जी हां दस्तो उत्तराखंड की सियासत में चुनाव से पहले ही बड़ा घमासान छिड़ गया है! जिस पहाड़ी दल ने चुनावी मैदान में जीत का दावा किया, उसी के भीतर अब बड़े नेता को बाहर का रास्ता दिखाए जाने से सवाल खड़े हो गए हैं। आखिर ऐसा क्या हुआ कि चुनाव से ठीक पहले पार्टी में बगावत के सुर तेज हो गए? क्या अंदरूनी कलह इस बार चुनावी दावे पर भारी पड़ेगी? दोस्तो जीत के दावे, भीतर घमासान,UKD में क्यों बढ़ा तूफान? बड़े नेता पर चला अनुशासन का वार, चुनाव से पहले क्यों बिखरा परिवार! दोस्तो मै आपको उत्तराखंड के एक मात्र क्षेत्रीय दल के एक बड़े विकेट गिरने की कहानी। UKD इनके दावे तामाम हैं और भविष्य के साथ भूत को बड़े अच्छे तरीके समझे हैं और समझा रहे हैं लेकिन दोस्तो उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) में विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा संगठनात्मक घटनाक्रम सामने आ रहा है। पार्टी की केंद्रीय अनुशासन समिति ने पूर्व केंद्रीय उपाध्यक्ष आशुतोष नेगी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें छह वर्षों के लिए दल से निष्कासित कर दिया है। पार्टी की ओर से जारी आदेश में नेगी की प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की बात कही गई है। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब उत्तराखंड क्रांति दल चुनावी तैयारियों में जुटा है।
नेगी के खिलाफ पार्टी ने लगातार सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर दिए गए कथित आपत्तिजनक, भ्रामक एवं तथ्यहीन बयानों को कार्रवाई का प्रमुख आधार बताया है। मामले की पृष्ठभूमि में आशुतोष नेगी का वह कथित बयान भी बताया जा रहा है, जिसमें उन्होंने किसी UKD नेता द्वारा 20 करोड़ रुपये लिए जाने का आरोप लगाया था। इस बयान को पार्टी के भीतर विवाद की बड़ी वजह माना जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध आदेश में किसी नेता का नाम स्पष्ट रूप से नहीं लिखा गया है और इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि भी सामने नहीं आई है। इसी बयान को लेकर पार्टी नेतृत्व और नेगी के बीच मतभेद और गहरे होने की चर्चा है। नेगी की ओर से इस मामले में फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दोस्तो केंद्रीय अनुशासन समिति के आदेश के मुताबिक, नेगी को इससे पहले भी अनुशासन संबंधी नोटिस जारी किया गया था। पार्टी का कहना है कि 9 जुलाई 2026 को नोटिस दिए जाने के बाद नेगी ने 17 जुलाई को अपने जवाब में खेद व्यक्त किया था। इसके बावजूद पार्टी के अनुसार उनके सार्वजनिक बयानों में अपेक्षित बदलाव नहीं आया और वरिष्ठ नेताओं तथा शीर्ष नेतृत्व को लेकर उनकी बयानबाजी जारी रही।
इसके अलावा दोस्तो आदेश में यह भी कहा गया है कि केंद्रीय कार्यालय में पार्टी अध्यक्ष को लेकर कथित तौर पर अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने के बाद नेगी को उनके पद से मुक्त किया गया था। दोस्तो पार्टी की अनुशासन समिति ने 22 अगस्त 2026 को नेगी से उनके द्वारा लगाए गए आरोपों के समर्थन में ठोस प्रमाण और साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा था। पार्टी का दावा है कि नेगी की ओर से ऐसा संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया, जिससे उनके आरोपों की पुष्टि हो सके। दोस्तो अनुशासन समिति ने अपने आदेश में कहा कि नेगी को अपने आचरण में सुधार का पर्याप्त अवसर दिया गया, लेकिन इसके बाद भी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ सार्वजनिक बयान जारी रहे। पार्टी ने अपने आदेश में नेगी के लगातार सार्वजनिक बयानों को संगठन के लिए नुकसानदायक बताया है। साथ ही समिति ने उनके आचरण को दल-विरोधी गतिविधियों से जोड़ते हुए गंभीर टिप्पणी की है। आदेश में यह भी उल्लेख है कि आगामी चुनाव को देखते हुए पार्टी ने संभावित उम्मीदवारों से आवेदन मांगे थे, लेकिन नेगी ने औपचारिक रूप से आवेदन नहीं किया। पार्टी के मुताबिक, नेगी ने रायपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी और शीर्ष नेतृत्व की ओर से उन्हें सकारात्मक संकेत भी मिले थे। दोस्तो इसके अलावा यूकेडी ने के आदेश में बताया गया है कि आशुतोष नेगी ने वर्ष 2024 में उत्तराखंड क्रांति दल की प्राथमिक सदस्यता ली थी।
इसके बाद पार्टी ने उन्हें लोकसभा चुनाव लड़ने का अवसर दिया और केंद्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी सौंपी। नेगी को संगठन में युवाओं को आगे बढ़ाने की पार्टी की नीति के तहत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिए जाने का उल्लेख भी आदेश में किया गया है। ऐसे में उनका छह साल के लिए निष्कासन UKD की आंतरिक राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है और इधर दोस्तो यूकेडी के आदेश के अनुसार, छह वर्ष की निष्कासन अवधि के दौरान आशुतोष नेगी UKD के नाम, झंडे, चुनाव चिन्ह या किसी अधिकृत प्रतीक का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा वे स्वयं को पार्टी का अधिकृत पदाधिकारी या प्रतिनिधि भी प्रदर्शित नहीं कर पाएंगे। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन किए जाने की स्थिति में उपलब्ध कानूनी एवं संगठनात्मक प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। आशुतोष नेगी का निष्कासन उत्तराखंड क्रांति दल के लिए चुनावी दौर में एक अहम घटनाक्रम है। एक ओर पार्टी नेतृत्व ने अनुशासन और संगठन की छवि को कार्रवाई का आधार बताया है, वहीं नेगी की ओर से अभी इस पूरे मामले पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नेगी पार्टी के फैसले पर क्या रुख अपनाते हैं और उनके राजनीतिक सफर की अगली दिशा क्या होगी।