सावधान! Pauri में जमीन का बड़ा खेल? | Land Controversy | Bhu Kaanun | CM Dhami | Uttarakhand News

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पौड़ी में 112 नाली जमीन की खरीद ने अब बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आखिर इतनी बड़ी जमीन की खरीद कैसे हो गई? क्या भू-कानून के नियमों में कोई ऐसा रास्ता है, जिससे इस तरह की डील संभव हो जाती है? ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं और कांग्रेस ने भी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। आखिर इस पूरे भूमि विवाद की असली कहानी क्या है? जब फूटा जनाक्रोश तो फिर DM ने कौन सा लिया एक्शन, बताउँगा आपको पूरी खबर अपनी इस रिपोर्ट के जरिए। दोस्तो उत्तराखंड में भू-कानून लागू होने के बावजूद पौड़ी में 112 नाली जमीन की खरीद का मामला अब सवालों के घेरे में है। आखिर भू-कानून होने के बाद इतनी बड़ी जमीन की डील कैसे हुई? ग्रामीण इस खरीद को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं कांग्रेस भी सरकार पर भू-कानून में मौजूद लूपहोल को लेकर निशाना साध रही है। आखिर क्या है पूरा मामला और किन नियमों के तहत हुई ये जमीन की खरीद? दोस्तो आप समझ पाएंगे कि कैसे हो रहा है उत्तराखंड में जमीनों को खेल।

दोस्तो मामला उत्तराखंड के पौड़ी-देवप्रयाग मोटरमार्ग पर स्थित ऐराड़ी गांव में 112 नाली भूमि की खरीद का मामला इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। भूमि खरीद से जुड़ा एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद उत्तराखंड के भू-कानून को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. ऐराड़ी के ग्रामीणों का आरोप है कि ऐराड़ी गांव में 112 नाली भूमि की खरीद की जा चुकी है. इस मामले को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने गंभीर आपत्ति जताई है. वहीं, डीएम स्वाति एस भदौरिया ने मामले में जांच कमेटी गठित कर दी है। दरअसल दोस्तो पौड़ी गढ़वाल जिले के विकासखंड कोट के ऐराड़ी गांव में 112 नाली भूमि की खरीद का मामला जिला प्रशासन की जांच के दायरे में आ गया है। जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया के निर्देश पर जांच की जा रही है कि भूमि खरीद और प्रस्तावित कृषि परियोजना पर रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) के नियम लागू होते हैं या नहीं। प्रारंभिक स्तर पर राजस्व विभाग का कहना है कि भूमि खरीद रेरा के तहत नहीं की गई है। हालांकि, अंतिम स्थिति जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी। दोस्तो अब पौड़ी के ऐराड़ी गांव में 112 नाली जमीन की खरीद को लेकर उठे विवाद की अब प्रशासनिक जांच शुरू हो गई है। डीएम पौड़ी ने मामले की जांच के लिए एडीएम की अध्यक्षता में चार सदस्यीय कमेटी गठित की है।

टीम ने मौके पर पहुंचकर भूमि का निरीक्षण किया और संबंधित दस्तावेज भी जुटाए हैं। जांच पूरी होने तक जमीन पर किसी भी तरह के निर्माण पर रोक लगा दी गई है। अब जांच के बाद ही साफ होगा कि जमीन की खरीद और उसके उपयोग को लेकर उठ रहे सवालों में कितनी सच्चाई है। लेकिन दोस्तो इधर राजस्व विभाग उपनिरीक्षक भूपेंद्र सिंह के मुताबिक, देहरादून स्थित दून हैचरीज लिमिटेड वर्ष 1997 से पंजीकृत कंपनी है. कंपनी, जो यमकेश्वर ब्लॉक के ग्राम कोठार निवासी नरेंद्र सिंह के नाम पर पंजीकृत है। नरेंद्र सिंह ने ऐराड़ी गांव में कृषि परियोजना के लिए 112 नाली भूमि खरीदी है। यह भूमि ग्राम सभा ढुंगली के अंतर्गत एक ही कुटुंब (खानदान) के 12 परिवारों से खरीदी गई। भूमि खरीद की प्रक्रिया वर्ष 2025 में शुरू हुई, जबकि रजिस्ट्री फरवरी और दाखिल-खारिज जुलाई में हुआ। वहीं दोस्तो राजस्व उपनिरीक्षक का कहना है कि,

स्थानीय व्यक्ति या संस्था कृषि परियोजना के लिए अधिकतम 12.5 एकड़ (252.12 नाली) भूमि खरीद सकता है और प्रथम दृष्टया खरीद वैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप प्रतीत होती है। वहीं, गांव में इतनी बड़ी मात्रा में भूमि बिकने से स्थानीय ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीण रोहित भट्ट और हेमंत चौहान का कहना है कि, भूमि बिक्री से पहले गांव में किसी से बात नहीं की गई। जबकि ग्राम पंचायत बैठक बुलाई जानी चाहिए थी। न तो ग्राम प्रधान और न ही अन्य ग्रामीणों को इसके बारे में कुछ जानकारी दी गई. जबकि विभाग का कहना है कि, संबंधित परिवारों के अधिकांश सदस्य गांव से बाहर रहते हैं और वर्तमान में केवल दो-तीन परिवार ही गांव में निवास कर रहे हैं। यहां दोस्तो आपको ये जानना भी बेहद जरूरी है कि क्या कहते हैं रेरा के नियम यानि रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण।

क्या कहते हैं रेरा के नियम?

  • रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (RERA) के नियमों के तहत, 500 वर्गमीटर से बड़ी या 8 से अधिक फ्लैट व इकाइयों वाले सभी रेजीडेंसल और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है।
  • कंपनी को खरीददारों से मिलने वाली राशि का 70 प्रतिशत भाग एक अलग बैंक खाते में रखना होगा।
  • खरीददार कंपनी को प्रोजेक्ट्स से जुड़ी सभी मंजूरियां, लेआउट प्लान और निर्माण पूरा करने की तय समयसीमा सार्वजनिक करनी होगी।
  • किसी भी संपत्ति की बिक्री या प्रचार करने से पहले रियल एस्टेट एजेंटों को भी राज्य के संबंधित अथॉरिटी में रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा।

तो दोस्तो, पौड़ी के ऐराड़ी गांव में 112 नाली जमीन की खरीद को लेकर उठे सवालों के बीच प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है और जांच पूरी होने तक जमीन पर किसी भी तरह के निर्माण पर रोक भी लगा दी गई है। राजस्व विभाग प्रथम दृष्टया जमीन की खरीद को नियमों के अनुरूप बता रहा है, लेकिन ग्रामीणों की आपत्ति और प्रस्तावित परियोजना को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब अब जांच रिपोर्ट से ही साफ होगा। आखिर जमीन की खरीद में नियमों का पालन हुआ है या कहीं कोई लूपहोल सामने आता है? प्रशासन की जांच रिपोर्ट इस पूरे मामले की तस्वीर साफ करेगी। फिलहाल इस मामले पर मेरी नजर बनी रहेगी। आपको क्या लगता है, अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए।