दोस्तो, निठारी कांड से जुड़े सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत ने एक बार फिर इस पुराने मामले की यादें ताजा कर दी हैं। जिस शख्स का नाम करीब दो दशक तक देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में रहा, उसकी जिंदगी का अंत हरिद्वार की एक चाय की दुकान में हुआ। पुलिस के मुताबिक प्रथम दृष्टया मामला आत्मह’त्या का लग रहा है, लेकिन मौ’त की असली वजह क्या थी?हरिद्वार में आखिर क्या हुआ। दोस्तो सबसे बड़ी, सबसे सनसनीखेज और झकझोर देने वाली खबर देवभूमि उत्तराखंड के हरिद्वार से आई और याद आया एक बार फिर साल 2006 का वो खौफनाक निठारी कांड जिसका मुख्य चेहरा सुरेंद्र कोली का आज अंत हो गया है! जी हां, जिस सुरेंद्र कोली को देश की अदालतों ने बरी कर दिया था, जो 19 साल बाद जेल की सलाखों से बाहर घूम रहा था, आज उसकी ला’श हरिद्वार के भूपतवाला में एक चाय के खोखे में फंदे से लटकी मिली है! एक ऐसा आरोपी जिस पर मा’सूम बच्चों के मांस खाने, उनके ब’लात्कार और उनकी बेरहमी से ह’त्या के आरोप थे। वो कानून की बारीकियों से तो बच निकला, लेकिन आज जिंदगी की जंग हार गया! पुलिस मौके पर है, श’व को कब्जे में ले लिया गया है, और पूरे देश में इस वक्त भूचाल आ चुका था..क्या यह सिर्फ एक खुद’कुशी है, या इसके पीछे छुपा है कोई और गहरा राज?
दोस्तो इंसाफ की अदालतें भले ही सबूतों की कमी के आगे लाचार हो जाएं, लेकिन कुदरत का न्याय अपना रास्ता ढूंढ ही लेता है! देशभर को हिलाकर रख देने वाले नोएडा के निठारी कांड का मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली आज मौ’त की नींद सो चुका है। हरिद्वार के उत्तरी क्षेत्र भूपतवाला में शुक्रवार की सुबह तब हड़कंप मच गया, जब लालमाता मंदिर के सामने एक साधारण सी चाय की दुकान के भीतर रस्सी के सहारे एक ला’श लटकी मिली। जब पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शिनाख्त की, तो पुलिस के भी होश उड़ गए! मरने वाला कोई और नहीं, बल्कि निठारी की कोठी नंबर D-5 का वो बदनाम नौकर सुरेंद्र कोली था! दोस्तो हैरानी की बात यह है कि पिछले कुछ महीनों से सुरेंद्र कोली हरिद्वार के इसी शांत इलाके में अपनी पहचान छुपाकर रह रहा था। जानकारी के मुताबिक, उसने महज तीन दिन पहले ही भूपतवाला में चाय का एक खोखा किराए पर लिया था और चाय बेचने का काम शुरू किया था। रोज सुबह जो लोग उसके हाथ की चाय पी रहे थे, उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि इस सीधे-सादे दिखने वाले चेहरे के पीछे भारत का सबसे खौफनाक और घिनौना अतीत छुपा हुआ है!
लेकिन शुक्रवार सुबह जब दुकान काफी देर तक नहीं खुली, तो आसपास के लोगों ने झांककर देखा और नजारा देखकर उनकी रूह कांप गई। कोली का शव फंदे पर झूल रहा था। दोस्तो यहां याद कीजिए, निठारी के 13 मामलों में कोली को पहले मौ’त की सजा सुनाई गई थी। लेकिन कानूनी दांव-पेंच और पुख्ता सबूतों के अभाव के चलते अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसे बरी किया, और फिर नवंबर 2025 में देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने भी उसके आखिरी लंबित मामले में उसे पूरी तरह निर्दोष मानते हुए बरी कर दिया था! दोस्तो लगभग 19 साल जेल की कालकोठरी में बिताने के बाद कोली आजाद हुआ था। समाज से कटा हुआ, परिवार से दूर, वो अल्मोड़ा के भिकियासैंण का रहने वाला सुरेंद्र कोली शांति की तलाश में हरिद्वार आया था। लेकिन सवाल यह है कि जब वो कानून की नजर में आजाद हो चुका था, तो आखिर उसने आ’त्मघाती कदम क्यों उठाया?
दोस्तो “सप्तऋषि पुलिस चौकी और शहर कोतवाली की टीमें इस वक्त हर एंगल से मामले की जांच कर रही हैं। पुलिस को मौके से कोई नोट बरामद नहीं हुआ है। शुरुआती जांच में पुलिस इसे पारिवारिक क्लेश और मानसिक तनाव का मामला मान रही है, क्योंकि निठारी कांड में नाम आने के बाद से ही उसके परिवार ने उससे पूरी तरह नाता तोड़ लिया था। लेकिन चर्चाएं यह भी हैं कि क्या 19 ब’च्चों की मौ’त का वो खौफनाक साया और उसकी खुद की आत्मग्लानि ने उसे जीने नहीं दिया? क्या वो कानून से तो बच गया था, लेकिन अपने ही गुनाहों के बोझ तले दब चुका था? दोस्तो सुरेंद्र कोली की इस रहस्यमयी मौ’त ने निठारी कांड के उस सबसे बड़े और दर्दनाक अध्याय का अंत कर दिया है, जिसने दो दशकों तक देश को झकझोर कर रखा था। जो पीड़ित परिवार बरसों से न्याय की भीख मांग रहे थे, उनके लिए शायद आज कुदरत ने खुद अपना फैसला सुना दिया है। पुलिस ने अल्मोड़ा में उसके परिजनों को सूचना दे दी है और श’व को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। इस खुदकुशी के पीछे कोई बड़ी साजिश है या सिर्फ डिप्रेशन, इसका खुलासा पुलिस की फाइनल रिपोर्ट में ही होगा। लेकिन सुरेंद्र कोली के इस अंत पर आप क्या कहेंगे।