Badrinath आखिरी मुस्कान दर्दनाक अंत!| Chamoli | Rescue Operation | CM Dhmai | Uttarakhand News

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चेहरे पर मुस्कान, कैमरे में कैद खूबसूरत वादियां और अपनों के साथ साझा करने के लिए बनाया गया एक वीडियो! लेकिन किसे पता था कि ये मुस्कुराता चेहरा कुछ ही पलों बाद एक दर्दनाक हादसे की आखिरी निशानी बन जाएगा,,बद्रीनाथ से उड़ान भरने वाले हेलीकॉप्टर में सवार बेंगलुरु के प्रताप ने टेक-ऑफ से ठीक पहले अपना वीडियो बनाया था। लेकिन उड़ान के महज दो मिनट बाद जोशीमठ की पहाड़ियों में ऐसा हादसा हुआ, जिसने छह परिवारों की खुशियां उजाड़ दीं। पायलट समेत छह लोगों की जिंदगी का सफर हमेशा के लिए थम गया। दोस्तो मौटत जब दस्तक देती है, तो इंसान को संभलने का एक पल भी नहीं देती, लेकिन जब उसी मौत से ठीक कुछ सेकंड पहले की कोई हंसती-मुस्कुराती तस्वीर या वीडियो सामने आ जाए, तो पत्थर दिल इंसान की भी रूह कांप जाती है। उत्तराखंड के चमोली जिले के जोशीमठ घाटी से एक ऐसा ही दिल दहला देने वाला वीडियो सामने आया है। बद्रीनाथ से देहरादून के लिए उड़ान भरने वाले एक प्राइवेट हेलीकॉप्टर में सवार बेंगलुरु के एक टूरिस्ट प्रताप का आखिरी सेल्फी वीडियो वायरल हुआ है। इस वीडियो में वो मुस्कुरा रहे हैं, टेक-ऑफ से पहले बेहद खुश हैं, खिड़की से बाहर का नजारा दिखा रहे हैं, लेकिन वो इस बात से पूरी तरह अनजान थे कि जिस उड़ते हुए पंख वाले रथ में वो बैठे हैं, वो महज 2 मिनट के भीतर ही काल का ग्रास बनने वाला है! इस दर्दनाक क्रैश में पायलट समेत सभी 6 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। लेकिन इस हादसे ने उत्तराखंड के पहाड़ों में उड़ने वाले इन हेलीकॉप्टरों और सैलानियों की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर और आक्रामक सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर उस आखिरी सफर के दौरान क्या हुआ था? दोस्तो चेहरे पर ये सुकून। अपनों को दिखाने के लिए कैमरे के सामने बिखेरी गई ये आखिरी मुस्कान और बैकग्राउंड में घूमते हेलीकॉप्टर के पंखे। 41 साल के प्रताप बचीहल्ली निंगराजू जब बद्रीनाथ हेलीपैड पर बैठकर यह वीडियो रिकॉर्ड कर रहे थे, तो उनके जेहन में दूर-दूर तक यह खौफ नहीं था कि यह उनकी जिंदगी का आखिरी पल साबित होने वाला है। टेक-ऑफ से चंद सेकंड पहले का यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसे देखकर हर किसी की आंखें नम हैं और सिस्टम के खिलाफ गुस्सा उफान पर है!

दोस्तो तारीख—30 अक्टूबर 2026। दोपहर के ठीक 1 बजकर 12 मिनट पर ‘ट्रांस भारत एविएशन’ के इस हेलीकॉप्टर (रजिस्ट्रेशन नंबर VT-HCX) ने बद्रीनाथ हेलीपैड से देहरादून के सहस्रधारा के लिए उड़ान भरी। मौसम खराब था, बर्फबारी हो रही थी। लेकिन टेक-ऑफ के महज 2 मिनट बाद, यानी 1 बजकर 14 मिनट पर अचानक इस चॉपर का रडार और एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से संपर्क टूट गया! और दोस्तो पलक झपकते ही यह उड़ता हुआ विमान जोशीमठ की गहरी घाटी में ओझल हो गया। पास के ही एक आर्मी पोस्ट के जवानों ने चॉपर को घाटी की तरफ जाते देखा और कुछ ही पलों में आसमान में काले धुएं का गुबार उठ खड़ा हुआ! चॉपर जोशीमठ के चाई गांव के पास हाथी पर्वत की पहाड़ियों से टकराकर क्रैश हो चुका था। दोस्तो इस दर्दनाक हादसे ने पल भर में 6 परिवारों को कभी न भूलने वाला जख्म दे दिया। इस हेलीकॉप्टर को उड़ा रहे थे दिल्ली के रहने वाले 48 साल के अनुभवी पायलट कैप्टन हिमांशु सभरवाल। लेकिन इनके साथ सफर कर रहे बाकी 5 लोग बेंगलुरु के रहने वाले गहरे दोस्त थे जो देवभूमि के दर्शन करने आए थे। इनमें वीडियो बनाने वाले प्रताप के अलावा बेंगलुरु क्राइम ब्रांच के पुलिस इंस्पेक्टर अरुण सालुंके, बिजनेसमैन एच.एस. नटराज, और दो नामी वकील के. सुधीर व शंकर गौड़ा शामिल थे। किसे पता था कि इन दोस्तों का यह पवित्र सफर उनके जीवन का आखिरी सफर बन जाएगा।

दोस्तो हादसे के तुरंत बाद उत्तराखंड सिविल एविएशन डेवलपमेंट अथॉरिटी (UCADA) ने ट्रांस भारत एविएशन के पूरे फ्लीट को ग्राउंडेड यानी उड़ानों पर रोक लगा दी है। DGCA और AAIB की टीमें जांच के लिए देहरादून पहुंच रही हैं। शुरुआती रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि खराब मौसम और बर्फबारी की वजह से यह हादसा हुआ। लेकिन यहाँ सवाल बेहद तीखा और आक्रामक है! जब मौसम इतना खराब था, विजिबिलिटी शून्य के बराबर थी और बर्फबारी हो रही थी, तो इस निजी कंपनी के हेलीकॉप्टर को उड़ान भरने की इजाजत किसने दी? क्या अंधाधुंध कमाई के चक्कर में सुरक्षा के सारे नियमों को ताक पर रख दिया गया था? विपक्ष भी अब सरकार को घेर रहा है और आरोप लगा रहा है कि उत्तराखंड में हेलीकॉप्टरों को खटारा टैक्सियों की तरह उड़ाया जा रहा है, जहां यात्रियों की सुरक्षा राम भरोसे है! दोस्तो यह कोई पहला हादसा नहीं है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले 10 सालों में उत्तराखंड के पहाड़ी और चारधाम रूट पर 12 से ज्यादा हेलीकॉप्टर हादसे हो चुके हैं, जिनमें दर्जनों मासूम तीर्थयात्रियों और पायलटों ने अपनी जान गंवाई है। हर बार हादसे के बाद बड़ी-बड़ी कमेटियां बैठती हैं, जांच के आदेश दिए जाते हैं, कंपनियों को सस्पेंड करने का नाटक होता है, लेकिन कुछ ही दिनों बाद फिर वही खूनी खेल शुरू हो जाता है। पहाड़ों की दुर्गम वादियों, तेज हवाओं और अचानक बदलने वाले मौसम के बीच इन छोटे प्राइवेट चॉपर्स को उड़ाना मौत को दावत देने जैसा है, लेकिन सिस्टम की लापरवाही इस पर लगाम लगाने में नाकाम रही है। दोस्तो प्रताप का वो आखिरी मुस्कुराता हुआ वीडियो हर उस शख्स के लिए एक सबक और सिस्टम के मुंह पर तमाचा है, जो सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हैं। आज बेंगलुरु में इन पांचों दोस्तों के घरों में मातम पसरा है। सरकार ने जांच के आदेश तो दे दिए हैं, लेकिन क्या यह जांच किसी बड़े अफसर या एविएशन कंपनी के मालिक पर कार्रवाई तक पहुंचेगी? या फिर हर बार की तरह इस बार भी खराब मौसम का बहाना बनाकर फाइल को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा? इन हंसते हुए चेहरों को इंसाफ तभी मिलेगा जब देवभूमि की आसमान में उड़ने वाली इन उड़ानों को सुरक्षित बनाया जाएगा।