 साल की रेशमा बिष्ट रहस्यमयी तरीके से गायब हो जाती है!

पुलिस कहती है पैर फिसला और नदी में बह गई, लेकिन मायका चीख-चीख कर कह रहा है—यह हादसा नहीं, सोची-समझी साजिश है! क्या रेशमा बिष्ट को सच में पहाड़ों की तेज नदी लील गई, या फिर घर की चारदीवारी के भीतर ही उसका खेल खत्म कर दिया गया? दोस्तो यहां पहले आप वकील को सुनिए- इस मामले में कैसे खेल हो रहा है। टिहरी गढ़वाल का प्रतापनगर क्षेत्र। तारीख 6 अगस्त 2026। इसी दिन से रेशमा बिष्ट का कोई अता-पता नहीं है। 36 दिन से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन पुलिस के हाथ खाली हैं। उत्तराखंड की मित्र पुलिस सिर्फ फाइलों में तफ्तीश कर रही है, जबकि जमीन पर सिर्फ और सिर्फ सस्पेंस तैर रहा है। इस कहानी का सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आता है, जब रेशमा का पति दुबई से 28 महीने बाद घर लौटता है। पति के आने के ठीक चौथे दिन रेशमा गायब हो जाती है। पुलिस को जलखुर नदी के किनारे रेशमा की चप्पल, चुनरी और दराती मिलती है। पुलिस इसे आत्महत्या या पैर फिसलने का मामला मानकर SDRF को नदी में उतार देती है। लेकिन सवाल यह है कि एक महीने तक नदी की खाक छानने के बाद भी SDRF को रेशमा का एक तिनका तक क्यों नहीं मिला? पड़ोसी रेशमा का भाई विकास सिंह रावत कैमरे के सामने आकर पुलिस की थ्योरी की धज्जियां उड़ा रहा है।

भाई का साफ कहना है कि जो रेशमा सुबह ही घास लेकर आ चुकी थी, वो भारी बारिश के बीच दोपहर 2 बजे दोबारा घास काटने क्यों जाएगी? आखिर मायके पक्ष पर इस मामले को रफा-दफा करने और ‘समझौता’ करने का दबाव कौन बना रहा है? आखिर वो कौन से सफेदपोश हैं, जो इस केस की परतों को खुलने नहीं देना चाहते? लेकिन अब यह मामला सिर्फ उत्तराखंड तक सीमित नहीं रहा। प्रतापनगर की जनता का गुस्सा फूटा तो इस केस में एंट्री हुई है सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने एडवोकेट राकेश बिंजोला की! दिल्ली से सीधे प्रतापनगर पहुंचे वकील बिंजोला ने साफ कर दिया है कि अगर पुलिस ने ढिलाई बरती, तो इस केस को सीधे हाइकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक घसीटा जाएगा और इसकी जांच सीबीआई (CBI) से कराई जाएगी।स्थानीय विधायक विक्रम सिंह नेगी ने भी सरकार को आड़े हाथों लिया है। जनता का अल्टीमेटम साफ है—ससुराल पक्ष के संदिग्ध लोगों का तुरंत नार्को (Narco) और पॉलीग्राफ टेस्ट कराया जाए। आखिर पुलिस नार्को टेस्ट कराने से क्यों बच रही है? किसका संरक्षण है उन संदिग्धों को? दोस्तो अंकिता भंडारी से लेकर बबीता पांडे तक, और अब रेशमा बिष्ट, आखिर उत्तराखंड की बेटियां पहाड़ों में इस तरह रहस्यमयी तरीके से कब तक गायब होती रहेंगी? क्या पुलिस का काम सिर्फ नदी किनारे चप्पल ढूंढकर केस बंद कर देना है? रेशमा बिष्ट के साथ न्याय कब होगा, यह सबसे बड़ा सवाल है। अगर पुलिस ने जल्द ही नार्को टेस्ट की तारीख तय नहीं की, तो पहाड़ में एक बार फिर जनांदोलन की चिंगारी भड़कना तय है। इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि रेशमा बिष्ट के केस में सच छुपाया जा रहा है? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर लिखें और इस वीडियो को इतना शेयर करें कि सोई हुई सरकार जाग जाए!