Nepal में नई मुसीबत की आहट! । Nepal Flood । Tibet । China । Uttarakhand News

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दोस्तो नेपाल अभी अपनों की लाशें गिन भी नहीं पाया था कि चीन की तरफ से आए एक महा-खौफनाक अलर्ट ने पूरे देश की सांसें रोक दी हैं। अगले 72घंटे, जी हां, सिर्फ 3 दिन! हिमालय की छाती पर 20 लाख घन मीटर पानी का एक ऐसा परमाणु बम तैयार हो चुका है जो कभी भी फट सकता है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय की इस चेतावनी ने नेपाल से लेकर भारत के यूपी और बिहार तक हड़कंप मचा दिया है। आखिर तिब्बत के पहाड़ों में लॉक हुआ ये अरबों लीटर पानी कैसे एक बार फिर महाविनाश लाने को तैयार है? दोस्तो कुदरत का कहर किसे कहते हैं, यह देखना हो तो तिब्बत और नेपाल के बॉर्डर को देखिए। 26 अगस्त की तबाही के बाद पहाड़ों का लाखों टन मलबा नदियों के रास्ते में गिर गया, जिससे छोछेन खोला और पुरेपू त्सांगपो नदियों के संगम पर एक विशालकाय ‘बैरियर लेक’ यानी कृत्रिम झील बन गई है। दोस्तो चीन के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस वक्त इस मलबे के पीछे 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका है और यह लगातार किनारों से छलक रहा है। चीन ने साफ चेतावनी दी है कि अगले 72 घंटों में होने वाली भारी बारिश इस झील में 30 लाख घन मीटर पानी और भर देगी। अगर यह मलबे की दीवार टूटी, तो 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आने वाला सैलाब बचे-खुचे नेपाल को भी लील जाएगा!

दोस्तो इधर इस भयानक मुसीबत के बीच अब एक नया सियासी और कूटनीतिक संग्राम भी छिड़ गया है। नेपाल के स्थानीय मीडिया और रक्षा विशेषज्ञों का सीधा आरोप है कि 26 अगस्त को जब तिब्बत में पहला ग्लेशियर फटा, तो चीन को इसकी भनक थी, लेकिन उसने जानबूझकर नेपाल को ‘अर्ली वार्निंग’ यानी समय पर सूचना नहीं दी, जिससे 133 भारतीय तीर्थयात्रियों सहित सैकड़ों लोग फंस गए। हालांकि, दोस्तो काठमांडू में चीनी दूतावास ने इसे ‘फेक न्यूज’ बताते हुए साफ कहा है कि उनके अपने 500 से ज्यादा लोग इस अचानक आई आपदा में लापता हैं, लेकिन सवाल वही है— क्या महाशक्तियों की कूटनीतिक जंग में निर्दोष लोग मारे जा रहे हैं? दोस्तो इस नई चेतावनी ने नेपाल की सेना और रेस्क्यू टीमों के होश उड़ा दिए हैं। नुवाकोट और रसुवा जिलों में अब तक 270 से ज्यादा श’व बरामद किए जा चुके हैं और करीब 1300 लोग मलबे के नीचे दबे या लापता हैं। सेना के हेलीकॉप्टर्स अभी छतों पर फंसे लोगों को निकाल ही रहे थे कि इस 72 घंटे के अलर्ट ने रेस्क्यू ऑपरेशन पर ब्रेक लगा दिया है। प्रशासन ने बिना वक्त गंवाए नदी किनारे के सभी गांवों को तुरंत खाली करने और लोगों को पहाड़ों पर ऊंचाई की तरफ भागने का सख्त आदेश जारी कर दिया है। इधर दोस्तो चीन के इस 72 घंटे के अलर्ट की टिक-टिक सीधे दिल्ली, पटना और लखनऊ में सुनाई दे रही है। दोस्तो खबर है कि केंद्रीय जल आयोग (CWC) ने बिहार के पश्चिमी चंपारण, मुजफ्फरपुर और उत्तर प्रदेश के महाराजगंज, कुशीनगर जिलों में महा-अलर्ट जारी किया गया है क्योंकि अगर तिब्बत का ये बांध टूटता है, तो त्रिशूली नदी का ये महा-सैलाब गंडक और राप्ती के रास्ते भारत के इन राज्यों में 3 मीटर से ज्यादा ऊंची लहरें पैदा करेगा। खबर तो ये भी है कि सीमा पर एनडीआरएफ की टीमें तैनात हैं और हर छोटी-बड़ी हलचल पर पैनी नजर रखी जा रही है। दोस्तो हिमालय की चोटियों पर पानी का यह 20 लाख घन मीटर का बम फट चुका है और तबाही का काउंटडाउन शुरू हो चुका है, अगले 72 घंटे इस उपमहाद्वीप के इतिहास के सबसे भारी 3 दिन होने वाले हैं।