Uttarakhand BJP में टिकट पर भूचाल! | Election2027 | CM Dhami | Mahendar Bhatt | Uttarakhand News

Spread the love

उत्तराखंड बीजेपी में क्या टिकट को लेकर शुरू हो गया है बड़ा मंथन?क्या इंटरनल सर्वे रिपोर्ट ने कई मौजूदा विधायकों की चिंता बढ़ा दी है? सूत्रों के हवाले से खबर है कि करीब 32 विधायकों के टिकट पर पार्टी के अंदर मंथन तेज है। देहरादून से लेकर दिल्ली तक बैठकों का दौर। सवाल यही—क्या 2027 से पहले बीजेपी बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है? कौन बचाएगा अपनी सीट और किन चेहरों पर मंडरा रहा है खतरा? देखिए पूरी खबर। उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की ओर से कराए गए आंतरिक सर्वे में कई चौंकाने वाले संकेत मिले हैं। दोस्तो सूत्रों के अनुसार, बीजेपी के 47 वर्तमान विधायकों में से 32 के खिलाफ उनके क्षेत्रों में नाराजगी दर्ज की गई है। ऐसे में आगामी चुनाव में बड़ी संख्या में मौजूदा विधायकों के टिकट पर खतरा मंडराता दिखाई दे रहा है। दोस्तो वहीं पार्टी सूत्रों के मुताबिक पिछले दो महीनों के दौरान उत्तराखंड की सभी 70 विधानसभा सीटों पर विस्तृत फीडबैक जुटाया गया। इस दौरान स्थानीय कार्यकर्ताओं, प्रमुख सामाजिक हस्तियों और आम नागरिकों से अलग-अलग माध्यमों से बातचीत कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई।सर्वे रिपोर्ट में भाजपा के 47 विधायकों वाली सीटों में से 32 सीटों पर स्थानीय स्तर पर विधायकों के प्रति असंतोष सामने आया है। और माना जा रहा है कि पार्टी इन सीटों पर नए चेहरों को मौका देकर सत्ता विरोधी माहौल का असर कम करने की रणनीति पर काम कर रही है।

दोस्तो इस रिपोर्ट में और क्या सामने आया वो बताऊं उससे पहले आपको ये बताउं कि दिल्ली में एक बड़ी बैठक हुई और इस बैठक में कयास ये लगाए गए कि इन संकट वाली सीटों पर मंथन हुआ, लेकिन उससे पहले जब बीजेपी से सवाल किया तो वो इस कुछ और कहती है लेकिन सच क्या होगा दिल्ली की अचानक बैठक। अब दोस्तो बीजेपी वाले जो कहें कहें, लेकिन जो रिपोर्ट दिल्ली पहुंची वो रिपोर्ट बता रही है बल कि, जनता का गुस्सा सरकार की नीतियों से ज्यादा कई स्थानीय विधायकों के कामकाज को लेकर है और दोस्तो सर्वे के अनुसार लोगों का मानना है कि भाजपा सरकार के दस वर्षों के कार्यकाल में विकास के अनेक कार्य हुए हैं, लेकिन कई क्षेत्रों में जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली को लेकर असंतोष बना हुआ है। रिपोर्ट में स्थानीय मुद्दों, आंतरिक गुटबाजी, कुछ स्तरों पर प्रशासनिक ढिलाई और युवाओं में नाराजगी जैसे बिंदुओं का भी जिक्र किया गया है। पार्टी नेतृत्व इन कमियों को समय रहते दूर करने की रणनीति तैयार कर रहा है। तो वहीं बीजेपी के 32 विधायकों के टिकट कटने पर चुटकी ले रही है और वो सरकार के साथ प्रदेश के मुख्यमंत्री की सीट को भी संकट में बता रही है। दोस्तो ये तो बात रही बीजेपी के सर्वे पर कांग्रेस के तगड़े रिएक्शन की लेकिन दोस्तो जिस सर्वे के हवाले से ये खबर हवा में है कि मौजूदा विधायकों में से ज्यादातर के टिकट कटने वाले हैं। इसके अलावा दोस्तो इस सर्वे रिपोर्ट में पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा के हाथ से निकली 23 सीटों का भी विश्लेषण किया गया। इनमें से लगभग 10 सीटों पर पार्टी की स्थिति पहले की तुलना में बेहतर बताई गई है। संगठन का मानना है कि सही उम्मीदवार चयन और स्थानीय रणनीति के जरिए इन सीटों पर वापसी की जा सकती है।

वहीं खबरों के मुताबिक ये चौकाने वाली बात निकलकर सामने आई जिसका जिक्र कांग्रेस भी कर रही है कि पार्टी नेतृत्व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए भी सुरक्षित विधानसभा सीट के विकल्पों पर विचार कर रहा है। नेतृत्व चाहता है कि चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री पूरे प्रदेश में प्रचार पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित कर सकें और उन्हें अपनी सीट को लेकर अतिरिक्त दबाव का सामना न करना पड़े। दोस्तो गौर करने वाली बात ये कि साल 2022 के विधानसभा चुनाव में धामी खटीमा सीट से चुनाव हार गए थे। इसके बाद उन्होंने चंपावत विधानसभा सीट से उपचुनाव जीतकर विधानसभा में वापसी की थी। पार्टी के भीतर यह भी माना जा रहा है कि विपक्ष की मजबूती या कमजोरी चुनावी नतीजों का सबसे बड़ा आधार नहीं होती। संगठन का मानना है कि उत्तराखंड में स्थानीय स्तर पर उम्मीदवारों की स्वीकार्यता अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कई सियासि जानकार इस खबर पर उदाहरण देते हुए कहा कि, पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी के कार्यकाल में कांग्रेस कमजोर स्थिति में थी, लेकिन कई सीटों पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ नाराजगी के कारण BJP को सत्ता से बाहर होना पड़ा था। दोस्तो यही वजह है कि पार्टी इस बार उम्मीदवार चयन को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। वहीं दोस्तो राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि आंतरिक सर्वे के निष्कर्षों के आधार पर निर्णय लिया गया तो वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा कई सीटों पर नए उम्मीदवारों को मैदान में उतार सकती है। फिलहाल पार्टी नेतृत्व सर्वे रिपोर्ट के आधार पर संगठनात्मक स्तर पर मंथन कर रहा है और अंतिम फैसला चुनावी तैयारियों के अगले चरण में लिया जाएगा।