उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद मुस्लिम विवाह पद्धतियों में एक ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार के निर्देश पर राज्य का अल्पसंख्यक कल्याण विभाग और उत्तराखंड वक्फ बोर्ड मिलकर एक नया ‘निकाहनामा’ ड्राफ्ट तैयार कर रहे हैं। इस नई व्यवस्था के तहत अब राज्य में सिर्फ पंजीकृत या लाइसेंस प्राप्त मौलवी/काजी ही निकाह करा सकेंगे। बिना पंजीकरण वाले मौलवियों द्वारा पढ़ाए गए निकाह को कानूनी मान्यता नहीं मिलेगी और राज्य का यूसीसी पोर्टल ऐसे विवाहों को स्वीकार नहीं करेगा। राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास ने स्पष्ट किया है कि निकाहनामा की इस नई व्यवस्था को अंतिम रूप देने से पहले कानूनी, प्रशासनिक और धार्मिक पक्षों से गहन विमर्श किया जा रहा है। सरकार का मुख्य उद्देश्य विवाह संबंधी दस्तावेजों में होने वाली धोखाधड़ी को रोकना और महिलाओं को मजबूत कानूनी सुरक्षा प्रदान करना है।
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