दोस्तो, केदारनाथ जाने वाला ये रास्ता आखिर इतना खतरनाक क्यों बन गया है?चीरबासा में आसमान से बरसते पत्थर और खतरे में हजारों यात्रियों की जान!इसी महीने हादसों में जानें गईं, फिर आधी रात चला बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन!आखिर चीरबासा में बार-बार क्यों टूट रहा पहाड़?क्या मौसम विभाग का अलर्ट तीर्थयात्रियों के लिए बड़ा खतरा लेकर आया है? दोस्तो गौरीकुंड से केदारनाथ जाने वाला पैदल मार्ग इस समय हादसों का गवाह बनता जा रहा है, और सबसे बड़ा डेंजर जोन बनकर उभरा है— चीरबासा हेलीपैड का इलाका। मानसून की विदाई के वक्त हो रही भारी बारिश के कारण चीरबासा में ऊपर से लगातार मौत बनकर पत्थर और बोल्डर बरस रहे हैं। हालात इस कदर खतरनाक हो चुके हैं कि अकेले इस महीने (सितंबर 2026) में ही यहां दो मासूम जिंदगियां काल के गाल में समा चुकी हैं। हाल ही में रविवार को उत्तर प्रदेश के एक 5 साल के लोग की यहां पत्थर लगने से जान जा चुकी है। दोस्तो बाबा केदारनाथ की भक्ति में लीन होकर पहाड़ों की चढ़ाई कर रहे श्रद्धालुओं के लिए ‘चीरबासा’ का करीब 150 मीटर का यह स्ट्रेच इस वक्त खौफ का दूसरा नाम बन चुका है। इस इलाके में पहाड़ों से अचानक गिरने वाले बोल्डर और मलबे ने यात्रा मार्ग पर दहशत फैला दी है। बीते रविवार की शाम ठीक 4:30 बजे चीरबासा हेलीपैड के पास एक ऐसा ही दिल दहला देने वाला वाकया हुआ, जहां उत्तर प्रदेश के एटा से अपने माता-पिता के साथ आए महज 5 साल के मासूम बच्चे यश के सिर पर सीधे पहाड़ी से गिरा पत्थर लगा। दोस्तो चीरबासा क्षेत्र में हादसों का यह तांडव नया नहीं है। इसी महीने 13 सितंबर को भी चीरबासा हेलीपैड के पास ही पहाड़ी से गिरे विशाल बोल्डर की चपेट में आने से एक स्थानीय व्यक्ति ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था। यानी महज दो हफ्तों के भीतर इस छोटे से टुकड़े पर दो लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
दोस्तो भूवैज्ञानिकों और स्थानीय जानकारों की मानें तो चीरबासा का यह इलाका बेहद ढीली मिट्टी और कमजोर चट्टानों से बना है। मानसून की लगातार बारिश के कारण ये चट्टानें भीतर से खोखली हो रही हैं। रास्ता इतना संकरा है और एक तरफ गहरी खाई है कि ऊपर से गिरते पत्थरों को देखकर भी यात्रियों को भागने या छिपने का मौका तक नहीं मिल पाता। दोस्तो 27 सितंबर की रात को हुए भूस्खलन के बाद जब रास्ते का एक बड़ा हिस्सा मलबे की चपेट में आ गया, तो वहां अफरा-तफरी मच गई। सैकड़ों यात्री दोनों छोर पर फंस गए। इसके बाद जिला प्रशासन, SDRF, NDRF और DDRF की संयुक्त टीमों ने पूरी रात जान हथेली पर रखकर एक बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। मलबे और लगातार गिरते पत्थरों के बीच से करीब 1,500 से अधिक यात्रियों को सुरक्षित निकालकर गौरीकुंड पहुंचाया गया। वहीं, अगले दिन मंगलवार तक सुरक्षाबलों की निगरानी में कुल मिलाकर 9,000 से अधिक श्रद्धालुओं को इस खतरनाक जोन से सुरक्षित निकाला जा चुका है। दोस्तो अब बात करते हैं ग्राउंड जीरो से आ रहे सबसे ताजा अपडेट की। पिछले दो-तीन दिनों से बंद पड़े इस पैदल मार्ग को प्रशासन और PWD की टीमों ने युद्धस्तर पर मलबा साफ कर पूर्ण रूप से बहाल कर दिया है। मार्ग सुचारू होते ही सोनप्रयाग, गौरीकुंड और अन्य पड़ावों पर रोके गए लगभग 10 हजार से अधिक तीर्थयात्रियों को केदारनाथ धाम की ओर रवाना कर दिया गया है। हालांकि, खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है।
आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार के अनुसार, सुरक्षा के मद्देनजर चीरबासा स्लाइडिंग जोन में SDRF की टीमें तैनात की गई हैं, जो यात्रियों को पैनी नजर रखते हुए रुक-रुक कर सुरक्षित तरीके से रास्ता पार करवा रही हैं। दोस्तो मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के लिए भी पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अगर फिर से पत्थर गिरते हैं, तो यात्रा को तुरंत रोका जा सकता है। इसलिए सभी श्रद्धालुओं से अपील की जा रही है कि वे मौसम का मिजाज देखकर और प्रशासन की गाइडलाइंस का पालन करते हुए ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं, क्योंकि आस्था के इस सफर में आपकी सुरक्षा ही सबसे पहला नियम है। दोस्तो केदारनाथ पैदल मार्ग के चीरबासा और अन्य संवेदनशील इलाकों पर हमारी टीम पल-पल की रिपोर्ट आप तक पहुंचा रही है।