पहाड़ पर अचानक ऐसा क्या हुआ कि थम गई जिंदगी?कैंची धाम में आस्था का सैलाब उमड़ा, तो भवाली से खैरना तक सड़कें क्यों बन गईं पार्किंग?लंबा वीकेंड, कैंची धाम की भारी भीड़ और क्या फिल्मी क्रेज ने बढ़ा दिया पहाड़ का ट्रैफिक टेंशन?हालात ये कि दर्शन के लिए कतारें लगीं, सड़कों पर किलोमीटरों लंबा जाम लगा और हल्द्वानी-काठगोदाम जाने वाले कुछ यात्रियों की ट्रेनें तक छूट गईं! आखिर नीम करौली बाबा के दर पर उमड़ी ये भीड़ अपने साथ आस्था लेकर आई या पहाड़ के लिए आफत बन गई? दोस्तो इस वक्त उत्तराखंड के पहाड़ों से एक बहुत बड़ी और चिंताजनक खबर आ रही है। नीम करौली बाबा के दर पर आस्था का ऐसा ‘महा-विस्फोट’ हुआ है कि पूरा नैनीताल जिला घुटनों पर आ गया है। शनिवार की सुबह होते-होते कैंची धाम में हजारों नहीं, बल्कि लाख की तादाद में श्रद्धालु उमड़ पड़े हैं। हालात इस कदर बेकाबू हो चुके हैं कि भवाली से लेकर कैंची धाम, गरमपानी और खैरना तक कई किलोमीटर लंबा खौफनाक महाजाम लग चुका है। हैरानी की बात देखिए, बाबा के दर्शन की चाह में लोग सड़कों पर ऐसे फंसे हैं कि हल्द्वानी और काठगोदाम पहुंचने वाले यात्रियों की ट्रेनें तक छूट गई हैं! आखिर क्यों शनिवार की एक सुबह पहाड़ के लिए महा-मुसीबत बन गई? क्या है इस अंधाधुंध भीड़ का ‘फिल्मी कनेक्शन’? दोस्तो शनिवार की सुबह और देवभूमि की वादियों में मच गया हाहाकार! यह आस्था का सैलाब है या फिर पहाड़ों पर आया गाड़ियों का कोई सैलाब? तस्वीरें उत्तराखंड के भवाली-अल्मोड़ा हाईवे की हैं, जहां पैर रखने तक की जगह नहीं बची है।
नीम करौली बाबा के विश्व प्रसिद्ध कैंची धाम में आज सुबह कुछ ऐसा नज़ारा दिखा, जिसने प्रशासन की तैयारियों को ताश के पत्तों की तरह बिखेर कर रख दिया है। सुबह की पहली किरण के साथ ही हजारों-लाखों श्रद्धालु आश्रम की तरफ दौड़ पड़े। नतीजा? भवाली से लेकर कैंची धाम तक पूरा हाईवे एक बहुत बड़े पार्किंग लॉट में तब्दील हो गया! दोस्तो यहां सवाल है कि अचानक एक ही दिन में इतनी भारी भीड़ कहां से आ गई? तो जवाब है—’लॉन्ग वीकेंड’ यानी छुट्टियों का वो कॉम्बिनेशन, जो दिल्ली-एनसीआर और मैदानी इलाकों के कॉर्पोरेट जगत के लिए पहाड़ भागने का बहाना बन जाता है। शुक्रवार रात से ही दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और लखनऊ से गाड़ियों का काफिला पहाड़ की तरफ मुड़ गया। हर कोई बाबा नीम करौली के दर पर हाजिरी लगाना चाहता था, लेकिन बिना किसी प्लानिंग और बिना किसी पुख्ता तैयारी के उमड़ी इस भीड़ ने खुद श्रद्धालुओं के लिए ही इस वीकेंड को ‘सजा’ बना दिया है, लेकिन दोस्तो बात सिर्फ छुट्टियों की नहीं है। इस महा-सैलाब के पीछे है वो ‘फिल्मी और सेलिब्रिटी क्रेज’ जिसने कैंची धाम को सोशल मीडिया का सबसे बड़ा ट्रेंड बना दिया है। हॉलीवुड से लेकर बॉलीवुड तक, और खेल जगत से लेकर टेक कंपनियों के दिग्गजों तक, जब-जब बड़े सितारों ने बाबा के दर पर मत्था टेका, तब-तब सोशल मीडिया पर रील्स और व्लॉग्स की बाढ़ आ गई।
आज हर कोई सिर्फ दर्शन के लिए नहीं, बल्कि रील्स बनाने और दुनिया को दिखाने के लिए भी कैंची धाम की तरफ भाग रहा है। इसी ‘अनुमान अंश’ और फिल्मी ग्लैमर ने बाबा के शांत धाम को आज इस कदर भीड़ से भर दिया है कि वहां आस्था से ज्यादा हुजूम दिखाई दे रहा है। दोस्तो इस अंधाधुंध भीड़ का सबसे दर्दनाक पहलू देखिए। इस महाजाम का असर सिर्फ कैंची धाम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह गरमपानी और खैरना तक फैल गया। हालात इतने बदतर हो गए कि जो स्थानीय लोग या सैलानी हल्द्वानी और काठगोदाम रेलवे स्टेशन जा रहे थे, वे घंटों जाम में फंसे रह गए। नतीजा यह हुआ कि कई परिवारों की ट्रेनें छूट गईं! बच्चे बिलखते रहे, बुजुर्ग परेशान होते रहे, लेकिन गाड़ियों का चक्का टस से मस नहीं हुआ। आस्था के इस अनियंत्रित उत्सव ने आम जनता की जिंदगी को दांव पर लगा दिया है। दोस्तो जब मालूम था कि वीकेंड लंबा है, जब पता था कि सोशल मीडिया के दौर में कैंची धाम में हर शनिवार भीड़ का रिकॉर्ड टूटता है, तो फिर उत्तराखंड का ट्रैफिक और जिला प्रशासन हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठा रहा? क्यों पहले से रूट डायवर्जन या गाड़ियों की संख्या को नियंत्रित नहीं किया गया? आस्था के नाम पर सैलानियों का यह हुजूम और लचर प्रशासनिक व्यवस्था कब तक पहाड़ों की लाइफलाइन को ऐसे ही जाम करती रहेगी? यह एक बड़ा और गंभीर सवाल है।