सात समंदर पार, एक बिल्कुल अलग दुनिया, अलग भाषा और अलग रहन-सहन, लेकिन जब इस विदेशी मुसाफिर टॉम के कदम देवभूमि की इस पावन धरती पर पड़े, तो कुछ ऐसा हुआ कि वो रो पड़ा! आखिर क्या था उस मिट्टी का जादू, जिसने टॉम को एक झटके में ‘पहाड़ी’ बना दिया? और क्या आप जानते हैं कि जिस ऐतिहासिक ‘नंदा देवी राजजात यात्रा’ का इंतज़ार दुनिया पिछले 12 सालों से कर रही थी, उसे लेकर अब क्या बड़ा और हैरान करने वाला फैसला आया है? दोस्तो सात समंदर पार, एक बिल्कुल अलग दुनिया, अलग भाषा और अलग रहन-सहन, लेकिन जब एक विदेशी नौजवान के कदम देवभूमि की पावन धरती पर पड़े, तो कुछ ऐसा हुआ जिसकी कल्पना खुद उसने भी नहीं की थी! क्या आपने कभी किसी विदेशी को माँ नंदा की भक्ति में इस कदर लीन देखा है कि उसकी आंखों से श्रद्धा के आंसू छलक पड़ें? नहीं तो आज में आपको दिखाउँगा मां नंदा का एक ऐसा विदेशी भक्त जिसे देवभूमि की मिट्टी की खूशबू ने पहाड़़ी लड़का बना दिया। यह कहानी है टॉम की, जो एक टूरिस्ट बनकर उत्तराखंड की हसीन वादियों को निहारने आया था। लेकिन देवभूमि की हवा में कुछ ऐसा सम्मोहन है, जो यहां एक बार आता है, वो यहीं का होकर रह जाता है। टॉम जब यहां पहुंचा, तो उसने केवल पहाड़ों की खूबसूरती को ही नहीं देखा, बल्कि उसने यहां की आत्मा को महसूस किया—और वो आत्मा है यहां की लोक संस्कृति और माँ नंदा के प्रति अटूट आस्था।
दोस्तो शुरुआत में भाषा एक दीवार थी, लेकिन दिल की भाषा को किसी डिक्शनरी की जरूरत नहीं होती। टॉम ने बहुत जल्द पहाड़ी लोगों की सादगी को अपना लिया। वो आलीशान होटलों को छोड़कर स्थानीय लोगों के घरों में रहने लगा। उनके साथ चूल्हे की रोटी खाना, खेतों में हाथ बंटाना और हर छोटे-बड़े त्योहार में शरीक होना उसकी दिनचर्या बन गया। स्थानीय लोग बताते हैं कि टॉम के चेहरे पर जो सुकून यहां आकर दिखा, वो शायद उसे दुनिया के किसी कोने में नहीं मिला था। दोस्तो लेकिन इस यात्रा का सबसे भावुक मोड़ तब आया, जब टॉम माँ नंदा की पारंपरिक पूजा और उत्सव का हिस्सा बना। ढोल-दमाऊ और भंकोरे की थाप पर जब पूरा पहाड़ माँ नंदा की डोली की अगवानी में झूम उठा, तो टॉम खुद को रोक नहीं पाया। माँ नंदा की महिमा और भक्तों का हुजूम देखकर टॉम की आंखों से अविरल आंसू बहने लगे। ये आंसू किसी दुख के नहीं, बल्कि उस परम आनंद और श्रद्धा के थे, जो केवल देवभूमि में ही महसूस किया जा सकता है। टॉम ने खुद माना कि जब उसने माँ नंदा का नाम सुना, तो उसे ऐसा लगा जैसे वो अपनी खुद की माँ की गोद में आ गया हो। दोस्तो टॉम की यह वायरल वीडियो आज हर उस इंसान के लिए एक मिसाल है, जो अपनी संस्कृति को भूलकर पश्चिमी चकाचौंध की तरफ भाग रहे हैं। एक तरफ जहां दुनिया आधुनिकता की अंधी दौड़ में अंधी हो रही है, वहीं टॉम जैसे विदेशी नागरिक उत्तराखंड के इस पहाड़ी कल्चर और माँ नंदा के चरणों में आकर जीवन का असली सच ढूंढ रहे हैं। सच ही कहा गया है, माँ नंदा जिसके दिल में बस जाएं, उसकी पूरी दुनिया ही बदल जाती है। टॉम के इस खूबसूरत बदलाव और देवभूमि के प्रति उसके इस निश्छल प्रेम को हमारा सलाम!