दोस्तो, पौड़ी-श्रीनगर की हार के बाद क्या अब बागेश्वर में छात्र राजनीति ने लिया हिंसक मोड़? कॉलेज में चुनावी रंजिश को लेकर दो गुट आमने-सामने आए और देखते ही देखते विवाद मारपीट तक पहुंच गया।सवाल ये है—ये सिर्फ चुनावी तनातनी थी या हार की बौखलाहट का असर?आखिर कॉलेज कैंपस में ऐसा क्या हुआ कि छात्र नेता घायल हो गया? दोस्तो मै आपको आज की छात्र राजनीति और कल के अपने सूबे के नेताओं की एक हैरान करने वाली तस्वीर दिखाना चाहता हूं, पहले आप तस्वीर देखिए फिर इसका कारण इसके मायने और इसके असर के बारे में बात होगी। देखा आपने तो क्या देवभूमि के कॉलेज अब शिक्षा के मंदिर नहीं, बल्कि गुंडों के अखाड़े बन चुके हैं? क्या सत्ता की हनक और बड़े नेताओं की शह पर छात्रसंघ चुनाव जीतने के लिए अब विरोधियों का खून बहाया जाएगा? उत्तराखंड के बागेश्वर स्थित बी.डी. पांडे कॉलेज से जो खबर आ रही है, उसने पूरी छात्र राजनीति को शर्मसार कर दिया है। पौड़ी और श्रीनगर गढ़वाल के कॉलेजों में करारी शिकस्त झेलने के बाद, कैसे सत्ता पक्ष की छात्र इकाई अब गुंडागर्दी पर उतारू हो गई है, कैसे छात्रों को इस कदर पीटा की कईयों के सिर फट गए, दोस्तो छात्रसंघ चुनाव का बिगुल बजते ही देवभूमि के कॉलेजों में बारूद सुलगने लगा है! यह तस्वीरें गवाह हैं कि कैसे बागेश्वर का बी.डी. पांडे कॉलेज छात्र राजनीति के खूनी रंग में रंग चुका है। कॉलेज परिसर उस वक्त चीख-पुकार से गूंज उठा, जब एबीवीपी और एनएसयूआई के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। लात-घूंसे, डंडे और पत्थर जो हाथ में आया, उससे हमला किया गया।
इस हिंसक झड़प में एनएसयूआई के कद्दावर छात्र नेता प्रेम दानू को इतनी बेरहमी से पीटा गया कि वो लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़े, लेकिन दोस्तो इस हिंसा की क्रोनोलॉजी को समझिए! यह सिर्फ दो छात्र गुटों की आपसी लड़ाई नहीं है, बल्कि इसके तार सीधे उत्तराखंड की छात्र राजनीति से जुड़े हैं! हाल ही में पौड़ी और श्रीनगर के छात्रसंघ चुनावों में बीजेपी की छात्र इकाई यानी एबीवीपी को कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई ने करारी पटकनी दी है। गढ़वाल के इन बड़े गढ़ों में मिली करारी हार ने सत्ताधारी विंग के होश उड़ा दिए। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो इसी हार की बौखलाहट का साफ असर अब प्रदेश के दूसरे कॉलेजों में देखने को मिल रहा है, जहां चुनाव जीतने के लिए साम-दाम-दंड-भेद का नंगा नाच शुरू हो चुका है! दोस्तो विपक्ष और छात्र कार्यकर्ताओं का सीधा और गंभीर आरोप है कि बीजेपी की यह छात्र विंग अपने बड़े आकाओं और मंत्रियों की शह पर गुंडागर्दी कर रही है। जब पोलिंग बूथ पर जनाधार खिसकता दिखता है, तो लाठियों के दम पर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जाती है। बागेश्वर में भी यही हुआ। चुनाव से ठीक पहले माहौल को इस कदर तनावपूर्ण बना दिया गया ताकि आम छात्र डर जाएं। यह लोकतंत्र की छाती पर सीधा प्रहार है, जहां बड़े नेताओं का वरदहस्त पाकर ये छात्र विंग बेखौफ घूम रही है। दोस्तो तो अब ताजा और बड़ा अपडेट यह है कि इस खूनी झड़प के बाद पूरे बागेश्वर में भारी तनाव व्याप्त है। गंभीर रूप से घायल छात्र नेता प्रेम दानू के सिर पर धारदार हथियार या कड़े से वार किया गया था, जिसके बाद जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने उनके सिर पर कई टांके लगाए हैं।
इधर, कोतवाली में 6 नामजद युवकों के खिलाफ केस दर्ज करने की तहरीर दी जा चुका है। कांग्रेस के पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण और पूर्व जिलाध्यक्ष भगवत सिंह डसीला समेत भारी संख्या में कांग्रेसी नेता कोतवाली पहुंचे और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर उग्र हंगामा किया। उन्होंने सख्त चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो पुलिस अधीक्षक कार्यालय का घेराव कर बड़ा धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। दोस्तो बागेश्वर की इस घटना ने उत्तराखंड की शांत वादियों में छात्र राजनीति के गिरते स्तर को उजागर कर दिया है। पौड़ी और श्रीनगर में मिली हार का बदला क्या बागेश्वर के छात्रों का सिर फोड़कर लिया जाएगा? क्या बड़े नेताओं का संरक्षण इन लड़कों को कानून से ऊपर बना देता है? अब देखना यह होगा कि बागेश्वर पुलिस इन गुंडागर्दी करने वाले चेहरों पर कब तक शिकंजा कसती है या फिर सत्ता के दबाव में इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा! लेकिन दोस्तो छात्रसंघ चुनाव विचारों की लड़ाई होते हैं, लाठियों और पत्थरों की नहीं। अगर सत्ता की धौंस पर कॉलेजों को युद्ध का मैदान बनाया जाएगा, तो देवभूमि का युवा खुद को कहां सुरक्षित पाएगा? बागेश्वर पुलिस और कॉलेज प्रशासन के सामने अब शांतिपूर्ण चुनाव कराने की बड़ी चुनौती है आप के मन में क्या आ रहा है इस तरह की छात्र राजनीति को लेकर आप अपनी राय देने के स्वतंत्र हैं।