गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में विधानसभा सत्र के पहले दिन सरकार की नीतियों के खिलाफ विपक्ष और विभिन्न क्षेत्रीय संगठनों का भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के आह्वान पर आयोजित इस ‘भराड़ीसैंण कूच’ को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन ने पहले से ही दिवालीखाल और जंगलचट्टी बैरियर पर कड़े सुरक्षा इंतजाम किए थे। जैसे ही प्रदर्शनकारियों ने विधानसभा भवन की ओर बढ़ने का प्रयास किया, वहां माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ रहे कार्यकर्ताओं को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को भारी बल प्रयोग करना पड़ा, जिसके तहत प्रदर्शनकारियों पर वॉटर कैनन से ठंडे पानी की बौछारें की गईं। इस दौरान पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच तीखी झड़पें हुईं और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई प्रमुख नेताओं व कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया गया।
यह उग्र प्रदर्शन मुख्य रूप से उत्तराखंड के कई ज्वलंत और अनसुलझे जन-मुद्दों को लेकर राज्य की धामी सरकार के खिलाफ किया जा रहा था। प्रदर्शनकारी लंबे समय से लंबित गैरसैंण को स्थाई राजधानी घोषित करने की मांग, पर्वतीय क्षेत्रों से लगातार हो रहे पलायन, अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय दिलाने की मांग के साथ-साथ राज्य में बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर आवाज बुलंद कर रहे थे। विपक्ष का आरोप है कि सरकार जनसरोकारों से जुड़े इन गंभीर विषयों पर चर्चा से बच रही है, जबकि शासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था और शांति बनाए रखने को प्राथमिक जिम्मेदारी बताया गया। विधानसभा सत्र के पहले ही दिन हुए इस भारी बवाल ने राज्य की राजनीतिक तपिश को एक बार फिर चरम पर पहुंचा दिया है।