Harak Singh Rawat बयान से क्यों मचा बवाल? | Vandemataram | Mahendra Bhatt | CM | Uttarakhand News

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दोस्तो उत्तराखंड की सियासत में एक ताजा और नए बयान से सियासत में भूचाल आ चुका है, क्या देवभूमि उत्तराखंड की सियासत अब राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर एक बेहद निचले स्तर के वाकयुद्ध में तब्दील हो चुकी है? एक तरफ देश के केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और सूबे के मुखिया पुष्कर सिंह धामी संतों के मंच से पूरे देश में ‘वंदे मातरम’ के पूर्ण गायन का अलख जगाने की बात करते हैं, तो दूसरी तरफ कांग्रेस के दिग्गज और अपने बेबाक बयानों के लिए मशहूर डॉ. हरक सिंह रावत ने एक ऐसा विस्फोटक और मर्यादाविहीन बयान दे दिया है जिसने देहरादून से लेकर दिल्ली तक आग लगा दी है। बताउंगा आपको कैसे हरक सिंह रावत के इस बयान से मचा सियासी बवाल। हरक सिंह रावत ने सीधे कैमरे पर दहाड़ते हुए कह दिया है कि—’क्या हम बीजेपी के टट्टू हैं जो इनके कहने पर वंदे मातरम गाएं?’ दोस्तो आखिर देशभक्ति के इस महा-संग्राम में हरक सिंह रावत का गुस्सा बीजेपी पर क्यों इस कदर फूटा है? और क्या कांग्रेस का यह बयान आगामी चुनावों में उस पर ही भारी पड़ने वाला है? दोस्तो उत्तराखंड की राजनीति के ‘रॉबिनहुड’ और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. हरक सिंह रावत अपने तीखे और बेबाक तेवरों के लिए जाने जाते हैं… लेकिन इस बार हरक सिंह रावत ने बीजेपी को घेरने के चक्कर में एक ऐसा बयान दे दिया है जो सामाजिक और राजनीतिक मर्यादा की सभी सीमाओं को लांघ गया है। राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर छिड़ी बहस पर जब मीडिया ने उनसे सवाल पूछा, तो हरक सिंह रावत का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने सीधे तौर पर बीजेपी को आड़े हाथों लेते हुए मर्यादाविहीन शब्दों का इस्तेमाल किया, जिसने उत्तराखंड के शांत वादियों में एक नया सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। हरक सिंह रावत के कड़वे बोल, कि हम BJP के टट्टू हैं क्या, जो इनके कहने से वंदे मातरम गाएंगे? हमें देशभक्ति और राष्ट्रवाद का सर्टिफिकेट BJP के नेताओं से लेने की कोई ज़रूरत नहीं है। दोस्तो साफ कह दिया हरक सिंह रावत ने कि जब भी चुनाव पास आते हैं, बीजेपी जनता का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे मजहबी और राष्ट्रगीत के मुद्दों को सामने ले आती है। साथ ही दोस्तो हरक सिंह रावत यहीं नहीं रुके। उन्होंने बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस का एक-एक कार्यकर्ता राष्ट्रभक्त है और हमारे खून में देश सेवा है। हम किसी राजनीतिक दल के एजेंडे को थोपने के लिए उनके इशारों पर नहीं नाचेंगे।

रावत के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, फेसबुक और यूट्यूब पर आते ही वायरल हो गया है। जहां एक तरफ कांग्रेस के समर्थक इसे बीजेपी के थोपे गए राष्ट्रवाद के खिलाफ एक बड़ी हुंकार मान रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आम जनता और बहुसंख्यक समाज में राष्ट्रगीत के अपमान को लेकर हरक सिंह रावत के खिलाफ भारी गुस्सा देखा जा रहा है। अब जरा इस विवाद के पीछे के असली सच और उसकी क्रोनोलॉजी को समझिए। दरअसल, दो दिन पहले ही केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार और ऋषिकेश के शीर्ष संतों के साथ एक उच्च स्तरीय सामाजिक और धार्मिक बैठक की थी। इस बैठक के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने देवभूमि के संत समाज से यह भावुक अपील की थी कि वे समाज में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ के साथ-साथ पूरे देश में ‘वंदे मातरम’ के पूर्ण गायन को लेकर एक बड़ा जन-जागरण अभियान चलाएं। मुख्यमंत्री धामी ने भी संतों के इस संकल्प का पूरा समर्थन किया था। दोस्तो ऐसा लगा रहा है कि इसी संतों की बैठक और बीजेपी के इस कदम से तिलमिलाई कांग्रेस के नेता अब इस तरह के आक्रामक और विवादित बयान दे रहे हैं। दोस्तो हरक सिंह रावत के इस ‘टट्टू’ वाले बयान पर बीजेपी ने भी बिना कोई वक्त गंवाए चौतरफा महा-हमला बोल दिया है। बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस हमेशा से राष्ट्रगीत और राष्ट्रवाद का विरोध करती आई है और हरक सिंह रावत का यह बयान उनकी उसी मानसिकता का प्रतीक है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तराखंड कांग्रेस इस समय अंदरूनी कलह से जूझ रही है। एक तरफ हरीश रावत ने चुनावी संन्यास का ऐलान कर दिया है, हरक सिंह रावत का यह बयान कांग्रेस के लिए ‘सेल्फ गोल’ साबित हो सकता है, क्योंकि उत्तराखंड जैसी देवभूमि और सैनिकों के राज्य में वंदे मातरम पर ऐसी भाषा जनता को कतई बर्दाश्त नहीं होती। दोस्तो राजनीति में विरोध होना लाज़मी है, नीतियों पर प्रहार होना भी जायज है, लेकिन राष्ट्रगीत और राष्ट्र के प्रतीकों को लेकर ऐसी भाषा का इस्तेमाल क्या हमारी देवभूमि की राजनीतिक संस्कृति को शोभा देता है? हरक सिंह रावत के इस विस्फोटक बयान ने उत्तराखंड के चुनावी समर को पूरी तरह गरमा दिया है। इस पूरे मुद्दे पर और हरक सिंह रावत के इस कड़े बयान पर आपकी क्या राय है? क्या राजनीतिक दलों को राष्ट्रगीत पर ऐसी बयानबाजी से बचना चाहिए? कमेंट बॉक्स में अपनी बेबाक राय ज़रूर दें। उत्तराखंड के इस सबसे बड़े राजनीतिक भूचाल की कहानी को फेसबुक और यूट्यूब पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। हमारे चैनल को फॉलो करना न भूलें।