Ankita केस Urmila Sanawar के दावे से सियासी भूचाल! | CBI Court | Dushyant Gautam | Uttarakhand News

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क्या उत्तराखंड की धामी सरकार को गिराने के लिए पीठ पीछे कोई बहुत बड़ा खूनी राजनीतिक खेल खेला जा रहा था? क्या अंकिता भंडारी हत्याकांड के असली गुनहगारों को बचाने के लिए बड़े-बड़े कद्दावर नेता शामिल हैं? देहरादून की सीबीआई कोर्ट से आज जो सनसनीखेज खुलासे हुए हैं, उसने पूरी सियासी नीव हिलाकर रख दी है! दोस्तो नमस्कारदेवभूमि उत्तराखंड के सबसे संवेदनशील और बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में आज 23 अक्टूबर 2026 को देहरादून की विशेष सीबीआई कोर्ट के भीतर और बाहर वो ऐतिहासिक ड्रामा देखने को मिला, जिसकी भनक खुफिया तंत्र को भी नहीं थी! सबसे पहले आप देखिए कैसे बीजेपी के पूर्व विधायक सुरेश राठौर पर गजब तरीके से बिफरी उर्मिला सनावर। दोस्तो यहां एक लड़ाई और चल रही है खैर उसकी बात फिर करुंगा, लेकिन अभी बात अंकिता केस में कथित ‘VIP’ के चेहरे से नकाब उठाने के लिए सीबीआई कोर्ट पहुंची अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने भारतीय जनता पार्टी के कई बड़े राष्ट्रीय और राज्य स्तर के नेताओं पर सीधे परमाणु बम दाग दिए हैं! उर्मिला ने सरेआम आरोप लगाया है कि इस पूरे कांड के पीछे धामी सरकार को गिराने और बड़े नेताओं को बचाने का एक महा-चक्रव्यूह काम कर रहा था। उन्होंने नवनियुक्त राज्यपाल दुष्यंत गौतम समेत अन्य दिग्गजों के भी नार्को टेस्ट कराने की भारी मांग उठा दी है।

वहीं दूसरी तरफ, पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौड़ ने सबको चौंकाते हुए कोर्ट में नार्को टेस्ट कराने के लिए अपनी लिखित सहमति दे दी है। आखिर इस नार्को टेस्ट की हरी झंडी के बाद कौन-कौन से वीआईपी बेनकाब होने वाले हैं? दोस्तो क्या होगा आगे इंसाफ मिलागा अंकिता को और उसके माता-पिता को, दोस्तो इंसाफ की वो लड़ाई जो पौड़ी के पहाड़ों से शुरू होकर दिल्ली के इंडिया गेट तक गूंजी थी, आज यानी 23 अक्टूबर 2026 को देहरादून की सीबीआई विशेष अदालत की चौखट पर अपने सबसे विस्फोटक मुकाम पर पहुंच गई। अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी का सच उगलवाने के लिए सीबीआई की स्पेशल क्राइम ब्रांच की अर्जी पर आज कोर्ट रूम में भारी गहमा-गहमी देखी गई– दोस्तो एक तरफ उर्मिला सनावर के कोर्ट पहुंचने से ठीक पहले ज्वालापुर के पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौड़ ने एक बहुत बड़ा सियासी पासा फेंक दिया। राठौड़ ने कोर्ट के सामने बकायदा नार्को टेस्ट कराने के लिए अपनी पूर्ण सहमति दे दी और मीडिया के सामने उस सहमति पत्र को लहराते हुए साफ कहा कि वे दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए हर जांच में सहयोग को तैयार हैं। दोस्तो लेकिन असली भूचाल तब आया जब कोर्ट रूम से बाहर निकलते ही अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने मीडिया के कैमरों के सामने आकर सीधे भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय और प्रांतीय नेतृत्व को कटघरे में खड़ा कर दिया। उर्मिला ने आरोप लगाया कि यह मामला सिर्फ एक बेटी की हत्या का नहीं है, बल्कि इस पूरे कांड और विवादित कड़ियों के पीछे उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार को गिराने की एक बहुत बड़ी अंदरूनी राजनीतिक साजिश रची जा रही थी!

इधर दोस्तो उर्मिला ने चिल्लाते हुए कहा कि वे इस पूरे सिंडिकेट को एक्सपोज करके रहेंगी। उन्होंने दो टूक मांग की कि अगर अंकिता को सच्चा न्याय दिलाना है, तो सिर्फ सुरेश राठौड़ का नार्को टेस्ट काफी नहीं है, बल्कि सिक्किम के नवनियुक्त राज्यपाल दुष्यंत गौतम समेत उन तमाम बड़े चेहरों का भी नार्को टेस्ट लाइव कराया जाए जो उत्तराखंड भाजपा के प्रभारी और रणनीतिकार रहे हैं! दोस्तो उर्मिला सनावर के इन तल्ख और सीधे हमलों के बीच, पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौड़ के तेवर भी देखने लायक थे। पिछले दिनों हरिद्वार के शिवालिक गेस्ट हाउस में सीबीआई द्वारा की गई 4 घंटे की कड़ी पूछताछ के बाद, राठौड़ ने नार्को टेस्ट की हामी भरकर यह दिखाने की कोशिश की है कि वे बेकसूर हैं।लेकिन जब मीडिया ने उनसे उर्मिला द्वारा लगाए गए इन बड़े आरोपों और पूर्व में वायरल हुए ‘VIP गट्टू’ वाले 48 मिनट के कथित ऑडियो क्लिप पर तीखे सवाल पूछे, तो राठौड़ ने बेहद चालाकी से किनारा कर लिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने किसी भी बड़े नेता के खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया है। अब सवाल यह उठता है कि अगर सुरेश राठौड़ कोर्ट में उर्मिला सनावर को जानने से ही इनकार कर रहे हैं, तो फिर सीबीआई इन दोनों को आमने-सामने बिठाकर नार्को टेस्ट की प्रक्रिया को इतनी तेजी से आगे क्यों बढ़ा रही है? दोस्तो केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई ने उर्मिला सनावर और सुरेश राठौड़ के इस नार्को टेस्ट के लिए कोर्ट से विशेष अनुमति की जो प्रक्रिया शुरू की थी, उसे आज कोर्ट से बड़ा बूस्ट मिला है। नार्को टेस्ट के दौरान आरोपी या गवाह को ‘सोडियम पेंटोथल’ का इंजेक्शन देकर अर्ध-मूर्छित अवस्था में लाया जाता है, जहां झूठ बोलना नामुमकिन हो जाता है.. पूरे उत्तराखंड की जनता और 2027 के चुनावी दंगल में उतरने जा रही कांग्रेस इस वक्त सांस रोके इस कानूनी हंटर को देख रही है। अगर नार्को टेस्ट के दौरान उर्मिला या सुरेश राठौड़ के मुंह से दुष्यंत गौतम या किसी अन्य वीआईपी का नाम explicit रूप से बाहर आ गया, तो बीजेपी के ‘जीरो टॉलरेंस’ और ‘बेटी सुरक्षा’ के दावों का किला ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगा। दोस्तो धामी सरकार गिराने की साजिश का यह नया और विस्फोटक एंगल अंकिता भंडारी हत्याकांड को एक बेहद खतरनाक और अंतर्राष्ट्रीय राजनैतिक चक्रव्यूह में ले जा चुका है। अब देखना यह होगा कि कोर्ट से नार्को टेस्ट की तारीख कब मुकर्रर होती है और इस सच के बाहर आने के बाद देवभूमि की राजनीति में कितना बड़ा तख्तापलट होता है।