सैकड़ों गांवों पर संकट!4 जिलों में येलो अलर्ट! । Rain Alert । Yellow Alert । Uttarakhand News

Spread the love

क्या देवभूमि उत्तराखंड इस समय कुदरत के किसी भयानक महा-विनाश की गवाही दे रहा है? पहाड़ों में मानसून का ये रौद्र रूप थमने का नाम नहीं ले रहा और आसमान से बरस रही आफत ने राज्य के पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया है! सिर्फ दावों और वादों के बीच सच यह है बताउंग आपको पूरी खबर कि कैसे अगले तीन से चार दिन के जारी हुआ मौसम को लेकर खौफनाक अलर्ट। दोस्तो पूरे उत्तराखंड में कैसे मौसम ने कहर बरपाया है ये किसी छिपा नहीं है, लेकिन दोस्तो कुछ आकड़े और आने वाले दिन और ज्यादा डराने वाले हैं। सब मै आपको इस रिपोर्ट में बताऊंगा थोड़ा गौर कीजिएगा, दोस्तो के विकास ही विनास का रास्ता बनाता है वो ये तस्वीर बयां कर रही है। पहाड़ी इलाकों में ये तस्वीरें मौत का दूसरा नाम हो सकती हैं अब मौसम की मार उत्तराखंड पर पड़े या हिमाचल पर तस्वीरें और नुकसान एक जैसा होता है। पहाड़ों में सीधा सा नियम है, अविज्ञानिक तरीके से रोड कटिंग मतलब भीषण लैंडस्लाइड को दावत। इसी का नमूना है यह हिमाचल के चंबा में भरमौर का कोडला-उराई रोड। भीषण लैंडस्लाइड बता दिया। इधर दोस्तो बात अपने उत्तराखंड की करूं तो यहां हालात बद से बत्तर हैं। इसका अंदाजा आप इससे लगा कसते हैं कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी 946 ग्रामीण सड़कें और 15 बड़े पुल ताश के पत्तों की तरह टूटकर पानी में बह चुके हैं! सैकड़ों गांव आज मुख्य धारा से पूरी तरह कटकर टापू बन चुके हैं और लोग दाने-दाने को तरस रहे हैं। इधर दोस्तो इसी बीच मौसम विभाग ने देहरादून, पिथौरागढ़, नैनीताल और बागेश्वर में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी कर अगले 4 दिन बेहद खौफनाक बताए हैं! आखिर कब थमेगा पहाड़ों में मौत का ये तांडव, पता नहीं लेकिन दोस्तो ये तो सच है कि उत्तराखंड में कुदरत का ऐसा कहर टूटा है जिसने पूरे ग्रामीण अंचल की लाइफलाइन को काट कर रख दिया है। इस साल की मॉनसून की मार ने सबसे गहरा जख्म राज्य के सड़क तंत्र को दिया है। आपदा के कारण प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत बनी 946 सड़कें और 15 महत्वपूर्ण पुल बुरी तरह क्षतिग्रस्त और तबाह हो गए हैं। सड़कें क्या टूटीं, पहाड़ों का संपर्क ही मैदानी इलाकों से कट गया। बीमार बुजुर्ग हों या गर्भवती महिलाएं, उन्हें अस्पतालों तक पहुंचाने का रास्ता भी अब मलबे के नीचे दफन हो चुका है।

दोस्तो उत्तराखंड़ में नुकसान के आकड़े कोई मामूली आंकड़े नहीं हैं, बल्कि यह इस बात का सबूत हैं कि पहाड़ों में विकास के नाम पर बनाई गई इंफ्रास्ट्रक्चर की दीवारें कुदरत के एक थपेड़े के आगे कितनी लाचार हैं। 15 पुलों के टूटने से कई नदियों के आर-पार जाना नामुमकिन हो गया है। लोग अपनी जान हथेली पर रखकर उफनती नदियों को रस्सियों के सहारे पार करने को मजबूर हैं। शासन-प्रशासन के तमाम मुस्तैदी के दावे इन 946 टूटी सड़कों के गड्ढों में समा चुके हैं। वहीं दोस्तो तबाही अभी थमी नहीं है, क्योंकि मौसम विभाग (IMD) ने आने वाले दिनों के लिए और भी डरावनी चेतावनी जारी कर दी है। राजधानी देहरादून, सीमांत पिथौरागढ़, नैनीताल और बागेश्वर जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का येलो अलर्ट एक्टिव है। अगले चार दिनों तक इन पहाड़ी अंचलों में लगातार मूसलाधार बारिश का तांडव जारी रहने की आशंका जताई गई है, जिससे नए भूस्खलन और पहाड़ों के दरकने का खतरा दोगुना हो सकता है। दोस्तो इस महा-संकट के बीच केदारनाथ, बदरीनाथ और गंगोत्री नेशनल हाईवे पर भी कई जगहों पर भारी बोल्डर गिरने से रास्ते बार-बार बंद हो रहे हैं। चमोली और उत्तरकाशी जैसे संवेदनशील इलाकों में तो स्थिति इतनी विकट है कि अचानक आने वाले फ्लैश फ्लड यानी अचानक बाढ़ से नदियों के ऊपर बने बेली ब्रिज तक तिनके की तरह बह जा रहे हैं। आपदा प्रबंधन सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि जब तक मौसम साफ नहीं होता, संवेदनशील रास्तों पर वाहनों की आवाजाही को पूरी तरह नियंत्रित रखा जाए और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। दोस्तो 946 सड़कें और 15 पुलों का टूटना यह साफ बयां करता है कि इस बार पहाड़ की जनता का दर्द कितना गहरा है। सरकार को सिर्फ रास्ते खोलने के दावे नहीं करने होंगे, बल्कि गांवों तक राशन और आपातकालीन सुविधाएं पहुंचाने के लिए हवाई रेस्क्यू भी तेज करने होंगे। अगर आप भी इन 4 प्रभावित जिलों की यात्रा का प्लान बना रहे हैं, तो सावधान रहें। इस प्रलयंकारी आपदा पर और सरकारी इंतजामों पर आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में ज़रूर बताएं। पहाड़ों की इस कड़वी हकीकत और अलर्ट की आवाज़ को लोगों तक पहुँचाने के लिए इस वीडियो को फेसबुक और यूट्यूब पर सबसे ज्यादा शेयर करें। हमारे चैनल को फॉलो और सब्सक्राइब करना न भूलें।