Ankita Bhandari को न्याय कब? ‘VIP’ पर कार्रवाई कब?| Justice For Ankita | CBI | Uttarakhand News

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दोस्तो, अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर उत्तराखंड की सड़कों पर फिर गुस्सा दिखाई दिया है!चार साल बाद भी सवाल वही—आखिर उस कथित VIP की पहचान और कार्रवाई का क्या हुआ?CBI जांच को लेकर भी सवाल उठ रहे है। आखिर अंकिता केस की जांच कब पूरी होगी और लंबित सवालों के जवाब कब मिलेंगे?कांग्रेस ने सरकार पर सीधे निशाना साधा है, लेकिन इन आरोपों और दावों के बीच सबसे बड़ा सवाल—अंकिता को पूरा न्याय कब। दोस्तो देवभूमि उत्तराखंड की शांत फिजाओं में आज फिर एक चीख गूंज रही है! एक ऐसी चीख जिसे दफनाने की हर मुमकिन कोशिश की गई, लेकिन वो राख के नीचे दबी चिंगारी बनकर आज फिर धधक उठी है! अंकिता भंडारी हत्याकांड को आज पूरे 4 साल हो गए हैं, 4 साल यानी 1460 दिन! लेकिन क्या अंकिता की आत्मा को शांति मिली? क्या उस बूढ़े बाप और लाचार मां को इंसाफ मिला? आज पूरा उत्तराखंड एक बार फिर सड़कों पर उतर आया है। देहरादून का गांधी पार्क हो, ऋषिकेश का वो बदनाम वनंतरा रिजॉर्ट हो या फिर पौड़ी की संकरी गलियां—हर तरफ से एक ही आवाज उठ रही है कि अंकिता को न्याय कब मिलेगा? विपक्ष में बैठी कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, लेकिन सबसे बड़ा झटका तो खुद जांच एजेंसियों ने दिया है। जनता पूछ रही है कि जिस ‘VIP’ एंगल को बेनकाब करने के लिए सीबीआई जांच का ढिंढोरा पीटा गया था। आज उस पर चुप्पी क्यों साधी गई है? क्या सच में कोई बड़ी ताकत इस केस को रफा-दफा करना चाहती है? ये मै क्यों कह रहा हूं वो आप पहले इस वीडियो के जरिए समझिए जब देहरादून में सीबीआई के बड़े अधिकारियों का घेराव हुआ तो उनकी जुबान खुली लेकिन जो कहा उससे सब हैरान है, कोई जांच नहीं हो रही है, कुछ अतापता ही नहीं है।

दोस्तो ये हाला है सीबीआई जांच का, लेकिन दोस्तो 18 सितंबर 2022 का वो काला दिन जब उत्तराखंड की एक मासूम बेटी हमेशा के लिए खामोश कर दी गई। आज साल 2026 में, उसकी चौथी बरसी पर न्याय का आंदोलन ठंडा पड़ने के बजाय और ज्यादा उग्र हो चुका है। उत्तराखंड की मातृशक्ति, युवा और सामाजिक संगठन आज सरकारी झूठे आश्वासनों की धज्जियां उड़ाने के लिए सड़कों पर हैं। दोस्तो हालांकि कोर्ट ने आरोपियों को उम्रकैद जरूर सुनाई है, लेकिन देवभूमि की जनता का साफ कहना है कि असली गुनहगार, वो सफेदपोश ‘VIP’ जिसके लिए अंकिता पर दबाव बनाया गया था, वो आज भी खुले आसमान के नीचे घूम रहा है! इधर दोस्तो इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस ने प्रदेशव्यापी शक्ति प्रदर्शन किया है। पौड़ी से लेकर देहरादून तक कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरकार पर गुस्सा निकला। कांग्रेस का सीधा और चुभता हुआ सवाल है कि घटना के तुरंत बाद आखिर किसके आदेश पर वनंतरा रिजॉर्ट के उस कमरे पर बुल्डोजर चलाया गया, जहां अंकिता रहती थी? वो कौन से सबूत थे जिन्हें आनन-फानन में मलबे में तब्दील कर दिया गया? दोस्तो कांग्रेस का आरोप है कि सरकार शुरुआत से ही बड़ी मछलियों को बचाने का खेल खेल रही है और जब तक वो तथाकथित वीआईपी बेनकाब नहीं होता, तब तक न्याय अधूरा है।

दोस्तो याद कीजिए, जनता के भारी आक्रोश और अंकिता के माता-पिता की गुहार के बाद सरकार ने बड़े जोर-शोर से सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। दावा किया गया था कि केंद्रीय एजेंसी दूध का दूध और पानी का पानी कर देगी। लेकिन आज जमीनी हकीकत क्या है? प्रदर्शन कर रहे संगठनों और लीगल टीम का आरोप है कि सीबीआई जांच केवल एक दिखावा बनकर रह गई है। आरोप लग रहे हैं कि वीआईपी एंगल की जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है, जिससे यह संदेश जा रहा है कि मानों कोई जांच हो ही नहीं रही है! आखिर देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी इस संवेदनशील मामले में इतनी ढीली क्यों पड़ गई? क्या जांच की इस सुस्त रफ्तार के पीछे भी कोई राजनीतिक दबाव काम कर रहा है? दोस्तो देवभूमि उत्तराखंड अपनी बेटियों का सम्मान करना जानती है और उनकी अस्मत के साथ खिलवाड़ करने वालों को कभी माफ नहीं करती। अंकिता भंडारी हत्याकांड को 4 साल बीत जाने के बाद भी अगर सड़कों पर न्याय के नारे लग रहे हैं, तो यह शासन और प्रशासन दोनों के लिए एक शर्मनाक आईना है। कागजी दावों और राजनीतिक बयानों से जनता का पेट भरने वाला नहीं है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को अब केवल कॉलेज का नाम बदलने जैसे प्रतीकात्मक कदमों से आगे बढ़कर, जनता को यह ठोस जवाब देना होगा कि आखिर वो ‘वीआईपी’ कौन है? सीबीआई इस पर चुप क्यों है और अंकिता को मुकम्मल न्याय कब मिलेगा?