दोस्तों, एक साल पहले उत्तरकाशी के धराली में कुदरत ने ऐसा कहर बरपाया था कि पूरा इलाका मलबे के पहाड़ में बदल गया था। घर उजड़े, सड़कें टूटीं, मंदिर दब गए और कई परिवारों ने अपनों को हमेशा के लिए खो दिया, लेकिन सवाल आज भी वही है—क्या एक साल बाद धराली सच में सुरक्षित हो पाया है?क्योंकि तस्वीरें गवाही दे रही हैं कि तबाही के निशान अब भी जमीन पर मौजूद हैं और प्रभावित लोग पूछ रहे हैं—अगर अगली आपदा आई तो क्या तैयारी है? दोस्तो उत्तरकाशी का धराली, वो जगह जहां पिछले साल 5 अगस्त को खीर गंगा ने ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि कुछ ही घंटों में जिंदगी पटरी से उतर गई। मलबे में दबे मकान, टूटे रास्ते, गंगोत्री हाईवे पर पसरा मलबा और वो जगह जहां कभी रौनक हुआ करती थी, वहां आज भी आपदा के निशान दिखाई देते हैं। दोस्तो इस आपदा ने धराली के कई परिवारों को गहरा जख्म दिया। बहुमंजिला भवन, कल्प केदार मंदिर, सेब के बगीचे और कई हेक्टेयर जमीन मलबे में दब गई। दोस्तो आठ स्थानीय निवासियों समेत करीब 70 लोग लापता हो गए थे। लंबे इंतजार के बाद शव नहीं मिलने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। दोस्तो एक साल हो गया है, लेकिन हालात अभी भी वैसे ही हैं। मलबा हटा दिया गया, लेकिन स्थायी सुरक्षा का इंतजाम नहीं हुआ। अगर दोबारा ऐसी आपदा आई तो हम कहां जाएंगे?
दोस्तो प्रभावित लोगों का कहना है कि प्रशासन ने नदी की धारा को पुराने रास्ते की ओर मोड़ने का काम जरूर किया है, लेकिन खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। साथ ही दोस्तो लोगों का आरोप है कि धराली को सिर्फ राहत और मुआवजे से नहीं, बल्कि मजबूत सुरक्षा व्यवस्था से बचाया जा सकता है। दोस्तो स्थानीय लोग कहते दिखाई दे रहे हैं कि हमें सिर्फ आर्थिक मदद नहीं चाहिए, हमें भविष्य की सुरक्षा चाहिए। नदी के किनारे मजबूत सुरक्षा दीवार और स्थायी समाधान जरूरी है। वहीं दोस्तो प्रशासन का दावा है कि आपदा के बाद राहत कार्यों के साथ-साथ पुनर्निर्माण और सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। दोस्तो जिला प्रशासन के मुताबिक लक्ष्य सिर्फ सहायता राशि बांटना नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों को दोबारा खड़ा करना और धराली को भविष्य की आपदाओं के लिए सुरक्षित बनाना है-दोस्तो अब सवालों के घेरे में खड़ा है सुरक्षा का मुद्दा। आखिर धराली को स्थायी सुरक्षा कब मिलेगी? इस पर प्रशासन का कहना है कि बड़ी परियोजनाओं पर काम आगे बढ़ रहा है। दोस्तो इधर प्रशासन की उम्मीद अब 300 करोड़ रुपये की स्वीकृत बाढ़ सुरक्षा परियोजनाओं पर टिकी है इन योजनाओं के जरिए भागीरथी घाटी को मजबूत सुरक्षा देने का दावा किया जा रहा है, लेकिन धराली के लोग इंतजार कर रहे हैं उस दिन का जब आपदा की डरावनी यादों की जगह सुरक्षा का भरोसा दिखाई देगा।
दोस्तो एक साल बाद भी धराली के जख्म भरे नहीं हैं, मलबा हट गया, लेकिन सवाल अभी भी खड़े हैं। अब देखना होगा कि 300 करोड़ की योजना धराली को सच में सुरक्षा का कवच दे पाती है या फिर पहाड़ एक और आपदा का इंतजार करते रहेंगे, लेकिन दोस्तो वो एक साल पहले का दर्द अभी सबके सामने है 5 अगस्त 2025 को धराली में खेरागाड़ बेसिन (खीर गंगा) में फ्लैश फ्लड आया था, जिससे धराली बाजार का बड़ा हिस्सा पूरी तरह तबाह हो गया था। इस आपदा में धराली में होटल, मकान, दुकान और सेब के बगीचे नष्ट हो गए थे। आपदा में कल्पेश्वर मंदिर भी मलबे के नीचे दब गया था और बाढ़ के साथ आया मलबा करीब 2 लाख वर्ग मीटर तक फैल गया था। इस आपदा से प्रभावितों परिवारों और मृतकों को आश्रितों को एसडीआरएफ मानकों के अनुसार 4 लाख रुपये और मुख्यमंत्री राहत कोष से 1 लाख रुपये प्रति परिवार सहायता प्रदान की गई। आपदा में 18 लोग घायल हुए, जिनमें 5 सामान्य एवं 13 गंभीर घायल शामिल थे। वहीं 115 पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त आवासीय भवनों के स्वामियों को 5-5 लाख रुपये की सहायता राशि दी गई, जबकि अब तक प्रभावित होटल स्वामियों को 6 करोड़ 83 लाख 73 हजार 848 रुपये से अधिक की सहायता वितरित की जा चुकी है। उधर, आपदा में बेघर हुए 115 परिवारों को छह माह तक 4 हजार प्रतिमाह की दर से 24 हजार प्रति परिवार किराया राशि सहायता उपलब्ध कराया गया, लेकिन लोगों के कई सवाल आज एक बाद भी शोर कर रहे हैं।