Congress ‘टिकट दो जीत की गारंटी लो’| Harak Singh Rawat | Sahaspur | 2027 Election | Uttarakhand News

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दोस्तों, सहसपुर से हरक सिंह रावत ने ऐसा दावा ठोक दिया है, जिसने 2027 की सियासत में नया बवाल खड़ा कर दिया!कह रहे हैं—सहसपुर की सीट दे दो, आसपास की 5 विधानसभा सीटों पर जीत दिला दूंगा!विकासनगर, मसूरी, डोईवाला और धर्मपुर तक जीत का दावा, तो सवाल ये—क्या हरक ने सीधे CM धामी को खुला चैलेंज दे दिया है?आखिर सहसपुर को लेकर हरक का ये महादांव कांग्रेस के लिए रणनीति है या नई टेंशन? सब बताउंगा आपको। दोस्तो उत्तराखंड में भले ही विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं, लेकिन सियासी शह और मात का खेल अभी से खूनी संघर्ष में तब्दील होने लगा है। सूबे की राजनीति के सबसे बड़े ‘वेदरमैन’ और हर मौसम में अपनी सियासी जमीन बदलने में माहिर पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने एक ऐसा दावा कर दिया है, जिसने देहरादून से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मचा दिया है! दोस्तो हरक सिंह रावत ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर कांग्रेस उन्हें देहरादून की सहसपुर विधानसभा सीट से टिकट देती है, तो वो न सिर्फ खुद 20 हजार से ज्यादा वोटों से जीतेंगे, बल्कि आसपास की 4 अन्य हाई-प्रोफाइल सीटों— विकासनगर, मसूरी, डोईवाला और धर्मपुर को भी कांग्रेस की झोली में लाकर रख देंगे! उन्होंने तो यहाँ तक कह दिया कि खुद सीएम धामी भी आ जाएं तो वो सहसपुर में उन्हें हरा देंगे! आखिर क्या है हरक का यह ‘सहसपुर प्लान’? क्यों इस बयान से कांग्रेस में घबराहट है और बीजेपी के माथे पर चिंता की लकीरें? दोस्तो उत्तराखंड की राजनीति में डॉ. हरक सिंह रावत को यूं ही ‘अजेय’ या ‘सियासी वेदरमैन’ नहीं कहा जाता। जब भी सूबे की सियासत शांत दिखती है, हरक सिंह रावत ऐसा बयान दागते हैं कि पूरा राजनीतिक अमला हिल जाता है। 2027 के महासंग्राम के लिए हरक सिंह ने इस बार देहरादून की मैदानी सीट सहसपुर पर अपनी नजरें गड़ा दी हैं। हरक ने खुलेआम दावा किया है कि—”मैं घमंड नहीं कर रहा, लेकिन पार्टी अगर मुझे सहसपुर से लड़ाती है तो मैं 20 हजार से ज्यादा वोटों से जीत की गारंटी देता हूं। अगर इससे एक भी वोट कम मिला तो मैं उसे अपनी हार मान लूंगा।

” इतना ही नहीं, दोस्तो हरक ने कांग्रेस आलाकमान को लालच और भरोसा दोनों एक साथ दिया है कि अगर वो सहसपुर से निश्चिंत हो गए, तो वो विकासनगर, मसूरी, डोईवाला और धर्मपुर जैसी महत्वपूर्ण सीटों पर खुद घूमकर कांग्रेस उम्मीदवारों को एकतरफा जीत दिलवाएंगे। दोस्तो हरक सिंह रावत के इस दावे को हल्के में लेने की भूल विरोधी भी नहीं करते, क्योंकि उनका चुनावी इतिहास बेहद हैरान करने वाला है। हरक सिंह रावत उत्तराखंड के उन चुनिंदा नेताओं में से हैं जिन्होंने कभी भी अपनी पारंपरिक सीट पर बंधकर राजनीति नहीं की। वो इसलिए उत्तर प्रदेश के समय वे पौड़ी सीट से चुनाव जीतकर देश के सबसे युवा पर्यटन मंत्री बने थे। उत्तराखंड बनने के बाद साल 2002 और 2007 में उन्होंने लैंसडाउन विधानसभा सीट से लगातार दो बार जीत दर्ज की। इसके बाद साल 2012 में उन्होंने अपनी जमीन बदली और रुद्रप्रयाग से चुनाव लड़कर फिर विधानसभा पहुंचे। साल 2017 में जब वे पाला बदलकर बीजेपी में गए, तो पार्टी ने उन्हें कोटद्वार सीट से उतारा और हरक ने वहां भी कमल खिलाकर अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखा। दोस्तो यानी पहाड़ी क्षेत्रों की चार अलग-अलग सीटों को फतह करने वाले हरक सिंह रावत पहली बार मैदानी क्षेत्र यानी देहरादून की सहसपुर सीट से सीधे चुनावी मैदान में उतरने की हुंकार भर रहे हैं.. लेकिन दोस्तो सवाल यह है कि हरक सिंह रावत के इस दमदार दावे से कांग्रेस के भीतर जश्न क्यों नहीं है? दरअसल, हरक का यह बयान कांग्रेस के लिए बड़ी ‘टेंशन’ बन चुका है। कांग्रेस के भीतर सहसपुर सीट पर पहले से ही कई स्थानीय दावेदार और पुराने नेता टिकट की लाइन में खड़े हैं। हरक सिंह रावत जैसे कद्दावर पैराशूट लीडर की एंट्री से स्थानीय संगठन में बगावत का खतरा मंडराने लगा है.. इधर दोस्तो राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि हरक सिंह रावत बिना प्रदेश संगठन की हरी झंडी के खुद को प्रोजेक्ट कर रहे हैं, जिससे हरीश रावत गुट और करण माहरा गुट के भीतर अंदरूनी खींचतान और तेज हो सकती है। पार्टी को डर है कि कहीं एक सीट जीतने के चक्कर में सहसपुर के स्थानीय कार्यकर्ताओं में असंतोष की आग न भड़क जाए।

दोस्तो दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी के लिए हरक सिंह रावत का यह रुख एक बेहद गंभीर चुनौती है। सहसपुर सीट पर वर्तमान में बीजेपी का कब्जा है। हरक सिंह रावत का मुस्लिम, दलित और मैदानी वोटर्स के बीच अपना एक अलग और मजबूत प्रभाव है। अगर हरक सिंह रावत सहसपुर से उतरते हैं, तो बीजेपी को अपनी इस मजबूत सीट को बचाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ेगा। दोस्तो बीजेपी जानती है कि हरक सिर्फ एक सीट नहीं लड़ते, बल्कि वो एक पूरा ‘चुनावी नैरेटिव’ सेट करते हैं। अगर हरक का जादू चल गया, तो विकासनगर, मसूरी, डोईवाला और धर्मपुर जैसी देहरादून जिले की महत्वपूर्ण सीटों पर भी बीजेपी का समीकरण बिगड़ सकता है, जहां वर्तमान में बीजेपी काफी मजबूत स्थिति में है। दोस्तो कुल मिलाकर, हरक सिंह रावत ने ‘सहसपुर’ के जरिए उत्तराखंड की राजनीति की बिसात पर अपना सबसे बड़ा मोहरा चल दिया है। अब गेंद कांग्रेस हाईकमान के पाले में है कि वो हरक की इस ‘गारंटी’ पर भरोसा करके उन्हें टिकट थमाती है या फिर बगावत के डर से उनके कदम रोकती है। लेकिन एक बात तय है— देवभूमि का यह सियासी संग्राम अब बेहद दिलचस्प होने वाला है। तो दोस्तो डॉ. हरक सिंह रावत ने साफ कर दिया है कि 2027 की लड़ाई के लिए उनके तरकश में तीर तैयार हैं। सहसपुर सीट को केंद्र बनाकर उन्होंने पूरे देहरादून जिले की सियासत को हिलाने का प्लान तैयार किया है। अब देखना यह होगा कि बीजेपी इस बाहरी चुनौती से कैसे निपटती है और खुद कांग्रेस अपने ही इस दिग्गज नेता के दावों को कितनी तवज्जो देती है।