मां नंदा की विदाई का महा-पड़ाव! | Nanda Devi Rajjat | Roopkund | Homkund | Uttarakhand News

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उत्तराखंड की पावन भूमि पर आस्था और लोक संस्कृति का सबसे बड़ा पर्व नंदा देवी बड़ी जात यात्रा 2026 अपने सबसे कठिन और अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ चुका है। 12 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आयोजित हो रही इस ऐतिहासिक पैदल यात्रा में आज मां नंदा की देव डोलियां और आस्था का प्रतीक दिव्य चौसिंगा खाड़ू (चार सींग वाला मेढ़ा) प्रसिद्ध वेदनी बुग्याल (वेदनी कुंड) से आगे के निर्जन पर्वतीय क्षेत्रों के लिए रवाना हो गए हैं। नंदानगर स्थित मां नंदा देवी राजराजेश्वरी के मूल सिद्धपीठ कुरुड़ से 5 सितंबर को शुरू हुई यह 280 किलोमीटर लंबी यात्रा अब अत्यधिक ठंडे और जोखिम भरे इलाकों में प्रवेश कर चुकी है। वेदनी कुंड में पारंपरिक पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के बाद, बधाण क्षेत्र की राजराजेश्वरी डोली अपनी तय परंपरा के अनुसार वापस लौट गई है। वहीं, बंड व दशोली की नंदा देवी और ज्वाल्पा माता की डोलियां श्रद्धालुओं के जत्थे और चौसिंगा खाड़ू के साथ पातर नचौणियां और भगुवाबासा जैसे दुर्गम पड़ावों की तरफ बढ़ रही हैं। धार्मिक कैलेंडर और प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, कल यानी 20 सितंबर 2026 (नंदा नवमी) को यह यात्रा अपने अंतिम गंतव्य होमकुंड पहुंचेगी। होमकुंड (उच्च हिमालयी क्षेत्र) में संपूर्ण विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मां नंदा की विशेष विदाई पूजा संपन्न की जाएगी।

इसके बाद, मां नंदा के संदेशवाहक माने जाने वाले चौसिंगा खाड़ू को अकेले ही आगे बर्फ से ढके कैलाश पर्वत की ओर विदा कर दिया जाएगा, जिसके साथ ही इस महापर्व का औपचारिक समापन होगा। वाण गांव को पार करने के बाद इस यात्रा के नियम बेहद कड़े हो जाते हैं। निर्जन पर्वतीय क्षेत्रों की मर्यादा और सुरक्षा के चलते आगे के सफर में चमड़े की वस्तुएं ले जाना और गाजे-बाजे बजाना पूरी तरह वर्जित रहता है। ढोल-दमाऊ की गूंज और पारंपरिक मांगल गीतों के बीच, पहाड़ अपनी धियाण (विवाहित बेटी) को बेहद भावुक मन से विदा कर रहा है। इस दिव्य यात्रा को सकुशल संपन्न कराने के लिए स्थानीय प्रशासन, पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें भी लगातार मुस्तैद हैं। बता दें कि इस साल बड़ी जात में तीन देव डोलियां शामिल हुई हैं। इनमें बधाण की नंदा देवी राजराजेश्वरी की डोली वेदनी कुंड से वापस अपने पारंपरिक पड़ाव की ओर लौट चुकी हैं। वहीं, बंड की नंदा देवी, दशोली की नंदा देवी और ज्वाल्पा माता की डोलियां कैलाश की ओर बढ़ रही हैं। आगामी यात्रा 20 सितंबर को होमकुंड पहुंचेगी। यहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद खाड़ू की विदाई होगी।