दोस्तो क्या आपने कभी सोचा है कि देवभूमि ऋषिकेश की शांत वादियों में, गंगा के पावन तट पर, वसूली का एक ऐसा खौफनाक सिंडिकेट चल रहा था, जिसका नाम सुनते ही बड़े-बड़े व्यापारी थर-थर कांप उठते थे? एक ऐसा खेल, जहां विकास के नाम पर आने वाले हर पैसे में से ‘गुंडा टैक्स’ वसूला जा रहा था! लेकिन इस बार पाप का घड़ा ऐसा फूटा कि खुद सत्ताधारी पार्टी को अपने ही दो बड़े मगरमच्छों की बलि चढ़ानी पड़ गई! कैसे ऋषिकेश में भारी हंगामें के बाद हुआ रंगा-बिल्ला’ का खौफनाक पर्दाफाश! दोस्तो आज में एक बार बात फिर कर रहा हूं। ऋषिकेश के उस ‘रंगा-बिल्ला’ कांड की, जिसने उत्तराखंड की सियासत में भूचाल ला दिया। आखिर कौन हैं ये रंगा-बिल्ला? कैसे एक AI पोस्टर ने सत्ता के गलियारों में हड़कंप मचा दिया? और क्यों आधी रात को ऋषिकेश कोतवाली को छावनी में बदलना पड़ा? अगले 5 से 6 मिनट में देखिए, देवभूमि को शर्मसार करने वाले इस महा-वसूली कांड का पूरा सच। हाल में तीर्थनगरी ऋषिकेस में लगे कुछ पोस्टर ने बड़े-बड़े सूरमाओं की नींद उड़ा दी। शहर के चौराहों पर रातों-रात ऐसे पोस्टर लग गए जिन पर लिखा था—’रंगा-बिल्ला’। आरोप सीधा था कि ऋषिकेश में चल रहे निर्माण कार्यों, ठेकेदारों और स्थानीय व्यापारियों से मोटी रकम की अवैध वसूली की जा रही है। जो पैसा जनता की सहूलियत के लिए कंक्रीट और सड़कों में लगना था, वो पैसा कुछ रसूखदारों की जेबों में जा रहा था। इस पोस्टर ने वो काम कर दिया जो महीनों से दबी फाइलें नहीं कर पाईं। पूरे शहर में कानाफूसी शुरू हो गई कि आखिर ये ‘रंगा-बिल्ला’ हैं कौन, जो सरकार की नाक के नीचे समानांतर सरकार चला रहे हैं? और दोस्तो जब पानी सिर से ऊपर चला गया और बदनामी के छींटे सीधे सरकार के दामन पर पड़ने लगे, तो बीजेपी को वो कदम उठाना पड़ा जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी।
इस पूरे वसूली रैकेट के तार सीधे सत्ताधारी दल के रसूखदार नेताओं से जुड़े पाए गए। चौतरफा दबाव के बाद बीजेपी ने एक झटके में अपने दो बड़े चेहरों को पदमुक्त कर दिया! युवा मोर्चा के जिला कार्यालय मंत्री अभिनव पाल और वीरभद्र मंडल अध्यक्ष रणजीत सिंह को पार्टी ने उनके पदों से सस्पेंड कर बाहर का रास्ता दिखा दिया। दोस्तो यह कार्रवाई इस बात की गवाह है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी की पूरी दाल ही काली थी! जो नेता कल तक मंचों पर बैठकर ईमानदारी की कसमें खाते थे, आज उन पर गुंडा टैक्स और रंगदारी वसूलने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। दोस्तो लेकिन कहानी में ट्विस्ट अभी बाकी है। इस पूरे महा-वसूली कांड का भंडाफोड़ करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता और शिरोमणि अकाली दल के नगर अध्यक्ष जगजीत सिंह उर्फ जग्गा के साथ सिस्टम ने क्या किया? उल्टा चोर कोतवाल को डांटे! जग्गा ने जब भ्रष्टाचारियों को बेनकाब किया, तो पुलिस ने रसूखदारों के इशारे पर जग्गा के खिलाफ ही मुकदमों की झड़ी लगा दी.. इसके बाद जो हुआ, उसने ऋषिकेश पुलिस की साख को तार-तार कर दिया। भारी संख्या में जनता सड़कों पर उतर आई और ऋषिकेश कोतवाली का घेराव कर दिया। ढाई घंटे तक कोतवाली परिसर जयकारों और नारों से गूंजता रहा। जनता का एक ही सवाल था—वसूली करने वाले खुलेआम घूम रहे हैं और सच दिखाने वाले को जेल भेजने की तैयारी है? यह कैसा इंसाफ है?
दोस्तो कोतवाली प्रभारी यशपाल सिंह बिष्ट ने भारी हंगामे के बाद निष्पक्ष जांच का भरोसा तो दिया है, और कहा है कि दोषी चाहे कितना भी रसूखदार हो, बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन सवाल ये है कि क्या वाकई इन सफेदपोश ‘रंगा-बिल्ला’ को उनके किए की सजा मिलेगी? बीजेपी ने नेताओं को पद से हटाकर अपनी साख बचाने की कोशिश तो की है, लेकिन देवभूमि की जनता अब सिर्फ कागजी कार्रवाई से शांत होने वाली नहीं है। जब तक इन रंगदारों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाता, तब तक यह आक्रोश थमेगा नहीं। ऋषिकेश का यह बवाल एक चेतावनी है हर उस भ्रष्टाचारी के लिए, जो सोचता है कि सत्ता की आड़ में वो जनता की गाढ़ी कमाई को लूट लेगा। तो क्या ऋषिकेश पुलिस वाकई इन सफेदपोशों पर शिकंजा कसेगी या फिर जांच के नाम पर इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा? आपकी इस पर क्या राय है, हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।