Dehradun महिला के Video से मचा हड़कंप! | Working Women | Corporate Controversy | Uttarakhand News

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दोस्तो ये खबर प्रदेश की राजधानी देहरादून से है जहा एक वर्किंग वुमन का सबसे बड़ा महा-शोषण हो गया। इस्तीफा देते ही बदल गई कंपनी, 3 साल तक बहाया खून-पसीना। खुद का बिज़नेस शुरू करने की मिली खौफनाक सजा! पीड़ित महिला का वो वायरल वीडियो, जिसने बड़ी कंपनी के क्रूर चेहरे को बेनकाब करके हम सबने के सामने ला दिया। मै आपको बताऊंगा पूरी खबर कैसे महिला के वायरल वीडियो से मचा हड़कंप। दोस्तो उत्तराखंड के देहरादून शहर में एक महिला एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में पिछले करीब 2–3 साल से काम कर रही थी। अब वह अपना खुद का बिजनेस शुरू करना चाहती है, इसलिए कंपनी से रिजाइन देने पहुंची। दोस्तो आरोप है कि रिजाइन देने के बाद कंपनी ने उसकी बकाया सैलरी का भुगतान नहीं किया और उल्टा उस पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं, हद है। दोस्तो वीडियो और आरोप देख कर कई सवाल है, क्या देवभूमि के देहरादून जैसे बड़े शहरों में मेहनत के दम पर आत्मनिर्भर बनने की ख्वाहिश रखने वाली हमारी बेटियों को कॉरपोरेट दलदल के इस क्रूर और घिनौने शोषण का शिकार होना पड़ेगा? एक महिला जो पिछले करीब 3 साल से एक कंस्ट्रक्शन कंपनी की तरक्की के लिए दिन-रात एक कर रही थी। जब उसने अपने पैरों पर खड़े होकर अपना खुद का नया बिज़नेस शुरू करने का सपना देखा और कंपनी को अपना इस्तीफा सौंपा, तो उसे सम्मानजनक विदाई मिलने के बजाय क्या मिला? मिला—मानसिक उत्पीड़न, उसकी मेहनत की गाढ़ी कमाई का रोका जाना और उसके चरित्र पर कीचड़ उछालने की एक बेहद घिनौनी साज़िश! जी हां, देहरादून से एक वर्किंग वुमन का ऐसा दर्दनाक और झकझोर देने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है, जिसने बड़ी-बड़ी कंपनियों के भीतर बैठे सफेदपोशों के असली और काले चेहरे को बेनकाब कर दिया है! आखिर इस्तीफा देने के बाद इस बेटी पर क्यों मढ़ा जा रहा है झूठे आरोपों का जाल? ये पूछ जा रहा है। दोस्तो ये तो मेने आपको महिला के पहले वीडियो के आधार पर बड़ी कंपनियों के काले खेल के बार में बताया है, लेकिन एक और वीडियो है इसी महिला का जिसके साथ नाइंसाफी हुई। वो भी दिखाउंगा लेकिन दोस्तो उत्तराखंड की राजधानी देहरादून, जो आज बड़ी-बड़ी कंपनियों और चमचमाते कॉरपोरेट दफ्तरों का हब बनती जा रही है। लेकिन इस चकाचौंध के पीछे कामकाजी महिलाओं के अधिकारों को तार-तार करने वाला ऐसा खौफनाक खेल चल रहा है। जिसने पूरे वर्किंग क्लास में हड़कंप मचा दिया है। यहाँ एक नामी कंस्ट्रक्शन और आर्किटेक्चरल फर्म में पिछले दो से तीन साल से पूरी निष्ठा के साथ सीनियर पोस्ट पर काम कर रही एक महिला कर्मचारी के साथ कंपनी मैनेजमेंट द्वारा घोर अन्याय किया।

दोस्तो पीड़ित महिला द्वारा सोशल मीडिया, फेसबुक और यूट्यूब पर जारी किए गए वीडियो के अनुसार, वह पिछले लंबे समय से कंपनी के मुख्य प्रोजेक्ट्स को दिन-रात एक करके संभाल रही थी। लेकिन जैसे ही उसने अपने बेहतर भविष्य और नए बिज़नेस के लिए नियमानुसार रिजाइन दिया, कंपनी के मालिकों का रंग पूरी तरह बदल गया। महिला का आरोप है कि उसकी महीनों की रुकी हुई बकाया सैलरी का भुगतान करने से कंपनी ने साफ मना कर दिया है। और जब उसने अपने कानूनी अधिकारों और पैसों की मांग की, तो कंपनी ने अपनी गलती मानने के बजाय उल्टा महिला पर ही डेटा चोरी करने या कंपनी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने जैसे मनगढ़ंत और झूठे आरोप लगाने शुरू कर दिए, ताकि उसे एक रुपया भी न देना पड़े। इससे पहले वाले वीडियो में महिला की बेबसी और आँखों के आँसू साफ़ देखे होंगे, महिला ने भावुक होते हुए कहा है कि उसने सालों तक कंपनी को अपने खून-पसीने से सींचा, लेकिन आज जब वह अपनी नई राह चुन रही है, तो उसे चोर साबित करने की घिनौनी कोशिशें की जा रही हैं। लेकिन दूसरे वाले वीडियो में महिलाओं ने कंपनी के मालिकों की पोल खोलनी शुरू कर दी है और दावा किया कि और भी गई ऐसे सबूत हैं जो ऐसी काली कंपनियों के बेनकाब करेंगे, लेकिन दोस्तो ये मामला अब देहरादून के पुलिस महकमे और श्रम विभाग तक भी पहुंच चुका है, जहां महिला अपने वजूद और अपनी गाढ़ी कमाई के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने जा रही है। फेसबुक और यूट्यूब पर लोग इस वीडियो को धड़ाधड़ शेयर कर रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि ऐसी तानाशाह कंपनियों का लाइसेंस तुरंत रद्द होना चाहिए जो महिलाओं के अधिकारों का हनन करती हैं। दोस्तो ये घटना देहरादून में काम करने वाली हजारों लड़कियों और महिलाओं की सुरक्षा और उनके श्रम अधिकारों पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ी करती है। अक्सर देखा जाता है कि जब भी कोई कर्मचारी बेहतर भविष्य के लिए नौकरी बदलता है, तो कई निजी कंपनियां उनका अनुभव प्रमाण पत्र (Experience Certificate) और बकाया सैलरी रोककर उनका करियर बर्बाद करने की धमकी देती हैं। पीड़ित महिला के इस वायरल वीडियो पर और कॉरपोरेट कंपनियों के इस तानाशाही रवैये पर आपकी क्या व्यक्तिगत राय है? कमेंट बॉक्स में ज़रूर बताएं।