Student Union Election GEN Z का बड़ा जनादेश ।ABVP । NSUI । Uttarakhand News

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दोस्तो, उत्तराखंड छात्रसंघ चुनाव के नतीजों ने कैंपस की सियासत में हलचल बढ़ा दी है! कहीं बड़े संगठनों को झटका, तो कहीं निर्दलीयों ने बाजी मारी। Student Union Election डोईवाला से नैनीताल तक सामने आए नतीजे क्या इशारा कर रहे हैं? और आखिर GEN Z ने कैंपस की सियासत में कैसा जनादेश दिया? पूरी खबर देखिए दोस्तो कहां कौन जीता। दोस्तो देवभूमि के कॉलेजों में आज केवल वोट नहीं पड़े, बल्कि छात्र राजनीति के बड़े-बड़े धुरंधरों के दावों की हवा निकल गई है। छात्रसंघ चुनाव 2026 के जो नतीजे सामने आ रहे हैं, वो बेहद चौंकाने वाले हैं। जो पार्टियां खुद को अजेय मानकर चल रही थीं, आज जेन-ज़ी वोटरों ने उन्हें आइना दिखा दिया है। नैनीताल के प्रतिष्ठित डीएसबी कैंपस में निर्दलीय प्रत्याशी ने एबीवीपी को पटखनी दे दी, तो डोईवाला में दशकों पुराना किला ढहाकर यूएसएफ (USF) ने नया इतिहास रच दिया है। वहीं डीबीएस और कर्णप्रयाग में एनएसयूआई ने अपना परचम लहराया है, तो लक्सर और मसूरी में एबीवीपी ने अपना दबदबा साबित किया है। किस कॉलेज में किसने किसे धूल चटाई और कहां हुआ सबसे बड़ा उलटफेर? दोस्तो ढोल-नगाड़ों की थाप, हवा में उड़ता गुलाल और समर्थकों का यह हुजूम गवाह है कि उत्तराखंड की छात्र राजनीति में बड़ा फैसला हो चुका है। साल 2026 के इन छात्रसंघ चुनावों ने साबित कर दिया है कि कॉलेज का आम छात्र अब लकीर का फकीर नहीं रहा। सबसे बड़ा और ऐतिहासिक उलटफेर देखने को मिला नैनीताल के डीएसबी परिसर (DSB Campus) में, जहां किसी बड़े दल का सिंबल नहीं, बल्कि एक निर्दलीय का जलवा चला।

नैनीताल का DSB कॉलेज, यहां निर्दलीय प्रत्याशी भानु प्रताप चौहान ने अध्यक्ष पद पर 1355 वोट हासिल कर ABVP के शुभम कुमार को 482 वोटों के भारी अंतर से हरा दिया। संयुक्त सचिव पद पर अनुष पूरी और कोषाध्यक्ष पद पर सृष्टि रावत ने भी शानदार जीत दर्ज कर अपना लोहा मनवाया। दोस्तो जो पार्टियां मुख्यधारा की राजनीति में खुद को चाणक्य समझती हैं, उनके गढ़ में घुसकर नए लड़कों ने सेंध लगा दी है। शहीद दुर्गा मल्ल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय डोईवाला में वो हुआ जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। डोईवाला पीजी कॉलेज, बीजेपी का गढ़ माने जाने वाले डोईवाला कॉलेज में पहली बार चुनाव मैदान में उतरे USF के प्रत्याशी मोहित ममगाईं ने एनएसयूआई को 48 मतों से हराकर अध्यक्ष पद पर कब्जा कर लिया। दोस्तो सालों से राज करने वाली ABVP यहां तीसरे नंबर पर खिसक गई! हालांकि, एबीवीपी ने अपनी साख बचाते हुए उपाध्यक्ष पद पर रोहन पाल समेत सचिव और कोषाध्यक्ष के पदों पर जीत दर्ज की, लेकिन एनएसयूआई का यहां खाता तक नहीं खुला और उसका पूरी तरह सूपड़ा साफ हो गया। दोस्तो अब रुख करते हैं राजधानी देहरादून की तरफ, जहां डीबीएस कॉलेज में कांग्रेस समर्थित छात्र संगठन NSUI ने अपना परचम एक बार फिर लहरा दिया है। देहरादून DBS में NSUI फिर जीती, DBS में NSUI के अभिनव कफ़लिया ने 643 वोट पाकर ABVP के अभिषेक नेगी को पटखनी दे दी और अध्यक्ष पद पर कब्जा जमा लिया। सेरेक्री पद पर भी देवाशीष ने 605 वोटों से बंपर जीत दर्ज की।

दोस्तो परिणाम आते ही कांग्रेसी नेताओं ने कॉलेज पहुंचकर नवविजेता अध्यक्ष का स्वागत किया और कैंपस के बाहर जमकर पटाखे फोड़े गए। यही जलवा एनएसयूआई का कर्णप्रयाग कॉलेज में भी दिखा, जहां अध्यक्ष पद पर सुनील रावत, उपाध्यक्ष पद पर अंकित कुमार और सचिव पद पर सलोनी ने क्लीन स्वीप करते हुए एबीवीपी के पाले में सिर्फ सहसचिव की एक सीट छोड़ी। दोस्तो लेकिन ABVP ने भी मैदान खाली नहीं छोड़ा था। राजकीय महाविद्यालय लक्सर, राजकीय महाविद्यालय लक्सर में ABVP के सौरभ कुमार ने 84 मत पाकर अध्यक्ष पद पर शानदार विजय प्राप्त की, और यहां सचिव से लेकर यूआर (UR) पद तक पूरी तरह ABVP का एकतरफा कब्जा रहा। उधर दोस्तो पहाड़ों की रानी मसूरी के, मसूरी MPG कॉलेज का चुनाव परिणाम, MPG कॉलेज में भी ABVP ने अपना दमखम दिखाया, जहां कुल 74.9 प्रतिशत मतदान के बाद ABVP के वेदांत थापली ने 185 मत हासिल कर अध्यक्ष पद की कुर्सी अपने नाम की। वहीं महासचिव पद पर आशुतोष जोशी और विश्वविद्यालय प्रतिनिधि के पद पर करिश्मा डुमोगा ने जीत दर्ज कर मुख्य पदों पर ABVP का भगवा लहरा दिया।

इसके अलावा दोस्तो कर्णप्रयाग में NSUI की जीत, डॉ शिवानन्द नौटियाल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कर्णप्रयाग में कुल 1502 छात्र-छात्राओं में से 1201 ने वोट दिया। अध्यक्ष पद पर NSUI के सुनील रावत ने 76 वोटों से जीत हासिल की। वहीं उपाध्यक्ष पद पर भी NSUI के अंकित कुमार 65 वोटों से जीते। तो साफ बात यह है कि उत्तराखंड के इन छात्रसंघ चुनाव परिणामों ने कई बड़े राजनीतिक संदेश दे दिए हैं। जहां राष्ट्रीय दलों को अपनी जमीनी पकड़ मजबूत करने की हिदायत मिली है, वहीं युवाओं ने यह दिखा दिया है कि वे चेहरों और काम को देखकर वोट कर रहे हैं, न कि सिर्फ पार्टी के बड़े नामों को देखकर। सभी विजयी छात्र नेताओं को हमारी टीम की तरफ से बहुत-बहुत बधाई। उम्मीद है कि वे हुड़दंग से इतर छात्रों के असल मुद्दों के लिए काम करेंगे। इस चुनावी उलटफेर पर आपकी क्या राय है, कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।