गैरसैंण में पहले दिन ही सियासी पारा हाई!। Bhararisain। Congress Protest। CM Dhami। Uttarakhand News

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जी है दोस्तो बाहर गरज रहा था विपक्ष, तो अंदर से आया सीएम धामी का सबसे धाकड़ जवाब! ये कहानी है गैरसैंण विधानसभा के पहले दिन की। विधानसभा सत्र का पहला दिन और सदन के बाहर कांग्रेस का जोरदार प्रदर्शन! भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, महंगाई और अंकिता भंडारी केस को लेकर विपक्ष ने धामी सरकार को घेरा, लेकिन प्रदर्शन पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दे दी। कांग्रेस ने जनता के मुद्दे उठाए, तो सीएम ने सकारात्मक चर्चा की नसीहत दी। आखिर गैरसैंण में किन मुद्दों पर आमने-सामने आए विपक्ष और मुख्यमंत्री? देखिए अजीत काम्बोज की यह खास रिपोर्ट। दोस्तो उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण में आज सियासी पारा अपने चरम पर पहुंच गया है! विधानसभा का सत्र अंदर शुरू होने से पहले ही, बाहर सदन की चौखट पर एक ऐसा राजनैतिक तूफान खड़ा हो गया जिसने पूरे सूबे की सियासत में खलबली मचा दी है! दोस्तो भ्रष्टाचार, महिला अपराध, चरम बेरोजगारी और बेलगाम महंगाई जैसे ज्वलंत मुद्दों का बारूद लेकर कांग्रेस विधायकों ने सरकार के खिलाफ एक बहुत ही आक्रामक मोर्चा खोल दिया है! विपक्ष का साफ कहना है कि वे धामी सरकार की इस कुंभकर्णी नींद को चैन से सोने नहीं देंगे। लेकिन असली धमाका तब हुआ जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विपक्ष के इस भारी हंगामे और धरने पर एक ऐसा तंज कसा, जिसने पूरी बाजी ही पलट कर रख दी! आखिर इस सियासी दंगल में कौन किस पर भारी पड़ रहा है?

दोस्तो पहाड़ों की शांत वादियों में आज लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर के बाहर भारी हुंकार गूंज रही है। गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में सत्र का आगाज होना था, लेकिन कांग्रेसी विधायकों ने सदन के भीतर जाने के बजाय उसके मुख्य द्वार को ही अपना सबसे बड़ा मोर्चा बना लिया। हाथों में सरकार विरोधी नारे लिखी तख्तियां और चेहरों पर तीखा आक्रोश लिए विपक्ष के दिग्गजों ने धामी सरकार को चारों तरफ से घेर लिया। दोस्तो विपक्ष का सीधा आरोप है कि सत्ता की मलाई खा रही यह सरकार उत्तराखंड की जनता के बुनियादी हकों को भूलकर गहरी नींद में सोई हुई है। कांग्रेसी विधायकों ने खुली चेतावनी दे दी है कि देवभूमि के हकों की इस गूंज को वे न तो सड़कों पर दबने देंगे और न ही सदन के भीतर दबाने देंगे,, दोस्तो यह केवल एक रस्मी प्रदर्शन नहीं था, बल्कि सरकार की सबसे कमजोर नब्ज पर किया गया एक बड़ा राजनैतिक हमला था। अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग, पहाड़ों से लगातार होता पलायन और दम तोड़ती स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर विपक्षी नेताओं के तेवर सातवें आसमान पर नजर आए। दोस्तो इसके साथ ही भ्रष्टाचार चरम पर है और महंगाई से आम आदमी की कमर टूट चुकी है। सरकार सत्र की आड़ में छिपना चाहती है, लेकिन हम हर एक मुद्दे का हिसाब सदन के पटल पर लेकर रहेंगे! दोस्तो वहीं किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़ और अन्य कांग्रेसी नेताओं के प्रदर्शन के आक्रामक नजर आए।

दोस्तो बाहर जब कांग्रेस का यह गुस्सा अपने चरम पर था, तो हर किसी की नजर इस बात पर टिकी थी कि सूबे के मुखिया पुष्कर सिंह धामी विपक्ष के इन गंभीर आरोपों का सामना कैसे करेंगे। और जब मुख्यमंत्री कैमरे के सामने आए, तो उनके चेहरे पर कोई घबराहट नहीं थी—बल्कि उन्होंने एक बेहद शांत और सधे हुए अंदाज में विपक्ष पर ऐसा तीखा पलटवार किया जिससे कांग्रेसी खेमे में सन्नाटा पसर गया! दोस्तो मुख्यमंत्री धामी ने विपक्ष के इस महा-हंगामे को महज ‘एक प्रेरणा’ बताकर यह साफ संदेश दे दिया कि सरकार इन विरोध प्रदर्शनों से बैकफुट पर आने वाली नहीं है, और वह सदन के भीतर अपनी पूरी ताकत के साथ विकास कार्यों और बजट को आगे बढ़ाएगी। दोस्तो एक तरफ जहां कांग्रेस पार्टी सड़क से लेकर सदन तक अपनी पूरी ताकत झोंक कर सरकार को बेनकाब करने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने इस करारे बयान से साफ कर दिया है कि वे विपक्ष के इस चक्रव्यूह को भेदने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। दो दिन का यह सत्र भले ही छोटा हो, लेकिन इसके सियासी झटके बेहद दूर तक जाने वाले हैं। दोस्तो जन-अधिकारों के नाम पर शुरू हुआ यह संघर्ष अब पूरी तरह से आर-पार की जंग में तब्दील हो चुका है। अब देखना होगा कि दो दिनों की इस राजनैतिक महाभारत में जीत किसकी होती है।