दोस्तो जहां शासन प्रशासन नेता अधिकारी सब आपकी सेवा में अपने आपको समर्पित है, तत्पर है तो तो फिर एसडीओ तहसीलदार को आम जनता क्यों गोठिया रही है। पौड़ी गढ़वाल में गुलदार के खौफ ने ऐसा जनआक्रोश भड़काया कि पूरा प्रशासन हिल गया! दर्दनाक घटना के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने तहसीलदार और SDO आयशा बिष्ट को दुकान में बंद कर दिया। शटर गिरा और अफसर अंदर कैद! आखिर पहाड़ में क्यों भड़का इतना गुस्सा? दोस्तो कानून का राज, सरकारी रसूख और अफसरों की वो लाल बत्ती आज सब कुछ जनता के गुस्से के आगे घुटने टेक चुका है! उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल से जो तस्वीरें आ रही हैं, वो हैरान करने वाली भी हैं और डराने वाली भी!जब जनता का सब्र टूटता है, तो वो न तो तहसीलदार की कुर्सी देखती है और न ही वन विभाग के बड़े अधिकारी की वर्दी! गुस्से से लाल। आक्रोश से तमतमाए ग्रामीणों ने पौड़ी के तहसीलदार राजेंद्र गोस्वामी और वन विभाग की SDO आयशा बिष्ट को दौड़ा-दौड़ा कर एक दुकान के अंदर बंद कर दिया और बाहर से डाल दिया ताला! जी हां… सरकारी हुक्मरानों को उन्हीं की जनता ने बंधक बना लिया! आखिर देवभूमि के शांत पहाड़ों में ये भयंकर बारूद कैसे फटा? क्यों अफसरों को दुबककर अपनी जान बचानी पड़ी? उत्तराखंड का शांत जिला पौड़ी गढ़वाल आज जंग का मैदान बन गया! चीख-पुकार, हंगामा और सड़कों पर उतरा ये जनसैलाब किसी राजनीतिक रैली का हिस्सा नहीं है, बल्कि ये वो आक्रोश है जो व्यवस्था की नाकामी के खिलाफ फूटा है! मामला बुधवार सुबह का है, जब गुलदार के आतंक से परेशान ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। पौड़ी-देवप्रयाग मोटर मार्ग पर चक्का जाम कर दिया गया और देखते ही देखते पूरा इलाका छावनी में तब्दील हो गया!
दरअसल, ग्रामीणों के इस भयंकर गुस्से के पीछे एक बेहद दर्दनाक और रूह कंपा देने वाली घटना है। एक आदमखोर गुलदार ने महज़ 4 साल की एक मासूम बच्ची को अपना निवाला बना डाला। मासूम की मौत ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग को बार-बार चेतावनी दी जा रही थी कि इलाके में गुलदार घूम रहा है, पिंजरा लगाओ, हमें सुरक्षा दो, लेकिन हुक्मरान वातानुकूलित कमरों में सोते रहे। और नतीजा? एक मां की गोद हमेशा के लिए सूनी हो गई! दोस्तो जब सुबह सुबह का वक्त रहा होगा माहौल को शांत कराने और प्रदर्शनकारियों को समझाने के लिए मौके पर पहुंचे पौड़ी के तहसीलदार राजेंद्र गोस्वामी और वन विभाग की SDO आयशा बिष्ट। अफसरों को लगा कि वो हमेशा की तरह कोरे आश्वासन देकर जनता को घर भेज देंगे। लेकिन आज जनता आर-पार के मूड में थी! जैसे ही अधिकारियों ने बोलना शुरू किया, ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ गया। बात इतनी बढ़ गई कि सुबह ठीक 11:30 बजे, उग्र भीड़ ने तहसीलदार और SDO आयशा बिष्ट को जबरन खींचकर एक पास की दुकान में बंद कर दिया और बाहर से शटर गिरा दिया!
दोस्तो जनता का ये गुस्सा सिर्फ अफसरों तक सीमित नहीं रहा। मौके पर पहुंचे स्थानीय विधायक राजकुमार पोरी को भी भारी विरोध का सामना करना पड़ा। जनता ने साफ कह दिया—’चुनाव के वक्त वोट मांगने आते हो, और जब हमारे बच्चे मर रहे हैं तो तुम गायब हो!’ इतना ही नहीं, वन विभाग के सबसे बड़े अफसर यानी डीएफओ (DFO) जब मौके पर पहुंचे, तो उनके साथ भी ग्रामीणों की जबरदस्त धक्का-मुक्की हुई! अफसरों की गाड़ियां रोक दी गईं। दोस्तो पौड़ी में हुआ ये बवाल इस बात का गवाह है कि जब सिस्टम अंधा और बहरा हो जाता है, तो कानून व्यवस्था को संभालना कितना मुश्किल हो जाता है। SDO आयशा बिष्ट और तहसीलदार घंटों तक उस दुकान में बंद रहे, प्रशासन के हाथ-पांव फूले रहे। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या इस बंधक कांड के बाद वन विभाग जागेगा? क्या उस आदमखोर गुलदार को पकड़ा जाएगा या फिर किसी और मासूम की जान जाने का इंतजार किया जाएगा? पौड़ी गढ़वाल की इस दहला देने वाली घटना पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट करके जरूर बताएं।