HC में खुले Ankita Bhandari केस के कई राज? | Justice For Ankita | VIP Controversy | Uttarakhand News

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दोस्तो देवभूमि उत्तराखंड की वो बेटी, जिसके न्याय के लिए पूरा देश सड़कों पर रोया, तड़पा और चिल्लाया। आज दो साल से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन यक्ष प्रश्न आज भी वहीं खड़ा है कि आखिर वो ‘VIP’ कौन था? वो कौन सा रसूखदार सफेदपोश था, जिसे ‘स्पेशल सर्विस’ देने से इनकार करने पर अंकिता को नहर में धकेल दिया गया? कोर्ट में क्या हुआ और वीआईपी को लेकर वो कौन सा राज है जो अब पूरी तरीके से बेपर्दा हो चुका है बताऊंगा आपको पूरी खब। दोस्तो मै इस खबर की शुरुआत करूं उससे पहले आप देखिए अंकिता भंडारी के चले जाने के बाद भी परिवार आज भी कैसे खून के आंसू रो रहा है और आरोपों झड़ी सी लगा रहा है।दोस्तो सुना आपने एक तरफ कोर्ट में सुनवाई दूसरी तरफ ये तस्वीर और सवाल एक माँ का सबसे बड़ा दर्द आखिर कौन समझेगा?जिस बेटी को जन्म दिया। उसी बेटी के शव को आखिरी बार देखने तक का हक नहीं मिला। रातों-रात अंतिम संस्कार कर दिया गया और आज भी ये सवाल माँ के दिल में जिंदा है—क्या सबूत मिटाने की कोशिश हुई? ये सब बाते अब कोर्ट में हो रही हैं। लेकिन दोस्तो एक और तस्वीर है वो कि जब एक लाचार पिता की आंख के आंसू जब अंगारे बनते हैं, तो सत्ता के बड़े-बड़े सिंहासन डोलने लगते हैं।

अंकिता भंडारी के पिता ने एक बार फिर उस नाम को सरेआम उछाल दिया है, जिसे सुनने के बाद पूरा सिस्टम डिफेंसिव मोड में आ जाता है। अंकिता भंडारी के पिता का साफ आरोप है कि रिसॉर्ट का वो वीआईपी, जिसके लिए उनकी मासूम बेटी पर दबाव बनाया गया, वो कोई और नहीं बल्कि बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत कुमार गौतम हैं! यह कोई मामूली आरोप नहीं है। यह उस सिस्टम के मुंह पर तमाचा है जो शुरुआत से ही कह रहा था कि इस केस में कोई वीआईपी एंगल है ही नहीं, लेकिन पिता आज भी अड़े हैं, उत्तराखंड की जनता आज भी अड़ी है कि जब तक उस रसूखदार चेहरे को सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाता, तब तक अंकिता की आत्मा को शांति नहीं मिलेगी। दो दोस्तो एक तरफ अंकिता मामले की आग अभी ठंडी नहीं हुई। लेकिन इस देश में वीआईपी होना किसी सुरक्षा कवच से कम नहीं है। जैसे ही सोशल मीडिया पर दुष्यंत गौतम का नाम अंकिता केस से जुड़ा, पूरा अमला एक्टिव हो गया। आनन-फानन में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया और नतीजा? दिल्ली हाईकोर्ट ने आदेश जारी कर दिया कि कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और विपक्ष के नेता 24 घंटे के भीतर वो सारे वीडियो और पोस्ट हटाएं, जिनमें दुष्यंत गौतम को वीआईपी बताया गया है वाह साहब! इस देश में एक रसूखदार नेता की प्रतिष्ठा इतनी कीमती हो गई कि उसके लिए कोर्ट आधी रात को आदेश दे देता है, लेकिन उस बेटी की प्रतिष्ठा और जान की कीमत क्या थी, जिसे सिर्फ इसलिए मार दिया गया क्योंकि उसने एक वीआईपी के आगे झुकने से मना कर दिया था? क्या ये न्याय की अंधी व्यवस्था नहीं है? अब इस पूरे मामले की नजरें उत्तराखंड हाईकोर्ट पर टिकी हैं। और हाईकर्ट में सुनवाई भी हो रही है।

दोस्तो अब तक ये मामला परिवार के मुताबिक रती भर भी जांच के मामले में आगे नहीं बढ़ा है और इधर कोर्ट में सिस्टम इस बात की पैरवी को हल्का कर रहा है कि जो अंकिता के गुनहगार हैं उनको जमानत मिल जाए, लेकिन दोस्तो अब आगामी 18 अगस्त को पुलकित आर्य और उसके पाप के साथियों की जमानत और सजा निलंबन याचिका पर सुनवाई होनी है। जरा आरोपियों की ढीटता देखिए! जेल की सलाखों के पीछे बंद ये हत्यारे अब दलील दे रहे हैं कि इन्हें साजिश के तहत फंसाया गया है। इनके वकील कह रहे हैं कि व्हाट्सऐप चैट फर्जी है। लेकिन ये हत्यारे भूल रहे हैं कि देवभूमि का एक-एक नागरिक इस केस पर नजर गड़ाए बैठा है। 18 अगस्त की तारीख सिर्फ एक कानूनी सुनवाई नहीं है, बल्कि यह इम्तिहान है उत्तराखंड की न्याय व्यवस्था का भी क्या कोर्ट इन रसूखदार हत्यारों को राहत देगा, या फिर अंकिता के माता-पिता की उम्मीदों को जिंदा रखेगा? , तो क्या 18 अगस्त को हाईकोर्ट इन दरिंदों की दलीलों को खारिज करेगा? और क्या अंकिता के पिता को उस वीआईपी के खिलाफ कभी ठोस इंसाफ मिल पाएगा? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।