Raksha Bandhan पर पहाड़ियों ने क्या कहा ‘नेता हो तो ऐसा!’ | Rajdeep Parmar | Uttarakhand News

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दोस्तो राजनीति में आपने नेताओं को वादे करते और चुनावी भाषण देते तो खूब देखा होगा, लेकिन उत्तरकाशी में एक नेता ने ऐसा कदम उठाया, जिसने जनसेवा की अलग मिसाल पेश कर दी। वेतन अपने लिए नहीं, गरीब परिवारों की बेटियों के लिए! रक्षाबंधन पर भाई का फर्ज निभाते हुए 8 बेटियों के विवाह के लिए आर्थिक मदद की। आखिर कौन हैं ये नेता और क्या है उनकी ये अनोखी पहल? और क्यों लोग कहने लगे हैं कि नेता हो तो ऐसा! देखिए पूरी खबर, जहां आज के दौर में नेता कुर्सी मिलते ही अपनी तिजोरियां भरने में लग जाते हैं, वहीं उत्तराखंड के एक युवा नेता ने राजनीति में सेवा की एक ऐसी खौफनाक लकीर खींच दी है जिसे देखकर बड़े-बड़े दिग्गज हैरान हैं। गंगोत्री विधानसभा के डुंडा ब्लॉक प्रमुख राजदीप परमार ने अपने एक साल का पूरा मानदेय। जी हां, एक-एक रुपया गरीब और जरूरतमंद बेटियों के कन्यादान में समर्पित कर दिया है!”इतना ही नहीं, इस नेता ने अपनी जेब से भी मोटी रकम मिलाकर 8 गरीब परिवारों की बेटियों को 21-21 हजार रुपये के चेक सौंपे और भविष्य के लिए एक ऐसा महा-ऐलान कर दिया जो विरोधियों की रातों की नींद उड़ा देगा!

आखिर क्या है राजदीप परमार का वो बड़ा सियासी संकल्प, जिसने उत्तरकाशी की राजनीति में हलचल मचा दी है? वो आप इन तस्वीरों को देखकर अंदाज भर लगा सते हैं। दोस्तो कहते हैं कि राजनीति काजल की कोठरी है, जहां जाने के बाद इंसान सिर्फ अपना फायदा देखता है, लेकिन उत्तरकाशी के गंगोत्री विधानसभा के तहत आने वाले डुंडा ब्लॉक से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो इस सोच को पूरी तरह बदल देती है। डुंडा के ब्लॉक प्रमुख राजदीप परमार ने राजनीति को व्यवसाय नहीं, बल्कि समाज के सबसे आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति के आंसू पोंछने का जरिया बनाया है। उन्होंने अपने एक साल के कार्यकाल का पूरा मानदेय बिना किसी शोर-शराबे के गरीब बेटियों के नाम कर दिया। दोस्तो अक्सर चुनाव आते ही नेता वोट बैंक के लिए जातियों में समाज को बांटने लगते हैं। लेकिन राजदीप परमार ने अपनी चार पट्टियों से जिन जरूरतमंद परिवारों को चुना, उसमें जातिवाद की दीवार को ढहा दिया उन्होंने ब्राह्मण, राजपूत और अनुसूचित जाति (SC) के उन अत्यंत गरीब परिवारों की बेटियों को चुना, जिनकी शादियों के लिए पिता पाई-पाई को मोहताज थे। रक्षाबंधन के इस पावन मौके पर इन बेटियों ने राजदीप को राखी बांधी, और इस भाई ने उनके हाथ में 21-21 हजार रुपये का चेक थमाकर विदाई का फर्ज निभाया।

इस दौरान माहौल इतना भावुक था कि वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। दोस्तो गरीब की बेटी की शादी में जहां लोग सिर्फ राजनीति चमकाने आते हैं, वहां राजदीप बाबू ने बिना मांगे बहुत कुछ दे दिया। दोस्तो बात अगर इस युवा नेता की करुं तो वो कहते हैं मेरे लिए राजनीति कोई पेशा नहीं है। यह पद मुझे जनता की बदौलत मिला है, इसलिए इस पद का मानदेय भी उन्हीं के बच्चों के काम आना चाहिए। यह मेरा कर्तव्य है, कोई अहसान नहीं। अच्छा है आज के बाद आगे लिए बतादिया कि क्या करने वाले हैं और दूसरे नेताओं को क्या करना चाहिए, लेकिन यहां दोस्तो बात सिर्फ वर्तमान मानदेय की नहीं है। राजदीप परमार इस वक्त गंगोत्री विधानसभा से विधायक पद की मजबूत दावेदारी कर रहे हैं। और उन्होंने यहीं से विरोधियों के खिलाफ एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेल दिया है।

राजदीप ने खुला एलान किया है कि भविष्य में जनता उन्हें जिस भी बड़े पद पर सेवा का मौका देगी, वो उसका मानदेय कभी खुद पर खर्च नहीं करेंगे। उन्होंने साफ कहा कि अगर गंगोत्री की जनता उन्हें विधायक चुनकर विधानसभा भेजती है, तो वो विधायक के रूप में मिलने वाले तमाम वेतन और भत्ते भी सीधे तौर पर जरूरतमंद बेटियों और गरीब परिवारों की मदद के लिए समर्पित कर देंगे। इस एक घोषणा ने पूरे उत्तरकाशी की राजनीति में खलबली मचा दी है। दोस्तो वेतन छोड़कर कन्यादान करने वाले राजदीप परमार ने साबित कर दिया है कि अगर नीयत साफ हो, तो राजनीति के कीचड़ में भी सेवा का कमल खिलाया जा सकता है। दोस्तो आपको क्या लगता है? क्या उत्तराखंड के बाकी विधायकों और मंत्रियों को भी राजदीप परमार की इस अनूठी पहल से सबक लेना चाहिए? क्या ऐसे ही नेताओं से देश का भविष्य बदलेगा? अपनी राय कमेंट बॉक्स में लिखना न भूलें। इस प्रेरक वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें