Congress पार्टी लाइन ध्वस्त ‘अब रुकना नहीं है’!| Harish Rawat | 2027Election | Uttarakhand News

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दोस्तों, उत्तराखंड कांग्रेस में ऐसा सियासी संग्राम छिड़ा है कि हाईकमान से लेकर हरीश रावत तक आमने-सामने नजर आ रहे हैं!कुमारी शैलजा की फटकार के बाद हरीश रावत का पलटवार, NSUI के 5 पदाधिकारी सस्पेंड, और अब सवाल—क्या ‘अब रुकना नहीं है’ वाली जिद कांग्रेस में किसी बड़े खेल का संकेत है?क्या देवभूमि कांग्रेस में बगावत की चिंगारी अब महाब्लास्ट बनने वाली है? दोस्तो देवभूमि उत्तराखंड की सियासत विस्फोटक खबर है! उत्तराखंड कांग्रेस में इस समय ‘ऑल इज नॉट वेल’ नहीं, बल्कि ‘ऑल इज वेल’ की धज्जियां उड़ चुकी हैं। एक तरफ पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत हैं, जो अपनी ही पार्टी के भीतर समानांतर सरकार और समानांतर संगठन चलाने की जिद पर अड़े हैं। उनकी ‘जनसंवाद यात्रा’ धुआंधार चल रही है। नारा दिया है— ‘अब रुकना नहीं है।’ लेकिन दोस्तो  दूसरी तरफ कांग्रेस हाईकमान का हंटर चल गया है! प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा की आपत्ति के बाद हरीश रावत को दिल्ली तलब कर लिया गया है, तो वहीं रावत गुट के 5 बड़े NSUI पदाधिकारियों को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया है! आखिर उत्तराखंड कांग्रेस में चल क्या रहा है? क्या हरीश रावत वाकई पार्टी के लिए अब सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुके हैं?  दोस्तो गौर कीजिएगा, ये सावल इस लिए हैं क्योंकि उत्तराखंड कांग्रेस में इस समय अंदरूनी कलह का वो ज्वालामुखी फट चुका है, जिसकी आंच दिल्ली तक पहुंच गई है। ये कोई सामान्य खींचतान नहीं, बल्कि सीधे-सीधे वर्चस्व की वो जंग है जिसने पार्टी को दो फाड़ कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता हरीश रावत ने पार्टी लाइन को ठेंगा दिखाते हुए अपनी ‘जनसंवाद यात्रा’ शुरू की, नारा दिया- ‘अब रुकना नहीं है।’ लेकिन जैसे ही रावत की गाड़ी आगे बढ़ी, दिल्ली से हाईकमान का ऐसा ब्रेक लगा कि उत्तराखंड की राजनीति में हड़कंप मच गया! तो सवाल ये भी कि चल क्या रहा है उत्तराखंड कांग्रेस में?

इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि हरीश रावत की इस यात्रा को हवा दे रहे NSUI के 5 बड़े पदाधिकारियों को प्रदेश संगठन ने तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया। आरोप लगा- अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियां, लेकिन सियासी गलियारों में चर्चा आम है कि ये सस्पेंशन हरीश रावत के पर कतरने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। दोस्तो प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा और कांग्रेस के गुट को साफ संदेश देना था कि पार्टी के समानांतर कोई भी यात्रा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मगर हरीश रावत के समर्थकों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। वो पूछ रहे हैं कि जनता के बीच जाना अगर गुनाह है, तो फिर कांग्रेस चुनाव कैसे लड़ेगी? दोस्तो अब सबसे बड़ा और तीखा सवाल— क्या हरीश रावत उत्तराखंड में कांग्रेस के लिए ‘सिरदर्द’ बनते जा रहे हैं? राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो ये पहली बार नहीं है। जब-जब उत्तराखंड में कांग्रेस को एकजुट होकर सरकार के खिलाफ खड़ा होना होता है, तब-तब हरीश रावत अपनी एक अलग डफली और अलग राग लेकर बैठ जाते हैं। दोस्तो याद कीजिए, 2022 के विधानसभा चुनाव में ‘मुख्यमंत्री का चेहरा कौन’ की लड़ाई हो, या फिर हाल ही में संगठन के फैसलों पर सार्वजनिक रूप से अपनी ही पार्टी को कटघरे में खड़ा करना। रावत का यह ‘एकला चलो रे’ का अंदाज अब आलाकमान को चुभने लगा है। यही वजह है कि कुमारी शैलजा की तीखी रिपोर्ट के बाद हाईकमान ने उन्हें बिना वक्त गंवाए सीधे दिल्ली तलब कर लिया है। दोस्तो पार्टी लाइन कहती है कि कोई भी कार्यक्रम, कोई भी यात्रा प्रदेश संगठन की अनुमति और बैनर तले होनी चाहिए। लेकिन हरीश रावत अब उस मोड़ पर आ चुके हैं जहां वो किसी लक्ष्मण रेखा को मानने को तैयार नहीं हैं। उनके करीबियों का कहना है कि जब नारा ही है ‘अब रुकना नहीं है’, तो हरीश रावत दिल्ली के बुलावे के बाद भी झुकने वाले नहीं हैं। रावत का यह तेवर साफ कर रहा है कि वो अपनी शर्तों पर राजनीति करेंगे, चाहे इसके लिए पार्टी के भीतर कितनी ही बड़ी रार क्यों न हो जाए। दोस्तो क्या है खुल्लम खुल्ला बगावत है अगर हां तो फिर ये आग अब बुझने वाली नहीं है। एक तरफ 5 युवा नेताओं का सस्पेंशन है, दूसरी तरफ दिल्ली की बंद कमरों में हरीश रावत से होने वाली पूछताछ। देखना दिलचस्प होगा कि दिल्ली दरबार में हरीश रावत के तेवर ठंडे पड़ते हैं या फिर देवभूमि की वादियों में कांग्रेस की अंदरूनी कलह की ये चिंगारी पूरी पार्टी को भस्म कर देती है।तो कुल मिलाकर कहानी साफ है। उत्तराखंड कांग्रेस में ‘ऑल इज वेल’ का मुखौटा पूरी तरह उतर चुका है। हरीश रावत ने ‘अब रुकना नहीं है’ कहकर हाईकमान को सीधी चुनौती दी है, तो आलाकमान ने भी 5 नियुक्तियों को सस्पेंड करके बता दिया है कि अनुशासन सर्वोपरि है। क्या हरीश रावत इस बार बैकफुट पर आएंगे, या उत्तराखंड कांग्रेस में कोई नया धड़ा जन्म लेने वाला है?