Nainital DSB Campus बेटे के लिए मां बनीं छात्र! आखिर क्यों? | Student Election | Uttarakhand News

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दोस्तो, बेटे को चुनाव जिताने के लिए एक मां ने वो कर दिखाया, जिसकी किसी ने कल्पना तक नहीं की थी!बीए, डबल एमए और एलएलबी के बाद मां ने फिर कॉलेज में क्यों लिया एडमिशन? हल्द्वानी की पार्षद बीना चौहान अब DSB परिसर में बनीं छात्र। आखिर बेटे की जीत के लिए मां ने क्यों बदली अपनी पहचान?क्या मां का ये अनोखा दांव बेटे के चुनावी अभियान को नई ताकत देगा?और कॉलेज कैंपस में उनके पहुंचते ही क्यों होने लगी इसकी चर्चा? दोस्तो आपने अमूमन आपने देखा होगा कि जब बच्चे कॉलेज जाते हैं, तो माता-पिता उन्हें घर से विदा करते हैं और उनकी कामयाबी की दुआ करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि एक मां ने अपने बेटे के सपनों को उड़ान देने के लिए, उसका चुनाव प्रचार करने के लिए खुद उसी के कॉलेज में दाखिला ले लिया हो? जी हां, ऐसा अनोखा मामला सामने आया है उत्तराखंड के खूबसूरत शहर नैनीताल के प्रसिद्ध डीएसबी परिसर से। जहां छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद के प्रत्याशी भानु प्रताप सिंह चौहान की मां बीना चौहान इन दिनों पूरे कैंपस में टॉक ऑफ द टाउन बनी हुई हैं। हल्द्वानी नगर निगम की पार्षद बीना चौहान ने बेटे के समर्थन में वोट मांगने और उसकी हिम्मत बढ़ाने के लिए खुद इसी कॉलेज के एमए राजनीति विज्ञान में एडमिशन ले लिया है। दोस्तो कहते हैं कि मां का साया जब तक साथ हो, दुनिया की कोई भी चुनौती बड़ी नहीं लगती। नैनीताल के प्रतिष्ठित कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर में इन दिनों छात्रसंघ चुनाव का रोमांच चरम रहा। वैसे तो यहां कई प्रत्याशी मैदान में थे, लेकिन अध्यक्ष पद के दावेदार भानु प्रताप सिंह चौहान के चुनाव प्रचार में एक ऐसा चेहरा जुड़ गया है, जिसने पूरे उत्तराखंड का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यह चेहरा कोई और नहीं, बल्कि खुद भानु प्रताप की मां बीना चौहान का है, जो अब सिर्फ एक मां नहीं, बल्कि इसी कॉलेज की एक नई छात्र भी बन चुकी हैं।

दोस्तो बीना चौहान कोई आम घरेलू महिला नहीं हैं, वह राजनीतिक और सामाजिक रूप से बेहद सक्रिय हैं। वर्तमान में वह हल्द्वानी नगर निगम के वार्ड नंबर 10 से लोकप्रिय पार्षद हैं। जब उनके बेटे भानु प्रताप ने डीएसबी परिसर से छात्रसंघ अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने की इच्छा जताई, तो एक मां के तौर पर बीना ने केवल उसे आशीर्वाद नहीं दिया, बल्कि उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने का फैसला किया। उन्होंने इसके लिए बाकायदा नियम के तहत डीएसबी परिसर के एमए राजनीति विज्ञान (Political Science) में दाखिला ले लिया। दोस्तो दिलचस्प बात यह है कि बीना चौहान पढ़ाई के मामले में पहले से ही बेहद समृद्ध हैं। वह पहले ही बीए (BA), डबल एमए (Double MA) और एलएलबी (LLB) की पढ़ाई पूरी कर चुकी हैं। कानून की समझ रखने वाली और राजनीति में सक्रिय बीना अब एक बार फिर छात्र बनकर कैंपस की राजनीति को करीब से समझने उतरी हैं। दोस्तो इतजा ये हुआ की बेटी की अध्यक्ष पद पर जीत। दोस्तो इस जीत पर बीना चौहान का साफ कहना है कि हर माता-पिता का यह फर्ज और इच्छा होती है कि उनके बच्चों के सपने पूरे हों। उनके इस अनोखे कदम की जानकारी जब कॉलेज के आम छात्र-छात्राओं को मिल रही है, तो वे भी हैरान और प्रभावित हैं। कैंपस के छात्रों का कहना है कि उन्होंने आज तक ऐसी ‘कूल’ और सपोर्टिव मां नहीं देखी। यही वजह है कि कॉलेज के युवा छात्र अब भानु प्रताप के साथ-साथ उनकी मां के इस जज्बे को सलाम कर रहे हैं और भारी संख्या में भानु के समर्थन में आगे आ रहे हैं।

बीना का कहना है कि वह एडमिशन लेने के बाद सिर्फ चुनाव प्रचार नहीं करेंगी, बल्कि अपनी पढ़ाई को भी पूरी गंभीरता से जारी रखेंगी। दोस्तो बीना चौहान के कॉलेज में प्रवेश लेने के बाद पूरे डीएसबी परिसर का चुनावी समीकरण बेहद दिलचस्प हो गया है। विरोधियों के पास भी इस अनोखी रणनीति का कोई तोड़ नजर नहीं आ रहा है। एक तरफ जहां छात्र राजनीति में बाहुबल और धनबल की चर्चा होती है, वहीं नैनीताल के इस कैंपस में ‘ममता के बल’ की गूंज सुनाई दे रही है। बेटे के सपनों को पूरा करने की यह जिद अब कॉलेज के युवाओं के बीच एक बड़ा प्रेरणा स्रोत बन गई है। दोस्तो छात्रसंघ चुनाव में जीत किसकी होगी, यह तो आने वाला वक्त और छात्रों के वोट तय करेंगे। लेकिन बीना चौहान ने यह साबित कर दिया है कि एक मां अपने बच्चों की ढाल और उनकी सबसे बड़ी ताकत बनने के लिए उम्र और समाज की बंदिशों को पल भर में तोड़ सकती है। भानु प्रताप के सिर पर छात्रसंघ अध्यक्ष का ताज सजेगा या नहीं, यह देखना दिलचस्प होगा, लेकिन उनकी मां ने पहले ही कैंपस के हजारों छात्रों का दिल जीत लिया है। दोस्तो वाकई, ममता की यह कहानी बेहद खूबसूरत और अनोखी है।