उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में निष्पक्ष जांच और कथित वीआईपी पर कार्रवाई की मांग को लेकर दिल्ली पहुंचे उसके माता-पिता वीरेंद्र भंडारी और सोनी देवी को 4 नवंबर को दिल्ली पुलिस ने राजघाट से जबरन हटा दिया। सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना के साथ महात्मा गांधी के समाधि स्थल पर मौन व्रत रखकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे पीड़ित परिवार को पुलिस ने धरना स्थल खाली करने को कहा और विरोध जताने पर उन्हें खींचते हुए गाड़ियों में बैठा लिया। पुलिस की इस जबरन कार्रवाई और धक्का-मुक्की के बीच अंकिता की मां सोनी देवी की तबीयत अचानक बिगड़ गई और वह मौके पर ही बेहोश हो गईं, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए दिल्ली के बुराड़ी स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया।
इस पुलिस कार्रवाई के बाद मामले ने गंभीर राजनीतिक तूल पकड़ लिया है, जहां विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने सरकार व दिल्ली पुलिस के इस रवैये की कड़ी निंदा की है। सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना और कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि अपनी बेटी के लिए न्याय मांग रहे बेबस माता-पिता के साथ अपराधियों जैसा बर्ताव किया गया और मां के अचेत होने के बाद भी उन्हें तुरंत उचित इलाज उपलब्ध कराने के बजाय पुलिस वैन में घुमाया गया। दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस का कहना है कि राजघाट कोई निर्दिष्ट धरना स्थल नहीं है, जिसके चलते प्रदर्शनकारियों को बार-बार हटने की चेतावनी दी गई थी और नियमों के उल्लंघन के कारण उन्हें वहां से हटाया गया।