जी हां दोस्तो बंजी जंपिंग सील फिर भी बन रही रील, प्रशासन ने सील लगाई, लेकिन क्या देवप्रयाग में बंजी जंपिंग का खेल अब भी जारी है? पर्यटकों की सुरक्षा में गंभीर खामियां मिलने पर एसडीएम ने साइट बंद कराई, लेकिन अब स्थानीय लोग दावा कर रहे हैं कि सील के बावजूद अंदर गतिविधियां चल रही हैं! आखिर प्रशासन की कार्रवाई को कौन चुनौती दे रहा है? क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही जिम्मेदारों की नींद टूटेगी? देखिए देवप्रयाग से एडवेंचर टूरिज्म की सुरक्षा व्यवस्था पर हमारी ये खास रिपोर्ट! दोस्तो एडवेंचर टूरिज्म के नाम पर क्या देवभूमि उत्तराखंड में पर्यटकों की जिंदगी के साथ सरेआम खिलवाड़ हो रहा है? ऋषिकेश-बद्रीनाथ नेशनल हाईवे पर देवप्रयाग के पास मूल्यागांव में स्थित ‘मां गंगा बंजी जंपिंग’ साइट को प्रशासन ने भारी कमियों के चलते सील कर दिया था। कीर्तिनगर के एसडीएम पंकज भट्ट ने जब औचक निरीक्षण किया, तो वहां जो खामियां मिलीं, वे रोंगटे खड़े करने वाली थीं—न इमरजेंसी मेडिकल किट, न सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और न ही पार्किंग की व्यवस्था! हाईवे पर ही गाड़ियां खड़ी की जा रही थीं। लेकिन, दोस्तो इस खबर का सबसे चौंकाने वाला पहलू अब सामने आया है। स्थानीय लोगों का गंभीर आरोप है कि प्रशासन की सील को ठेंगा दिखाकर यह बंजी जंपिंग साइट अब भी गुपचुप तरीके से चलाई जा रही है! आखिर सील होने के बावजूद यह खेल किसके इशारे पर चल रहा है? अगर कल को कोई बड़ा हादसा हो गया, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? दोस्तो रोमांच का सफर या मौत का सीधा बुलावा? यह सवाल इसलिए खड़ा हुआ है क्योंकि उत्तराखंड में एडवेंचर टूरिज्म के नाम पर नियमों को ताक पर रखने का एक बड़ा खेल सामने आया है। बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर मूल्यागांव में चल रही एशिया की सबसे ऊंची बंजी जंपिंग साइट्स में से एक, ‘मां गंगा बंजी जंपिंग’ पर प्रशासन ने बड़ा डंडा चलाया है।
दोस्तो पर्यटकों की सुरक्षा को ताक पर रखने की सूचना मिलने के बाद कीर्तिनगर के उप-जिलाधिकारी यानी एसडीएम पंकज भट्ट ने अपनी टीम के साथ यहां एक सरप्राइज रेड की। जब अधिकारियों ने इस एडवेंचर हब की पड़ताल की, तो वहां सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त मिली। बड़ी लापरवाही 1, मौके से जीवन रक्षक इमरजेंसी मेडिकल उपकरण पूरी तरह नदारद थे। बड़ी लापरवाही 2, जंपिंग के दौरान सुरक्षा के अंतरराष्ट्रीय और तकनीकी मानकों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा था। बड़ी लापरवाही 3, साइट के पास पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं थी, जिसके चलते पर्यटकों के वाहन सीधे व्यस्त बद्रीनाथ हाईवे पर खड़े किए जा रहे थे, जिससे दुर्घटना का खतरा बना हुआ था। इधर दोस्तो एसडीएम पंकज भट्ट ने बिना वक्त गंवाए इस पूरी साइट को सील करने का आदेश जारी कर दिया और साफ कहा कि पर्यटकों की सुरक्षा के साथ रत्ती भर भी समझौता नहीं किया जाएगा। प्रशासन का स्पष्ट निर्देश है कि जब तक सभी निर्धारित सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं कर लिया जाता और सक्षम प्राधिकारी से दोबारा अनुमति नहीं मिल जाती, तब तक यहां बंजी जंपिंग की एक भी गतिविधि नहीं होगी। नियमों को तोड़ने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, लेकिन दोस्तो प्रशासन के इन दावों और सील की सच्चाई पर अब बड़ा सवालिया निशान लग गया है! स्थानीय लोगों ने बेहद सनसनीखेज आरोप लगाए हैं।
ग्रामीणों का दावा है कि प्रशासन की तरफ से गेट पर ताला लटकाए जाने के बावजूद, इस साइट को बंद नहीं किया गया है। अंदर गुपचुप तरीके से ऑपरेटर अब भी पर्यटकों को जंप करवा रहा है और मोटी रकम वसूल रहा है। वहीं दोस्तो ग्रामीणों का यह आरोप अगर सच है, तो यह सीधे-सीधे कानून और प्रशासन को खुली चुनौती है। ऑपरेटर भले ही अपने मुनाफे के लिए इस सील को नजरअंदाज कर रहा हो, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या स्थानीय पुलिस और प्रशासन को इसकी भनक नहीं है? क्या अधिकारी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं? अगर 200 मीटर से ज्यादा की इस ऊंचाई से कूदते वक्त किसी पर्यटक के साथ कोई अनहोनी हो गई, तो क्या सिर्फ जंप मास्टर को जिम्मेदार ठहराकर प्रशासन अपना पल्ला झाड़ लेगा? दोस्तो एडवेंचर टूरिज्म जरूर होना चाहिए, क्योंकि इससे राज्य का रोजगार बढ़ता है, लेकिन यह सब पर्यटकों की जिंदगी की कीमत पर बिल्कुल नहीं हो सकता। अगर प्रशासन ने इस साइट को सील किया है, तो उसकी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करने की भी है कि नियमों का पालन जमीनी स्तर पर हो। अब देखना यह होगा कि स्थानीय लोगों के इस गंभीर खुलासे के बाद क्या प्रशासन दोबारा जागता है और इस ऑपरेटर के खिलाफ कोई कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करता है या नहीं।