आखिर क्यों 8 दशक बाद Kishau Project की बारी! | Tonsriver | Hydropower | CM Dhmi | Uttarakhand News

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दोस्तो, 8 दशक का इंतजार, अब किशाऊ बांध का सपना धरातल पर उतरने जा रहा है!उत्तराखंड-हिमाचल सीमा पर बनने वाली इस विशाल परियोजना से बिजली, सिंचाई और पेयजल—छह राज्यों को बड़ा फायदा मिलेगा!आखिर क्या है किशाऊ प्रोजेक्ट का पूरा प्लान और क्यों माना जा रहा है इसे गेमचेंजर? दोस्तो ये तस्वीर देवभूमि उत्तराखंड को ऊर्जा प्रदेश बनाने और देश के 6 राज्यों की प्यास बुझाने वाले सबसे बड़े प्रोजेक्ट को लेकर ऐतिहासिक खुशखबरी की तस्वीर है। वो कैसे आगे आप बेहतर तरीके से जान पाएंगे। दोस्तो सालों से फाइलों के भीतर धूल फांक रही किशाऊ बांध परियोजना को आखिरकार एक बहुत बड़ी सौगात मिल चुकी है! इस प्रोजेक्ट के धरातल पर उतरने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है, जो न सिर्फ उत्तराखंड को बिजली से हमेशा रोशन रखेगा, बल्कि देश के विकास की नई इबारत लिखेगा! दोस्तो उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर टोंस नदी पर बनने वाला यह विशालकाय डैम देश का दूसरा सबसे बड़ा बांध होने जा रहा है! महज एक प्रोजेक्ट से 660 मेगावाट क्लीन एनर्जी पैदा होगी और दिल्ली-हरियाणा समेत आधे उत्तर भारत को पीने का पानी मिलेगा। दोस्तो फिर आखिर सालों से क्यों लटका रहा ये प्रोजेक्ट और अब क्यों और कैसे मिली मिली रफ्तार? और क्यों इसे मोदी और धामी सरकार का अब तक का सबसे बड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है?

दोस्तो उत्तराखंड के विकास और देश की ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम आगे बढ़ा है। लंबे समय से कानूनी, प्रशासनिक और पर्यावरणीय मंजूरियों के फेर में फंसी राष्ट्रीय महत्व की किशाऊ बांध परियोजना (Kishau Dam Project) को आखिरकार बड़ी सौगात मिली सभी प्रमुख बाधाएं दूर होने के बाद अब इस बहुप्रतीक्षित मेगा प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य में अभूतपूर्व तेजी आने वाली है। इस परियोजना के शुरू होने की खबर से उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में भारी उत्साह है। दोस्तो आइए आपको बताते हैं कि किशाऊ बांध प्रोजेक्ट आखिर कितना बड़ा और महत्वपूर्ण है। उत्तराखंड के देहरादून जिले और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की सीमा पर टोंस नदी पर 236 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रैविटी डैम बनाया जा रहा है। यह टिहरी बांध के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा बांध होगा। इस डैम की कुल जल भंडारण क्षमता 1324 मिलियन क्यूबिक मीटर होगी। सबसे बड़ी बात यह है कि इस प्रोजेक्ट से 660 मेगावाट की जलविद्युत क्षमता तैयार होगी, जिससे सालाना 1379 मिलियन यूनिट ग्रिड-फ्रेंडली बिजली पैदा की जाएगी। और यह बिजली देवभूमि उत्तराखंड को हमेशा ऊर्जा से लबालब रखेगी। दोस्तो किशाऊ प्रोजेक्ट सिर्फ बिजली देने वाला पावर हाउस नहीं है, बल्कि यह आधा दर्जन राज्यों के लिए जीवनदायिनी बनने जा रहा है। केंद्र सरकार ने इसे ‘राष्ट्रीय परियोजना’ (National Project) घोषित किया है।

इस बांध से निकलने वाले पानी से 6 राज्यों—उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और देश की राजधानी दिल्ली की पीने के पानी और सिंचाई की जरूरतें पूरी होंगी। इसके जरिए 97,076 हेक्टेयर भूमि को अतिरिक्त सिंचाई की सुविधा मिलेगी, जिससे किसानों की किस्मत बदल जाएगी। वहीं, दिल्ली-एनसीआर को रोजाना करोड़ों गैलन शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित होगी। वहीं दोस्तो इस परियोजना को मिली सौगात के बाद स्थानीय स्तर पर विकास का एक नया अध्याय शुरू होने वाला है। किशाऊ बांध के निर्माण के दौरान और उसके बाद हजारों स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। इतना ही नहीं, टिहरी झील की तर्ज पर किशाऊ बांध के विशाल जलाशय को भी एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और वाटर स्पोर्ट्स हब के रूप में विकसित करने का खाका तैयार किया गया है। इससे जौनसार-बावर और हिमाचल के सीमावर्ती इलाकों में होमस्टे और टूरिज्म का बिजनेस तेजी से चमकेगा, जिससे पलायन पर भी ब्रेक लगेगा। दोस्तो किशाऊ बांध परियोजना को मिली यह हरी झंडी देवभूमि उत्तराखंड के स्वर्णिम भविष्य की गारंटी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की तत्परता से यह नामुमकिन दिखने वाला प्रोजेक्ट अब हकीकत बनने जा रहा है। जब यह डैम पूरी तरह तैयार होगा, तो यह न सिर्फ उत्तराखंड को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाएगा, बल्कि उत्तर भारत की ऊर्जा और पानी की किल्लत को हमेशा के लिए खत्म कर देगा।उत्तराखंड के विकास के इस सबसे बड़े गेमचेंजर प्रोजेक्ट पर आपकी क्या राय है।