Japan में उत्तराखंड का जलवा! | Roorkee | Dr Divyansh Sharma | Tokyo | Ayurveda | Uttarakhand News

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जी हां दोस्तो जापान में एक बार फिर भारतीय ज्ञान परंपरा और आयुर्वेद का परचम लहराया है। देवभूमि उत्तराखंड के होनहार युवा डॉ. दिव्यांश शर्मा ने टोक्यो में आयोजित अंतरराष्ट्रीय वैदिक विज्ञान संगोष्ठी में भारत का प्रतिनिधित्व कर न सिर्फ उत्तराखंड बल्कि पूरे देश का मान बढ़ाया है। अपने शोध और प्रभावशाली व्याख्यान से वैश्विक मंच पर छाप छोड़ने वाले डॉ. दिव्यांश को अंतरराष्ट्रीय सम्मान से नवाजा गया। आखिर कैसे रुड़की से निकला यह युवा जापान में बना भारत की पहचान बताउंगा आपको पूरी खबर। दोस्तो देवभूमि उत्तराखंड की धरती एक बार फिर गौरव से भर उठी है। रुड़की स्थित क्वाड़्रा इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद के स्नातकोत्तर छात्र डॉ. दिव्यांश शर्मा ने जापान की राजधानी टोक्यो में आयोजित इंटरनेशनल सिम्पोजियम ऑन इंडियन वैदिक साइंसेज में भारत का प्रतिनिधित्व कर न केवल उत्तराखंड, बल्कि पूरे देश का मान बढ़ाया है। क्वाड़्रा इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद, रुड़की के एमडी अंतिम वर्ष के छात्र एवं संस्थान के स्नातकोत्तर छात्र डॉ. दिव्यांश शर्मा ने जापान की राजधानी टोक्यो में आयोजित इंटरनेशनल सिम्पोजियम ऑन इंडियन वैदिक साइंसेज में भारत का प्रतिनिधित्व किया। दोस्तो चिकित्सा ज्योतिष एवं आयुर्वेद के पारस्परिक संबंध विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनके शोधपूर्ण एवं ज्ञानवर्धक व्याख्यान को व्यापक सराहना हुई।

वही दोस्तो इस अवसर पर डॉ. दिव्यांश शर्मा ने उनके उत्कृष्ट योगदान एवं भारतीय वैदिक विज्ञानों के वैश्विक प्रचार-प्रसार में विशेष भूमिका के लिए अमृता तानाबे औक नोबोकी तानाबे द्वारा सम्मानित किया गया। यह सम्मान न केवल डॉ. दिव्यांश शर्मा की व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा, आयुर्वेद और क्वाड़्रा इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद के लिए भी गौरव का विषय है। दोस्तो यहां आपको बता दूं कि अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में डॉ. दिव्यांश शर्मा ने आयुर्वेद एवं चिकित्सा ज्योतिष के पारस्परिक संबंध, स्वास्थ्य संरक्षण में उनकी भूमिका तथा आधुनिक युग में इन प्राचीन भारतीय ज्ञान प्रणालियों की प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उनके विचारों ने विभिन्न देशों से आए विद्वानों, शोधकर्ताओं एवं विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया और भारतीय वैदिक विज्ञानों की वैज्ञानिक और व्यावहारिक उपयोगिता को वैश्विक मंच पर प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया। दोस्तो क्वाड़्रा इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद के निदेशक डॉ. एस. एस. रावत के साथ पूरे संस्थान ने डॉ. दिव्यांश शर्मा की इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान संस्थान के छात्रों की प्रतिभा, परिश्रम एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति समर्पण का परिणाम है। संस्थान सदैव छात्रों को शोध, नवाचार एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए प्रेरित करता रहा है। दोस्तो आज जब पूरी दुनिया आधुनिक चिकित्सा और तकनीक की ओर तेजी से बढ़ रही है, ऐसे समय में भारतीय ज्ञान परंपरा, आयुर्वेद और वैदिक विज्ञानों को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने का कार्य डॉ. दिव्यांश शर्मा ने किया है। टोक्यो में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में उन्होंने आयुर्वेद और चिकित्सा ज्योतिष के पारस्परिक संबंध, स्वास्थ्य संरक्षण में उनकी उपयोगिता और आधुनिक जीवन में उनकी प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे। डॉ. दिव्यांश का शोधपूर्ण और ज्ञानवर्धक व्याख्यान दुनिया के विभिन्न देशों से आए विद्वानों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों को इतना प्रभावित कर गया कि उन्हें भारतीय वैदिक विज्ञानों के वैश्विक प्रचार-प्रसार में विशेष योगदान के लिए सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें अमृता तानाबे और नोबोकी तानाबे द्वारा प्रदान किया गया। दोस्तो रुड़की से टोक्यो तक का यह सफर सिर्फ एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध वैदिक परंपरा और आयुर्वेद की वैश्विक विजय गाथा है।