दोस्तों, देहरादून के जौनसार-बावर से सामने आए एक वीडियो ने BJP की अंदरूनी सियासत पर सवाल खड़े कर दिए हैं!पर्वतांचल वॉलीबॉल लीग के मंच पर मुन्ना सिंह चौहान और रामशरण नौटियाल के बीच कथित तौर पर हाथ न मिलाने का वीडियो वायरल और अब सियासी चर्चाएं तेज!एक तरफ जुबिन नौटियाल के पिता का BJP से इस्तीफा, दूसरी तरफ मंच पर दिखा ये कथित फासला—क्या जौनसार की सियासत में कलह अब खुलकर सामने आ गई है?सवाल ये है—क्या 2027 से पहले ये टकराव BJP के लिए बड़ी चुनौती बनने वाला है? कैसे बताता हूं आपको। दोस्तो सियासत में कभी-कभी कैमरे के सामने आई कुछ सेकंड की तस्वीर, वो सब कुछ बयां कर देती है जो सौ पन्नों की रिपोर्ट भी नहीं कर पाती! पर्वतांचल वॉलीबॉल लीग के एक सार्वजनिक मंच पर उत्तराखंड के दिग्गज विधायक मुन्ना सिंह चौहान और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रामशरण नौटियाल आमने-सामने आए। दोस्तो इस तस्वीर को देख रहे हैं मुन्ना सिंह चौहान ने मंच पर मौजूद हर छोटे-बड़े शख्स से हाथ मिलाया, लेकिन जैसे ही वो रामशरण नौटियाल के सामने पहुंचे। उन्होंने नजरें फेर लीं और बिना हाथ मिलाए आगे बढ़ गए! इस एक दृश्य ने उत्तराखंड की सियासत में भूचाल ला दिया है। क्या भारतीय जनता पार्टी से रामशरण नौटियाल के हालिया इस्तीफे के बाद ये दूरियां अब दुश्मनी में बदल चुकी हैं? जौनसार-बावर के इस सियासी खूनी संघर्ष का क्या मायने हैं? वो जानने की कोशिश करते हैं, चलिए। दोस्तो राजनीति के मंच पर कभी-कभी खामोशी भी बहुत बड़ा शोर करती है। देहरादून के विकासनगर क्षेत्र में चल रहे पर्वतांचल वॉलीबॉल लीग के कार्यक्रम में जब दो बड़े कद्दावर नेता— विकासनगर विधायक मुन्ना सिंह चौहान और रामशरण नौटियाल पहुंचे, तो लगा कि खेल के मैदान पर दूरियां मिटेंगी। लेकिन हुआ इसके बिल्कुल उलट। मुन्ना सिंह चौहान ने कतार में खड़े सभी लोगों का अभिवादन स्वीकार किया, सबसे हाथ मिलाया, लेकिन जैसे ही वो रामशरण नौटियाल के करीब आए, दोनों के बीच एक बर्फीली खामोशी छा गई। मुन्ना चौहान आगे बढ़ गए और नौटियाल उन्हें देखते रह गए। कैमरे में कैद हुआ यह छोटा सा लम्हा बता रहा है कि जौनसार-बावर की राजनीति में अंदर ही अंदर कितनी भयंकर कड़वाहट और आग सुलग रही है।
दोस्तो अब सवाल ये आता है कि आखिर इस नफरत या खटास की वजह क्या है? इसके लिए हमें कुछ दिन पीछे जाना होगा। हाल ही में मशहूर सिंगर जुबिन नौटियाल के पिता रामशरण नौटियाल ने पार्टी में ‘सम्मान न मिलने’ का आरोप लगाते हुए भारतीय जनता पार्टी को अलविदा कह दिया है। उनका इस्तीफा भी मंजूर हो चुका है। दोस्तो नौटियाल ने सार्वजनिक रूप से अपना दर्द बयां करते हुए सीधा आरोप लगाया था कि साल 2023 से ही उन्हें पार्टी के भीतर प्रताड़ित और अपमानित किया जा रहा था। उन्होंने कालसी में यमुना घाट के शिलान्यास का जिक्र करते हुए कहा था कि— “एक नेता के इशारे पर पुलिस के सिपाहियों ने उन्हें मंच पर आने से रोका और उनके लिए बैठने तक की कुर्सी नहीं रखी गई, जिससे आहत होकर उन्हें वापस लौटना पड़ा।” हालांकि उन्होंने नाम नहीं लिया था, लेकिन आज के इस वीडियो ने साफ कर दिया है कि सुइयां किस तरफ इशारा कर रही थीं। जौनसार क्षेत्र में लकड़ी तस्करी और भ्रष्टाचार के मुद्दों को लेकर भी वे अपनी ही पार्टी के स्थानीय नेताओं से टकरा रहे थे। दोस्तो जौनसार-बावर की पारंपरिक राजनीति बेहद पेचीदा है। रामशरण नौटियाल साल 2014 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए थे। वे पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं और साल 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें चकराता सीट से कांग्रेस के अभेद्य किले यानी प्रीतम सिंह के खिलाफ मैदान में उतारा था। भले ही नौटियाल चुनाव हार गए, लेकिन उन्होंने प्रीतम सिंह को कड़ी टक्कर दी थी। दोस्तो अब जबकि 2027 का चुनाव नजदीक है, रामशरण नौटियाल का बीजेपी से बाहर होना और मुन्ना सिंह चौहान के साथ यह सार्वजनिक तल्खी सीधे-सीधे जौनसार क्षेत्र में बीजेपी के चुनावी समीकरणों को ध्वस्त कर सकती है। नौटियाल के समर्थक इस इलाके में अच्छी-खासी तादाद में हैं। अगर ये गुटबाजी ऐसे ही सड़क पर दिखी, तो चकराता तो दूर, मुन्ना सिंह चौहान की अपनी सीट विकासनगर पर भी इसका गहरा और आत्मघाती असर पड़ सकता है।
दोस्तो राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी के लिए यह अंदरूनी बगावत किसी बड़े झटके से कम नहीं है। चर्चाएं गर्म हैं कि रामशरण नौटियाल आने वाले दिनों में घर वापसी यानी कांग्रेस का हाथ थाम सकते हैं, या फिर किसी नए सियासी विकल्प के साथ मुन्ना सिंह चौहान के सामने सीधे मोर्चा खोल सकते हैं। अगर दोस्तो नौटियाल कांग्रेस में जाते हैं, तो जौनसार-बावर क्षेत्र में कांग्रेस और भी ज्यादा मजबूत हो जाएगी, जिसका सीधा नुकसान बीजेपी को उठाना पड़ेगा। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट भले ही इस डैमेज कंट्रोल में जुटे हों, लेकिन सार्वजनिक मंचों पर नेताओं का यह व्यवहार साफ कर रहा है कि यह आग अब बुझने वाली नहीं है.. दोस्तो खेल के मैदान पर शुरू हुआ यह बिना हाथ मिलाए गुजर जाने का सिलसिला, आने वाले दिनों में उत्तराखंड की राजनीति का सबसे बड़ा दंगल बनने जा रहा है। अब देखना यह होगा कि रामशरण नौटियाल का अगला कदम क्या होता है और बीजेपी इस अंदरूनी कलह से खुद को कैसे बचा पाती है.. दोस्तो सियासत में न तो कोई स्थाई दोस्त होता है और न ही स्थाई दुश्मन, लेकिन जब सार्वजनिक मंच पर कड़वाहट इस कदर नुमाया होने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि पानी सिर से ऊपर जा चुका है। मुन्ना सिंह चौहान का हाथ न मिलाना सिर्फ एक व्यक्तिगत नाराजगी नहीं, बल्कि जौनसार-बावर की राजनीति में एक नए युद्ध की शुरुआत है, जिसका असर 2027 के चुनाव परिणामों में साफ दिखेगा।