दोस्तो गैरसैंण में विधानसभा सत्र, सिमली में संग्राम! जी हां दोस्तो 40 किमी पहले ही क्यों और किसके लिए लगा दी गई सरकारी बाड़, एक तरफ अंकिता को न्याय और गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग। दूसरी तरफ पुलिस की बैरिकेडिंग!विधानसभा से करीब 40 किलोमीटर पहले UKD के कार्यकर्ताओं को क्यों रोका गया? क्या दो दिन के सत्र में इन सवालों का जवाब मिलेगा?गैरसैंण से सत्ता को घेरती इस सियासी टकराव की पूरी कहानी! के पीछे क्या है क्या है छिपा है। दोस्तो उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण में आज से विधानसभा का दो दिवसीय सत्र शुरू हो चुका है। लेकिन हुक्मरानों के सदन में बैठने से पहले ही बाहर सड़कों पर ऐसा संग्राम छिड़ा है, जिसने सरकार के सुरक्षा दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं! दोस्तो उत्तराखंड क्रांति दल यानी UKD के सैकड़ों कार्यकर्ता जब अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय और गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने का संकल्प लेकर विधानसभा घेराव के लिए आगे बढ़ रहे थे, तो पुलिस ने उन्हें मुख्य पड़ाव से 40 किलोमीटर पहले ही सिमली में लोहे की दीवारों यानी भारी बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया! आखिर जनता की आवाज से इतनी दहशत क्यों? आखिर उत्तराखंड की मूल भावना की बात करने वालों को लोकतंत्र के मंदिर तक पहुंचने से क्यों रोका जा रहा है?
दोस्तो पहाड़ों की ठंडी वादियों में सियासी पारा इस वक्त सातवें आसमान पर है। विधानसभा सत्र के पहले ही दिन उत्तराखंड क्रांति दल ने सरकार के खिलाफ चौतरफा मोर्चा खोल दिया। UKD के दिग्गज नेता और सैकड़ों कार्यकर्ता जब गाड़ियों के काफिले के साथ विधानसभा भवन भराड़ीसैंण की तरफ कूच कर रहे थे, तभी चमोली जिले के सिमली में पुलिसिया तंत्र ने उन्हें घेर लिया। गैरसैंण से ठीक 40 किलोमीटर पहले ही अभेद्य किला तैयार कर दिया गया। दोस्तो पुलिस ने भारी पुलिस बल और पीएसी के दम पर कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने से रोक दिया। लेकिन दमन की इस कोशिश ने कार्यकर्ताओं के भीतर की आग को और भड़का दिया। सिमली बैंड पर ही कार्यकर्ताओं ने सड़क जाम कर दी और धामी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी। दोस्तो सवाल यह है कि आखिर UKD के इस प्रदर्शन से सरकार इतनी असहज क्यों हो गई? असल में, UKD की मांग उत्तराखंड के स्वाभिमान से जुड़ी है। दल का सीधा आरोप है कि बीजेपी और कांग्रेस, दोनों ही पार्टियों ने गैरसैंण के मुद्दे पर पहाड़ की भोली-भाली जनता को सिर्फ ठगा है।
दोस्तो जब राज्य बना, तो सपना गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने का था। लेकिन सरकारों ने इसे सिर्फ ‘ग्रीष्मकालीन राजधानी’ का झुनझुना बनाकर छोड़ दिया। दो दिन का यह सत्र सिर्फ एक औपचारिकता बनकर रह गया है, जहां जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाए जा रहे हैं, लेकिन पहाड़ों के विकास पर कोई ठोस बात नहीं हो रही। दोस्तो बात सिर्फ राजधानी की नहीं है। UKD कार्यकर्ताओं के आक्रोश की सबसे बड़ी वजह उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी हत्याकांड भी है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अंकिता केस में संलिप्त कथित ‘VIP’ के नाम को रसूखदार लोग आज भी दबाने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में उर्मिला सनावर की नार्को टेस्ट की सहमति के तुरंत बाद हुई गिरफ्तारी ने इस संदेह को और गहरा कर दिया है। दोस्तो सड़कों पर उतरे इन आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उत्तराखंड की बेटी को इंसाफ नहीं मिलता और उस वीआईपी का चेहरा बेनकाब नहीं होता, तब तक यह लड़ाई थमने वाली नहीं है। पुलिस की लाठियों और बैरिकेड्स के दम पर जनता की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। दोस्तो इस हंगामे के बीच केवल UKD ही नहीं, बल्कि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस भी बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार के 14 मुद्दों को लेकर गैरसैंण में विधानसभा के महाघेराव की तैयारी कर चुकी है। यानी सदन के भीतर विपक्ष और सड़क पर क्षेत्रीय दल UKD, दोनों ने मिलकर सरकार की चक्रव्यूह रचना शुरू कर दी है। दोस्तो 40 किलोमीटर दूर सिमली में रोका गया यह जन-आक्रोश भले ही आज भराड़ीसैंण विधानसभा की चौखट तक न पहुंच पाया हो, लेकिन इसकी गूंज ने सदन के अंदर बैठे हुक्मरानों के कानों के पर्दे जरूर हिला दिए हैं। अब देखना होगा कि दो दिन के इस छोटे से सत्र में धामी सरकार जनता के इन तीखे सवालों का क्या जवाब देती है, या फिर हर बार की तरह इस बार भी दावों की आड़ में असल मुद्दों को दबा दिया जाएगा।