‘BJP का दोहरा चरित्र’ ये क्या हो रहा है? । Mallikarjun Kharge । Congress । Uttarakhand News

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दोस्तो लोकतंत्र शर्मसार है या राजनीति अपने सबसे निचले स्तर पर गिर चुकी है? देश की संसद से लेकर देवभूमि उत्तराखंड की गलियों तक इस वक्त एक ही सवाल गूंज रहा है! कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी राज्यसभा में दहाड़ते हुए पूछा था— ‘क्या मैं दलित हूँ, इसलिए मेरे जाने के बाद मंच को गंगाजल से धोया गया?’ हैरानी की बात देखिए जिस कृत्य पर दिल्ली में बीजेपी के नेता केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा राज्यसभा में खेद जता चुके हैं, उसी को उत्तराखंड बीजेपी अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने सही ठहराकर पूरे देश में बवाल खड़ा कर दिया है! आखिर दिल्ली और देहरादून के बीच बीजेपी के इस दोहरे स्टैंड का असली सच क्या है? क्या वाकई चुनाव आते ही समाज को बांटने का यह खेल शुरू हो चुका है? और कांग्रेस ने कैसे किया पलटवार बताउंगा आपको पूरी खबर। दोस्तो इसी वीडियो पर खूब बवाल हुआ है एक बार लगा थंब गया होगा, लेकिन चुनाव है ऐसे कैसे थमेगा जहां भरी राज्यसभा में बीचे सत्र के द्वार बीजेपी के केंद्रीय नेता और मोदी सरकर में मंत्री नड्डा साहब खेद व्यक्त कर रहे थे इसी घटना पर वहीं अब बीजेपी अध्यक्ष महेंद्र भट्ट उसको जायज ठहरा रहे हैं।

दोस्तो पूरा मामला शुरू होता है 8 अगस्त को, जब उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। खड़गे दिल्ली लौटे, लेकिन उनके जाते ही कुछ हिंदूवादी संगठनों और कथित तौर पर आरएसएस से जुड़े लोगों ने उस मंच को गंगाजल से धोकर उसका ‘शुद्धिकरण’ कर दिया। जैसे ही ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, देश की सियासत में भूचाल आ गया। कांग्रेस ने इसे देश के सबसे बड़े दलित नेता का सीधा अपमान और मनुवादी सोच का जीता-जागता सबूत करार दे दिया। दोस्तो बात जब संसद पहुंची, तो कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने तड़पते हुए पूछा— ‘क्या यही लोकतंत्र है?’ स्थिति इतनी गंभीर थी कि केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को खुद खड़े होकर इस घटना पर संसद में खेद व्यक्त करना पड़ा। दिल्ली में बीजेपी बैकफुट पर थी, लेकिन उत्तराखंड आते-आते कहानी पूरी बदल गई। उत्तराखंड बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने इस ‘शुद्धिकरण’ को जायज ठहराते हुए कह दिया— ‘शुद्धिकरण किया तो क्या गलत किया? वहां रैली से गंदगी हो गई थी।’ अब जनता पूछ रही है कि नड्डा जी की बात सही है या महेंद्र भट्ट की? भट्ट जी, अगर गंदगी पूरे मैदान में थी, तो केवल उस लकड़ी के मंच का शुद्धिकरण क्यों हुआ, जहां खड़गे जी बैठे थे? ये कांग्रेस पूछ रही है।

दोस्तो अब बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को कांग्रेस अध्यक्ष ने आड़े हाथों लेते हुए उनकी धज्जियां उड़ा दीं। ऐसा लगा गोदियाल ने सीधे लहजे में कहा— ‘भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट जी को पहले शुद्धीकरण और केवल सफाई का फर्क समझना चाहिए! हल्द्वानी में खड़गे जी की सभा के बाद हुए इस घिनौने कृत्य को उचित ठहराना भाजपा की असली और जनविरोधी नीयत को दर्शाता है। अगर वहां कूड़ा-कचरा था तो सफाई कर्मचारी बुलाकर सफाई होती है, गंगाजल से शुद्धीकरण नहीं किया जाता। केवल राजनीतिक लाभ के लिए समाज को जातियों में बांटने और उत्तराखंड के भाईचारे को नुकसान पहुंचाने वाली इस ओछी राजनीति से भाजपा बाज आए। चुनाव आते-जाते रहेंगे, लेकिन उत्तराखंड और देवभूमि की एकता सबसे महत्वपूर्ण है। दोस्तो महेंद्र भट्ट के इस एक बयान ने उत्तराखंड की शांत वादियों में बारूद की तरह काम किया है। उत्तराखंड की राजनीति के जानकारों की मानें, तो राज्य में एक बड़ी आबादी अनुसूचित जाति और दलित समाज की है। ऐसे में देश के सबसे बड़े संवैधानिक पद पर बैठे दलित नेता के मंच धोने को ‘सफाई’ बताना, बीजेपी के लिए आने वाले चुनावों में भारी पड़ सकता है। एक तरफ जहां पुष्कर सिंह धामी सरकार लगातार ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा देती है, वहीं उनके ही संगठन के मुखिया का ऐसा बयान सरकार की पूरी छवि को कटघरे में खड़ा कर देता है। क्या यह बयान उत्तराखंड के भाईचारे और सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने की सोची-समझी रणनीति है?