सावधान हो जाइए! क्योंकि देवभूमि के पहाड़ों पर अगले 5 दिन काल बनकर बरसने वाले हैं! मौसम विभाग ने आज से 8 सितंबर तक का वो खौफनाक अलर्ट जारी किया है, जो इस हँसते-खेलते पहाड़ को मलबे के ढेर में तब्दील कर सकता है। कल की तबाही ने अभी संभलने का मौका भी नहीं दिया था कि आपदा विभाग ने अगले 48 घंटों की एक और डरावनी तस्वीर सामने रख दी है, अब कैसे और क्यों जारी हुआ अगले 2 दिनों का ‘डेथ वॉर्निंग’ अलर्ट! बताउंगा आपको पूरी खबर। नैनीताल से लेकर हल्द्वानी और देहरादून तक, पानी का ऐसा तांडव मचा है कि चारों तरफ सिर्फ मौ’त का सन्नाटा है। क्या हमारा सिस्टम इस महा-अलर्ट के लिए तैयार है, या फिर मासूमों की बलि चढ़ने का इंतजार हो रहा है? दोस्तो ये इसलिए पूछा जा सकता है क्योंकि उत्तराखंड में बीते 24 घंटों में जो कुछ भी हुआ, उसे देखकर किसी भी संवेदनशील इंसान की रूह कांप जाए। प्रदेशभर में भारी बारिश का दौर जारी है, राजधानी देहरादून हो, नैनीताल हो, अल्मोड़ा हो या फिर भीमताल—नदियों का तेज बहाव और लगातार हो रहे भूस्खलन ने कई हँसते-खेलते परिवारों को उजाड़ दिया है, कई लोगों की दर्दनाक मौ’त हो चुकी है। कुदरत का ये रूप चेतावनी है उस सिस्टम को, जो फाइलों से बाहर ही नहीं निकलता। दोस्तो आपदा सचिव विनोद कुमार सुमन ने खुद माना है कि प्रदेश के अधिकांश जिलों में 100 मिलीमीटर से अधिक की भारी बारिश दर्ज की गई है। लेकिन ये सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, ये पहाड़ के लोगों की बेबसी की कहानी है! दोस्तो इन आंकड़ों को जरा गौर से सुनिए और तबाही की गहराई को समझिए। नैनीताल में रिकॉर्ड 217 मिलीमीटर और हल्द्वानी में 122 मिलीमीटर बारिश ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया है। दोस्तो पहाड़ से लेकर मैदान तक नदियां अपनी सीमाओं को लांघ चुकी हैं। भीमताल और अल्मोड़ा के पहाड़ी रास्तों पर मलबे का ऐसा कब्जा है कि जिंदगी पूरी तरह ठहर गई है।
सरकारी दावों के मुताबिक, अगले दो दिनों के लिए येलो अलर्ट जारी है, जिसमें 62 से लेकर 150 मिलीमीटर तक और बारिश हो सकती है। यानी दोस्तो जो इलाका पहले से ही पानी-पानी है, वहाँ और पानी बरसेगा। ये येलो अलर्ट नहीं, पहाड़ के लोगों के लिए आफत का वारंट है! दोस्तो प्रदेश भर में अधिकांश जिलों में 100 से अधिक एमएम की बारिश दर्ज की गई है। जिससे कई लोगों की मौत भी हुई है। अगले 2 दिनों के लिए येलो अलर्ट जारी है, जिसमें 62 से 150 एमएम की बारिश होनी संभव होगी। बारिश के अलर्ट को देखते हुए सभी टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। सचिव साहब कह रहे हैं कि टीमें अलर्ट मोड पर हैं। लेकिन सवाल ये है कि जब हर साल सितंबर के महीने में यही कहानी दोहराई जाती है, तो पहले से पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं होते? मौसम विभाग चिल्ला-चिल्ला कर कह रहा है कि 3 से 8 सितंबर तक उत्तराखंड के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश होने वाली है। जब आसमान से आफत बरसती है, तो पहाड़ की कमजोर सड़कें टूट जाती हैं, पुल बह जाते हैं। अलर्ट मोड पर सिर्फ अधिकारियों की बैठकें होती हैं या धरातल पर कोई ऐसी तकनीक भी आएगी जो इन मासूमों की जान बचा सके? 3 से 8 सितंबर के बीच का ये समय उत्तराखंड के लिए किसी कड़े इम्तिहान से कम नहीं है मौसम विभाग की ये चेतावनी आखिरी चेतावनी है। अगर शासन और प्रशासन ने अब भी ढिलाई बरती, तो नैनीताल की 217 एमएम और हल्द्वानी की 122 एमएम की ये बारिश आगे और भी भयानक मंजर दिखाएगी। कुदरत अपना काम कर रही है, लेकिन हमारा सिस्टम कब सुधरेगा, ये सबसे बड़ा सवाल है। देवभूमि की जनता को अब खोखले आश्वासनों की नहीं, बल्कि सुरक्षित जिंदगी की जरूरत है।