Babita Pandey केस पुलिस की नई थ्योरी? | Dayara Bugyal | Uttarkashi | Uttarakhand News

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दोस्तो, 40 दिनों से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन रामनगर की 24 वर्षीय एमबीए छात्रा बबीता पांडे आज भी रहस्य बनी हुई हैं। दयारा बुग्याल ट्रेक पर गई बबीता आखिर कहां गायब हो गईं? यह सवाल अब सिर्फ उनके परिवार का नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड का बन चुका है..पुलिस ने जंगलों को खंगाला, पहाड़ों को छाना, झीलों में गोताखोर उतारे, ड्रोन उड़ाए, सेना, आईटीबीपी, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और डॉग स्क्वॉड तक को लगाया, लेकिन बबीता का अब तक कोई सुराग नहीं मिला। तो अब पुलिस की वो नई थ्योरी क्या है जो बबीता की पड़ताल को प्रदेश के बड़े अस्पतालों तक ले आई। दोस्तो बबीता पांडे दयारा से कहां गई बीते 40-45 दिन से इसका पता नहीं चल पाया लेकिन अब दो खबर हैं वो दोनों खबर आपको एक एक बताउंगा। दोस्तो दयारा बुग्याल ट्रेक से रहस्यमय ढंग से लापता ग्राम चिल्किया नैनीताल निवासी बबीता पांडे की तलाश को अब पुलिस एम्स ऋषिकेश सहित अन्य बड़े अस्पतालों में दस्तक देगी। दोस्तो, बबीता की खोज में पुलिस की कुछ टीमें ऋषिकेश, देहरादून व हरिद्वार आदि मैदानी क्षेत्रों सहित अन्य जनपदों में भी गई थी, जो कि वापस लौट आई हैं, लेकिन उन्हें बबीता के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। इसके बाद अब बड़े अस्पतालों में जांच करने का निर्णय लिया गया है। दोस्तो बीते 29 मई को चौबीस वर्षीय वर्षीय एमबीए छात्रा बबीता पांडे अपने दो मित्रों (युवकों) के साथ दयारा बुग्याल ट्रेकिंग पर गई थी, जो कि 29 मई की मध्यरात्रि को ही रहस्यमय ढंग से लापता हो गई थी। बबीता की गुमशुदगी को 40 से 45 दिन से अधिक का समय हो चुका है। इस मामले में पुलिस अब नए सिरे से अस्पतालों में जांच करने की तैयारी कर रही है, ताकि बबीता के संबंध में कोई सुराग मिल सके।

दोस्तो बबीता के परिवार वालों ने बबीता के अपहरण का भी शक जताया था, जिस पर बबीता के साथ गए दोनों युवकों पर अपहरण की धाराओं में भी केस दर्ज किया गया। वहीं दोस्तो आपको ये बता दूं कि कुछ समय पूर्व पुलिस ने जांच के दायरे को बढ़ाते हुए ऋषिकेश, देहरादून व हरिद्वार आदि बड़े शहरों में भी पुलिस की टीमें उतारी थी, जिसमें करीब छह से सात सदस्य शामिल थे। लेकिन उनकी खोजबीन में भी बबीता के संबंध में कोई विशेष जानकारी नहीं मिल सकी है। वहीं दोस्तो पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, अब ऋषिकेश एम्स सहित दून मेडिकल कालेज आदि में भी पुलिस जांच करने की तैयारी कर रही है, जिसमें पिछले एक-डेढ़ महीने में अस्पताल में आए अज्ञात शवों सहित किसी भी तरह की असमान्य घटनाओं को जांच में शामिल किए जाने की संभावना है। दोस्तो लापता बबीता की तलाश पुलिस ने जमीन आसमान एक कर चुकी है। अभी तक के प्रयासों की बात करें तो लापता होने की सूचना के बाद घटनास्थल दयारा बुग्याल के गोई बेस कैंप सहित आसपास के जंगली इलाके में करीब दस से अधिक दिनों तक गहन सर्च आपरेशन चलाया गया। इस सर्च आपरेशन में पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, एसओजी, वन विभाग की टीमों के अलावा आइटीबीपी व सेना के जवान भी उतरे। दोस्तो ड्रोन कैमरों से भी जंगल को छाना गया। हेलीकाप्टर से भी करीब 35 मिनट तक सर्च आपरेशन चलाया गया। गोई झील में गोताखोर ने पड़ताल की। बाद में झील को वाटर पंप से खाली कर भी देखा गया। इसके अलावा भालुओं के संभावित ठिकानों व काली गुफाओं में भी जांच एजेंसियों ने खोजबीन की। इसके अलावा दोस्तो जगह-जगह बबीता के फोटो वाले पंफलेट भी बांटे गए। बावजूद इसके उसका कहीं कुछ पता नहीं चल सका है, लेकिन दोस्तो पुलिस की इस कोशिश का कोई भी असरदार नतीजा अब तक सामने नहीं आया है।

फिलहाल, पुलिस ने इस सिलसिले में एफआईआर भी दर्ज कर ली है और बबीता के साथ आखिरी बार मौजूद दोनों लड़कों से पूछताछ कर रही है, लेकिन नतीजा सिफर है। अब सवाल ये है कि आखिर बबीता की गुमशुदगी के पीछे क्या-क्या संभावित वजह हो सकती है? तो दोस्तो तफ्तीश में पुलिस उन सारी वजहों को एक्सप्लोर कर रही है, कि बबीता किसी को बताए बगैर खुद ही अपनी मर्जी से कहीं चली गई हो। दूसरा ये कि बबीता के साथ ट्रैकिंग पर गए दोस्त झूठ बोल रहे हों और उन्होंने ही बबीता को कहीं गायब कर दिया हो। तीसरा ये कि वो टेंट के बाहर निकलने पर कोई जंगली जानवर उसे उठा ले गया हो। चौथा ये कि वो या तो जंगलों में रास्ता भटक गई हो या फिर उसके साथ कोई और अनहोनी हुई हो। इन्ही आशंकाओं के मद्देनजर 150 लोगों से ज्यादा लोगों का लवाजमा बबीता को ढूंढने में लगा है। पुलिस के साथ-साथ, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, एसओजी, आईटीबीवी, वन विभाग, डॉग स्क्वॉयड, ड्रोन सर्चिंग टीम और यहां तक कि गोताखोर भी बबीता की तलाश कर रहे हैं। इस बीच जिला प्रशासन ने गोई के पास मौजूद एक झील की गहराई को नापने का फैसला किया और इसके लिए खास तौर पर गोताखोरों की टीम बुलाई गई. वैसे भी अगर खुदा न खास्ता बबीता किसी जंगली जानवर का शिकार बनी होती, तो फिर उसके कुछ ना कुछ निशान अब तक की तलाशी में जरूर नजर आते। ऐसे में अब ये भी शक होने लगा कि कहीं बबीता गलती से झील के पानी में तो नहीं गिर गई. इसी के बाद लगभग 9 फीट गहरी झील को भी खंगाला गया, लेकिन बबीता का कोई सुराग नहीं मिला। दोस्तो, 40 से 45 दिन बीत जाने के बाद भी बबीता पांडे का कोई सुराग नहीं मिलना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। पुलिस अब अस्पतालों तक जांच का दायरा बढ़ा रही है, यानी जांच एजेंसियां किसी भी संभावित पहलू को नजरअंदाज नहीं करना चाहतीं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है—आखिर बबीता पांडे कहां हैं? क्या यह कोई हादसा था, कोई आपराधिक घटना, या फिर इस रहस्य के पीछे कोई ऐसी सच्चाई छिपी है जो अब तक सामने नहीं आ सकी?उम्मीद यही है कि पुलिस की यह नई कोशिश किसी अहम सुराग तक पहुंचे और बबीता के परिवार को जल्द से जल्द जवाब मिल सके, जिसका वे पिछले डेढ़ महीने से इंतजार कर रहे हैं। फिलहाल इस मामले में जैसे ही कोई नया और आधिकारिक अपडेट सामने आएगा, सबसे पहले आपको जानकारी देंगे।