जी हां दोस्तो ‘साढ़े 4 साल तक सिर्फ तमाशा देखा’—विपक्ष पर लगाया सबसे बड़ा आरोप! न कांग्रेस, न बीजेपी, तो अब क्या होने वाला है खानपुर सीट का भविष्य? विधानसभा सत्र के बीच उमेश कुमार का बड़ा ऐलान! निर्दलीय विधायक ने इस्तीफे की बात कहकर उत्तराखंड की सियासत में हलचल बढ़ा दी है।लेकिन सवाल है— आखिर साढ़े चार साल बाद ऐसा क्या हुआ कि उमेश कुमार ने विपक्ष पर ही सवाल उठा दिए? हरीश रावत और त्रिवेंद्र सिंह रावत को लेकर भी उन्होंने अपना रुख साफ कर दिया!क्या है इस्तीफे की वजह, किससे नाराज हैं उमेश कुमार और खानपुर की राजनीति पर क्या होगा असर? देखिए पूरी रिपोर्ट। दोस्तो उत्तराखंड की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी, सबसे सनसनीखेज और हिला देने वाली खबर आ रही है! जहां एक तरफ गैरसैंण के भराड़ीसैंण में विधानसभा का सत्र चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ हरिद्वार की खानपुर सीट से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने अचानक ऐसा बम फोड़ा है जिससे पूरी सियासत में भूचाल आ गया है!जी हां, उमेश कुमार ने सत्र खत्म होने से ठीक पहले अपनी विधायकी से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है! लेकिन सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह है कि आखिर ठीक सत्र के बीच में ही ऐसा क्या हुआ कि एक विधायक को अपना पद छोड़ना पड़ रहा है? क्यों उमेश कुमार का गुस्सा फूट पड़ा है कांग्रेस और पूरे विपक्ष पर? और आखिर क्यों उन्होंने खुलेआम कह दिया कि वो किसी बड़े नेता के लिए नारे नहीं लगाने वाले?
दोस्तो उत्तराखंड की राजनीति में ड्रामे और पलटवार का दौर कोई नया नहीं है, लेकिन 27 अक्टूबर 2026 को जो हुआ, उसने सबको सन्न कर दिया है। खानपुर विधानसभा सीट से बीजेपी के कड़े गढ़ को ढहाकर निर्दलीय जीतने वाले विधायक उमेश कुमार ने अपने एक ही फैसले से पूरी सरकार और विपक्ष को चौंका दिया है। उमेश कुमार ने साफ कर दिया है कि वे बुधवार को विधानसभा का सत्र खत्म होने से पहले ही अपना इस्तीफा स्पीकर को सौंप देंगे। दोस्तो इस इस्तीफे के बाद देहरादून से लेकर गैरसैंण तक सियासी गलियारों में सिर्फ एक ही चर्चा है कि आखिर खानपुर के इस ‘तेजतर्रार’ माननीय ने ऐन वक्त पर यह आत्मघाती कदम क्यों उठाया?उमेश कुमार के इस गुस्से के पीछे कोई सरकार विरोधी लहर नहीं, बल्कि उत्तराखंड के इतिहास का सबसे अनोखा कारण है। आम तौर पर विधायक सरकार से नाराज होकर इस्तीफा देते हैं, लेकिन उमेश कुमार ने सीधे तौर पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और पूरे विपक्ष को कटघरे में खड़ा कर दिया है। दोस्तो विधायक का सीधा आरोप है कि हरिद्वार में किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं, युवा सड़कों पर बेरोजगार घूम रहे हैं, लेकिन जब सदन में इन जनहित के मुद्दों को उठाने की बारी आती है, तो विपक्ष मूकदर्शक बनकर बैठ जाता है और उनका साथ छोड़ देता है। ऐसे ‘मित्र विपक्ष’ के भरोसे रहने से बेहतर उन्होंने विधायकी छोड़ना समझा। दोस्तो पिछले कुछ दिनों से उत्तराखंड के राजनैतिक गलियारों में ये अफवाहें उड़ रही थीं कि उमेश कुमार शायद पाला बदलकर कांग्रेस का हाथ थाम सकते हैं। लेकिन आज उमेश कुमार ने उन सभी कयासों पर पूरी तरह से पानी फेर दिया। उन्होंने बहुत ही तीखे लहजे में कहा कि वे न तो कांग्रेस में जा रहे हैं और न ही भाजपा में, दोस्तो उमेश कुमार ने साफ लहजे में तंज कसा कि वे कांग्रेस या बीजेपी में जाकर उन लोगों की ‘जिंदाबाद’ के नारे नहीं लगा सकते, जो कल तक खुद उनके दरवाजे पर आकर बैठा करते थे। उन्होंने सीधा निशाना साधते हुए कहा कि “न मैं हरीश रावत के लिए नारे लगाऊंगा और न ही त्रिवेंद्र सिंह रावत के लिए!” उमेश कुमार का यह तेवर बताता है कि वे किसी भी कीमत पर अपना स्वाभिमान झुकने नहीं देंगे। दोस्तो सत्र के बीच में आया यह इस्तीफा सिर्फ एक विधायक का पद छोड़ना नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड के दोनों मुख्य राजनीतिक दलों के चेहरे पर एक करारा तमाचा है। उमेश कुमार ने साफ कर दिया है कि वे सदन से जरूर जा रहे हैं, लेकिन मैदान नहीं छोड़ेंगे। वे जनता के बीच जाएंगे और अगली बार उन लोगों को साथ लेकर सदन में लौटेंगे जो वाकई प्रदेश के मुद्दों पर सीना तानकर खड़े हो सकें। दोस्तो अब देखना होगा कि बुधवार को जब उमेश कुमार अपना इस्तीफा सौंपेंगे, तो उसके बाद खानपुर सीट और हरिद्वार की राजनीति क्या करवट लेती है। क्या विपक्ष उमेश कुमार के इन तीखे आरोपों का कोई जवाब दे पाएगा या फिर इस बड़े सियासी विस्फोट से पूरी तरह बैकफुट पर आ जाएगा?