अंकिता भंडारी केस में उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी के बाद अब सवालों के घेरे में है गिरफ्तारी की टाइमिंग! नार्को टेस्ट की सुनवाई से ठीक पहले हुई कार्रवाई पर अंकिता की मां ने क्या सवाल उठाए? क्या इस गिरफ्तारी से कथित VIP के नाम का रहस्य और गहरा गया है? एक तरफ पुलिस की कानूनी कार्रवाई, दूसरी तरफ परिवार की इंसाफ की मांग—आखिर इस पूरे घटनाक्रम में अब तक क्या सामने आया है? दोस्तो देवभूमि उत्तराखंड की वो चीख, जो आज चार साल बाद भी इंसाफ के तराजू पर तौली जा रही है। अंकिता भंडारी मर्डर केस, जिसमें तीन आरोपी तो जेल की सजा काट रहे हैं, लेकिन वो रहस्यमयी ‘VIP’ कौन है, इसका राज आज तक फाइलों में दफन है। और जब इस राज से पर्दा उठने ही वाला था, तो ठीक एक रात पहले खेल हो गया! दोस्तो अंकिता भंडारी केस में कथित ‘VIP’ का नाम उछालने वाली अभिनेत्री उर्मिला सनावर को जिस फुर्ती से नार्को टेस्ट की अदालती सुनवाई से ठीक एक दिन पहले गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, उस पर अब अंकिता भंडारी की मां का पहला और सबसे बड़ा रिएक्शन सामने आया है! दोस्तो एक मां का कलेजा आज पुलिस की थ्योरी को नकारते हुए सीधे सिस्टम से यक्ष प्रश्न पूछ रहा है—क्या नार्को टेस्ट से ठीक एक दिन पहले उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी का असली मतलब उस रसूखदार वीआईपी को बचाना है? जब उर्मिला 23 अक्टूबर को अदालत में खुद आकर कह चुकी थीं कि ‘मैं नार्को टेस्ट के लिए तैयार हूँ, बस इसे लाइव कर दो’ जब 26 अक्टूबर को कोर्ट में फाइनल मुहर लगनी थी, तो पुलिस ने 25 अक्टूबर की रात को ही उन्हें जेल क्यों पहुंचा दिया? दोस्तो चार साल से एक मां की आंखें सूख चुकी हैं अपनी बेटी के हत्यारों को फांसी के फंदे पर देखने के लिए। लेकिन कानून की सुस्त रफ्तार के बीच जब भी ‘VIP’ के नाम पर सच सामने आने की उम्मीद जागती है, सिस्टम में कोई न कोई ऐसा मोड़ आ जाता है जो पूरी कहानी को पलट देता है। उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी पर अंकिता की मां का गुस्सा फूट पड़ा है। उन्होंने रोते हुए सीधा आरोप लगाया है कि यह पूरी स्क्रिप्ट सिर्फ इसलिए लिखी गई ताकि उर्मिला नार्को टेस्ट में उस बड़े वीआईपी का नाम सार्वजनिक न कर सकें। दोस्तो इस पूरे मामले की क्रोनोलॉजी को समझिए, जिसे देखकर अंकिता का परिवार और आम जनता भी हैरान है। 23 अक्टूबर को सीबीआई कोर्ट में उर्मिला और पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर ने नार्को टेस्ट के लिए लिखित सहमति दी थी। लेकिन उर्मिला ने कोर्ट के सामने एक ऐसी शर्त रख दी जिसने कईयों की नींद उड़ा दी—उन्होंने मांग की कि उनका नार्को टेस्ट लाइव कैमरों के सामने और मीडिया की मौजूदगी में हो! उर्मिला का दावा था कि लाइव टेस्ट में वो कई ऐसे सफेदपोशों के नाम उजागर करेंगी जो सत्ता के गलियारों में बैठे हैं। 26 अक्टूबर को इस पर आगे की सुनवाई होनी थी, लेकिन 25 अक्टूबर को ही उन्हें 5 करोड़ की रंगदारी के पुराने मामले में सलाखों के पीछे भेज दिया गया। दोस्तो पुलिस का कहना है कि पूर्व विधायक की बेटी दीपिका राठौर की शिकायत पर यह कानूनी एक्शन हुआ है, जिसमें 5 करोड़ की रंगदारी और रविदास धाम की संपत्ति हड़पने के आरोप हैं। उर्मिला पर देहरादून में भी एक और मुकदमा ठोक दिया गया है। लेकिन अंकिता की मां और विपक्ष का सवाल यह है कि जो पुलिस साल 2025 में इसी शिकायत पर सुस्त बैठी थी, उर्मिला के खिलाफ गैर-जमानती वारंट होने के बाद भी वो खुलेआम घूम रही थीं, उसी पुलिस को 2026 में नार्को टेस्ट से ठीक एक दिन पहले इतनी हड़बड़ी क्यों हो गई? रात को मुकदमा, सुबह गिरफ्तारी और शाम होते-होते मजिस्ट्रेट के सामने पेश कर जेल भेजना, क्या वाकई सिर्फ एक सामान्य कानूनी प्रक्रिया है? दोस्तो उर्मिला की गिरफ्तारी के बाद अब यह लड़ाई सिर्फ कोर्ट रूम तक सीमित नहीं रही। कांग्रेस नेता कुमारी सैलजा और प्रदेश कांग्रेस ने सीधे अंकिता की मां के सुर में सुर मिलाते हुए सरकार को घेरा है। उनका भी यही आरोप है कि हर अहम सबूत और सच को मिटाने की कोशिश की जा रही है। वीआईपी को बचाने की इस कथित योजना ने देवभूमि के शांत माहौल में एक बार फिर आंदोलन की चिंगारी सुलगा दी है। जनता पूछ रही है कि अगर सरकार साफ है, तो उर्मिला को लाइव कैमरों के सामने सच उगलने से रोकने की इतनी जल्दबाजी क्यों की गई? दोस्तो उर्मिला सनावर पर रंगदारी के जो भी आरोप हैं, कानून उसकी जांच करे और दोषी होने पर उन्हें सजा भी मिले। लेकिन एक बेबस और लाचार मां का यह सवाल पूरे उत्तराखंड के विवेक को झकझोर रहा है कि आखिर नार्को टेस्ट से एक दिन पहले ही ये गिरफ्तारी क्यों? क्या वाकई किसी बेहद रसूखदार चेहरे को बेनकाब होने से बचाने के लिए यह पूरी बिसात बिछाई गई है? क्या इस कानूनी नूराकुश्ती के चक्कर में अंकिता भंडारी हत्याकांड का वो ‘VIP’ राज हमेशा के लिए दफन हो जाएगा? सीबीआई की विशेष अदालत इस पूरे घटनाक्रम पर अब क्या कड़ा रुख अपनाती है, इस पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं। क्योंकि सवाल सिर्फ एक गिरफ्तारी का नहीं, सवाल देवभूमि की बेटी अंकिता को मुकम्मल न्याय मिलने का है।
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