Ankita Bhandari Case में अब दिल्ली कूच की तैयारी? | CBI | CM Dhami | Justice | Uttarakhand News

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दोस्तो अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग एक बार फिर सड़कों पर गूंज उठी है!चार साल बाद देहरादून में CBI दफ्तर के बाहर प्रदर्शन हुआ, लेकिन प्रदर्शनकारियों को वहां से जो जवाब मिला, उसने नया सवाल खड़ा कर दिया—अगर जांच देहरादून में नहीं हो रही, तो आखिर कहां हो रही है? अब क्या दोस्तो प्रदर्शनकारी दिल्ली तक आवाज उठाने की तैयारी करेंगे। क्या अंकिता केस की जांच को लेकर फिर बढ़ेगा आंदोलन? पूरी खबर देखिए सीबीआई के बड़े अधिकारियों का चौंकाने वाले जवाब ने कैसे अंकिता कि न्याय की चिंगारी को भड़का दिया है। दोस्तो देवभूमि उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी हत्याकांड को पूरे 4 साल हो चुके हैं, लेकिन न्याय की फाइलें आज भी जांच एजेंसियों की अलमारियों में धूल फांक रही हैं! आज उत्तराखंड का गुस्सा किसी ज्वालामुखी की तरह देहरादून में सीबीआई दफ्तर के बाहर फट पड़ा है! विभिन्न सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों के नेताओं ने आज सीधे सीबीआई दफ्तर का घेराव कर दिया और अधिकारियों को कटघरे में खड़ा कर दिया! जनता का सीधा सवाल है—4 साल बीत गए, लेकिन उस सफेदपोश ‘VIP’ का नाम और उसकी भूमिका पर सीबीआई आज भी खामोश क्यों है? दोषियों को फांसी के फंदे तक पहुंचाने में इतनी ढिलाई क्यों हो रही है? लेकिन जब प्रदर्शनकारियों ने सीबीआई से सीधा जवाब मांगा, तो एजेंसी ने एक ऐसा पल्ला झाड़ लिया जिसने आग में घी का काम कर दिया है!

सीबीआई ने कहा—जांच यहाँ नहीं, दिल्ली से चल रही है! इसके बाद आक्रोशित जनता ने ऐलान कर दिया है कि अगर इंसाफ के लिए दिल्ली का तख्त हिलाना पड़ा, तो उत्तराखंड पीछे नहीं हटेगा! अब दिल्ली आकर सीबीआई से पूछना पड़ेगा बल। दोस्तो इंसाफ में देरी, न्याय की हत्या के बराबर होती है! 18 सितंबर 2022 को उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी को मौत के घाट उतार दिया गया था। आज ठीक 4 साल बाद, साल 2026 में देवभूमि की सड़कों पर एक बार फिर इंसाफ का सैलाब उमड़ पड़ा है। दोस्तो देहरादून स्थित CBI के प्रांतीय कार्यालय के बाहर आज सुबह से ही भारी तनाव देखा गया, विभिन्न जनसंगठनों, महिला मंचों और विपक्षी दल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर सीबीआई दफ्तर के गेट पर तालाबंदी करने की कोशिश की और सीधे तौर पर देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी से जवाब मांगा। दोस्तो प्रदर्शनकारियों का गुस्सा इस बात को लेकर था कि जिस ‘VIP’ एंगल की जांच के लिए इस केस को सीबीआई के हवाले किया गया था, उस पर आज तक कोई ठोस प्रगति क्यों नहीं दिखी? जनता पूछ रही है कि उस रिजॉर्ट में आने वाला वो रसूखदार वीआईपी कौन था, जिसके लिए एक 19 साल की मासूम बेटी पर दबाव बनाया गया था? 4 साल बीत जाने के बाद भी उस वीआईपी की भूमिका पर कोई आधिकारिक रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? क्या जांच एजेंसियां केवल कोर्ट के फैसलों की आड़ में असली मास्टरमाइंड को बचाना चाहती हैं?

दोस्तो जब हंगामा बढ़ा और प्रदर्शनकारियों ने सीबीआई के शीर्ष अधिकारियों से मिलकर इस सुस्त जांच का हिसाब मांगना चाहा, तो कार्यालय के भीतर से एक ऐसा जवाब आया जिसने सबको हैरान कर दिया। सीबीआई के स्थानीय कार्यालय द्वारा साफ तौर पर कह दिया गया कि इस पूरे मामले की मुख्य जांच देहरादून से नहीं, बल्कि दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्यालय से संचालित की जा रही है! यानी देहरादून दफ्तर के पास जांच की प्रगति को लेकर कोई सीधा या स्पष्ट जवाब नहीं था। इस जवाब ने प्रदर्शनकारियों के इस शक को और पुख्ता कर दिया कि स्थानीय स्तर पर केवल मामले को लटकाने और शांत करने की कोशिश की जा रही है। सीबीआई के अधिकारियों के जवाब को यहां एक बार आपको फिर सुनना चाहिए। दोस्तो सीबीआई के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये और पल्ला झाड़ने की नीति से आंदोलनकारी और भड़क उठे हैं। उन्होंने सीधे तौर पर ऐलान कर दिया है कि अगर देहरादून कार्यालय के पास जवाब नहीं है, तो अब उत्तराखंड की जनता चुप नहीं बैठेगी। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि उनका अगला पड़ाव अब दिल्ली स्थित सीबीआई का मुख्य मुख्यालय होगा!

उत्तराखंड की मातृशक्ति और युवा अब दिल्ली कूच करेंगे और देश की राजधानी में बैठकर अंकिता के हत्यारों और उसे छुपाने वाले सफेदपोशों का हिसाब मांगेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो यह आंदोलन अब सरकार और केंद्रीय जांच एजेंसी दोनों के लिए एक बड़ी गले की फांस बनने जा रहा है। वहीं अंकिता पर सीएम धामी का बेबाक बयान, बोले- न्याय में देरी नहीं होगी!!साथ ही उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंकिता भंडारी मामले पर कांग्रेस पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि तीनों दोषियों को सज़ा हो चुकी है। अंकिता के माता पिता की मांग पर सीबीआई जांच चल रही है, और न्याय में देरी नहीं होगी। कांग्रेस के पास कोई मुद्दा नहीं, इसलिये अंकिता भंडारी पर सियासत कर रहे हैं। दोस्तो अंकिता भंडारी का केस सिर्फ एक आपराधिक मुकदमा नहीं है, यह उत्तराखंड की अस्मिता और हर बेटी की सुरक्षा की अग्निपरीक्षा है। अगर 4 साल बाद भी देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी को घेरकर जनता को जवाब मांगना पड़ रहा है, तो यह सिस्टम की नाकामी का सबसे बड़ा प्रमाण है। सीबीआई कब तक दिल्ली और देहरादून की फाइलों के बीच इस सच को छुपाकर रखेगी? देखना होगा कि प्रदर्शनकारियों के दिल्ली कूच के ऐलान के बाद क्या सीबीआई हरकत में आती है या फिर यह जन-आक्रोश एक बड़े राजनीतिक आंदोलन में तब्दील हो जाता है।