Badrinath DJ पर मंत्री जी की ‘विवादित’ एंट्री!| Teerthpurohit | Satpal Maharaj | Uttarakhand News

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दोस्तो देवभूमि उत्तराखंड का वो पावन धाम, जहां कण-कण में भगवान बद्री विशाल बसते हैं, वहां इन दिनों भक्ति की गूंज से ज्यादा विवादों का शोर सुनाई दे रहा है। बद्रीनाथ धाम में हुए तथाकथित कल्चरल फेस्टिवल में बजे तेज DJ और लाउडस्पीकर का विवाद अभी थमा भी नहीं था कि सूबे के पर्यटन मंत्री ने इसमें घी डालने का काम कर दिया है! शंख को लेकर दिए तर्क पर तीर्थ पुरोहितों ने सवाल उठाए है। आखिर मंत्री जी ने ऐसा क्या कह दिया कि मामला अब और गरमा गया? और महाराज को क्यों कहा जा रहा है अज्ञैनी, बताउंगा आपको पूरी खबर। दोस्तो हाल में बद्रीनाथ धाम के आगन में सांस्कृतिक कार्यक्रम के नाम पर जो बवाल हुआ वो तो सबने देखा आप में से भी कई लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी मेने देखा है, लेकिन दोस्तो जहां इस पूरे मामले में एक्शन और बड़े ही सुलझे तरीके से इस पूरे विवाद को सुलझाया जाना था। वहां महाराज ने न सिर्फ धाम में तेज साउंड का बचाव किया, बल्कि सनातन संस्कृति के सबसे पवित्र प्रतीक ‘शंख’ को लेकर एक ऐसा विवादित बयान दे डाला, जिसने तीर्थ पुरोहितों के तन-बदन में आग लगा दी है। मंत्री जी का दावा है कि शंख ‘जानवर की हड्डी’ है! दोस्तो ये हो रहा है हमारे धामों में जिससे दुनिया देख रही है। दोस्तो बद्रीनाथ धाम, जहां की शांति, सौम्यता और सनातन परंपराएं सदियों से अक्षुण्ण हैं। लेकिन पिछले कुछ दिनों से यह धाम एक आधुनिक विवाद के केंद्र में है। विवाद शुरू हुआ ‘देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल’ से, जहां मर्यादाओं को ताक पर रखकर तेज साउंड, DJ और डांस के आयोजन का आरोप लगा। तीर्थ पुरोहितों से लेकर धार्मिक संगठनों ने इसे बद्री विशाल की परंपरा के खिलाफ बताया। मामला इतना गरमाया कि चमोली जिला प्रशासन ने गढ़वाल स्काउट्स के कमांडिंग ऑफिसर को नोटिस थमाकर जवाब तलब कर लिया। लेकिन जब उम्मीद थी कि सरकार इस पर मरहम लगाएगी, तभी एंट्री होती है सूबे के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज की।

दोस्तो पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने धाम में संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर उठ रहे सवालों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने तर्क दिया कि नारायण और नर पर्वत के बीच संगीत कोई नई बात नहीं है। महाराज ने कपाट खुलने और बंद होने के समय बजने वाले सेना के पारंपरिक बैगपाइप बैंड का उदाहरण दिया और कहा कि धाम में संगीत प्रतिबंधित नहीं है। लेकिन हद तो तब हो गई जब उन्होंने बद्रीनाथ मंदिर के भीतर शंख न बजने के पीछे का अपना ‘अनोखा तर्क’ देश के सामने रख दिया। मंत्री जी ने कैमरे पर कहा कि मंदिर के अंदर शंख इसलिए नहीं बजता क्योंकि मान्यता है कि शंख ‘जानवर की हड्डी’ से बना होता है! दोस्तो अब मंत्री जी ने तो बयान दे दिया, लेकिन सनातन परंपरा में पूजनीय शंख को ‘हड्डी’ बताना भारी पड़ गया। चारधाम महापंचायत के महासचिव बृजेश सती ने सतपाल महाराज को आड़े हाथों लेते हुए ऐसा तंज कसा जो मंत्री जी को लंबे समय तक चुभेगा। बृजेश सती ने कहा कि महाराज को उम्र के इस पड़ाव पर आकर ऐसा ‘दिव्य ज्ञान’ प्राप्त हुआ है जो बेहद हास्यास्पद है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस शंख को हर घर के मंदिर, हर धार्मिक अनुष्ठान और शुभ कार्य में सबसे पवित्र माना जाता है, उसे एक कैबिनेट मंत्री और धार्मिक गुरु किस आधार पर जानवर की हड्डी कह रहे हैं? महापंचायत ने दो टूक कहा कि महाराज को शास्त्रों और पुराणों का दोबारा अध्ययन करना चाहिए और ऐसे संवेदनशील बयान देने से पहले अपने सलाहकारों से ट्यूशन लेनी चाहिए।

दोस्तो तीर्थ पुरोहितों का सीधा आरोप है कि बद्रीनाथ धाम में जो DJ का असली विवाद था, जिससे जनता और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे थे, उससे ध्यान भटकाने के लिए जानबूझकर शंख का यह विवादित राग छेड़ा गया है। दोस्तो पुरोहितों ने मंत्री के उस तर्क को भी खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने मिलिट्री बैंड की तुलना आधुनिक लाउडस्पीकर और DJ कल्चर से कर दी थी। उनका कहना है कि पारंपरिक धार्मिक वाद्य यंत्रों की मर्यादा और कमर्शियल लाउडस्पीकर के शोर में जमीन-आसमान का अंतर होता है। कोर्ट के आदेश भी धार्मिक स्थलों पर शोर को लेकर सख्त हैं। ऐसे में आस्था के केंद्र में बैठकर दिया गया यह बयान अब सरकार के लिए गले की हड्डी बनता जा रहा है। तो दोस्तो कुल मिलाकर, बद्रीनाथ का यह DJ विवाद अब पूरी तरह से ‘मंत्री वर्सेस पुरोहित’ की जंग में तब्दील हो चुका है। एक तरफ पर्यटन मंत्री का अपना भूगोल और अपनी धार्मिक व्याख्या है, तो दूसरी तरफ सदियों से परंपराओं को संजोने वाले तीर्थ पुरोहितों का आक्रोश है। अब देखना यह होगा कि क्या शंख को ‘हड्डी’ बताने वाले अपने बयान पर सतपाल महाराज कोई सफाई पेश करते हैं या फिर देवभूमि में आस्था और आधुनिक तर्कों का यह घमासान और तेज होता है। इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट करके जरूर बताएं।