उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल का एक बयान चर्चा में है। माफी मांगने के सवाल पर उन्होंने साफ कहा—माफी मांगने के बजाय इस्तीफा देना पसंद करूंगा। उन्होंने आत्मसम्मान को जीवन में सबसे ऊपर बताया। आखिर ऐसा क्या सवाल पूछा गया था, जिसके जवाब में सुबोध उनियाल ने इस्तीफे तक की बात कह दी? दोस्तो एक तरफ जहां उत्तराखंड में जैनी प्रकरण और जमीनी विवादों को लेकर सियासी तलवारें खिंची हुई हैं, वहीं दूसरी तरफ धामी सरकार के सबसे बेबाक कैबिनेट मंत्रियों में शुमार सुबोध उनियाल ने एक ऐसा बयान दे दिया है, जिसने सत्ता के गलियारों से लेकर हाईकमान तक हड़कंप मचा दिया है। इधर दोस्तो अक्सर अपनी बेबाकी और कड़े फैसलों के लिए जाने जाने वाले कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल से जब एक तीखा सवाल पूछा गया कि अगर कभी किसी विवाद पर हाईकमान उनसे माफी मांगने को कहेगा, तो उनका कदम क्या होगा? इस सवाल पर सुबोध उनियाल ने जो जवाब दिया, उसने पूरी राजनीतिक बिरादरी को सन्न कर दिया है। सुबोध उनियाल ने दो टूक लहजे में साफ कर दिया है कि “मैं माफी मांगने के बजाय मंत्री पद से इस्तीफा देना पसंद करूंगा!” उन्होंने एक बेहद दिलचस्प वाकया साझा करते हुए साफ कहा कि उनके जीवन में आत्मसम्मान से बढ़कर कुछ भी नहीं है! दोस्तो आखिर सुबोध उनियाल ने यह बयान किस संदर्भ में दिया? क्या यह उनके भीतर सुलग रहा कोई बड़ा असंतोष है या फिर उनका स्वाभिमान? दोस्तो उत्तराखंड की राजनीति में नेताओं के पाला बदलने और बयानों से पलटने के किस्से आम हैं, लेकिन इस बीच कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल का एक ताजा बयान इस वक्त टॉक ऑफ द टाउन बन गया है। एक कार्यक्रम के दौरान जब सुबोध उनियाल से माफी मांगने और राजनीतिक दबावों को लेकर सवाल हुआ, तो उन्होंने किसी भी तरह के समझौते से साफ इनकार कर दिया। उनियाल ने बिना किसी लाग-लपेट के हाईकमान और व्यवस्था को अपना कड़ा रुख दिखा दिया है।
दोस्तो सुबोध उनियाल का यह बयान ऐसे समय में आया है जब 2027 के चुनाव नजदीक हैं और टिकटों से लेकर मंत्रियों के परफॉर्मेंस पर लगातार हाईकमान की नजर बनी हुई है। ऐसे माहौल में उनियाल का यह कहना कि वे कुर्सी छोड़ देंगे लेकिन झुकेंगे नहीं, राजनीतिक पंडितों को कई तरह के संकेत दे रहा है। जानकार मानते हैं कि सुबोध उनियाल ने इस बयान के जरिए अपनी ही सरकार और संगठन के भीतर यह संदेश दे दिया है कि उन्हें दबाने या उन पर कोई मनमाना फैसला थोपने की कोशिश न की जाए। दोस्तो अब सवाल यह उठता है कि क्या सुबोध उनियाल का यह बयान सिर्फ एक पुराना वाकया और उनका व्यक्तिगत स्वाभिमान है, या फिर इसके पीछे आगामी चुनावों से पहले उत्तराखंड बीजेपी के भीतर चल रही किसी अंदरूनी खींचतान की आहट है? बहरहाल, उनियाल के इस बयान ने यह तो साफ कर दिया है कि देवभूमि की सियासत में अभी कई और बड़े मोड़ आने बाकी हैं। दोस्तो आपने देखा, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने साफ कर दिया है कि उनके लिए कुर्सी से बड़ा उनका आत्मसम्मान है। जहां राजनीति में नेता अपनी कुर्सी बचाने के लिए बड़े से बड़ा समझौता करने को तैयार हो जाते हैं, वहां उनियाल का यह ‘इस्तीफा कार्ड’ उत्तराखंड की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे चुका है। अब देखना यह होगा कि इस बेबाक बयान पर बीजेपी संगठन और खुद मुख्यमंत्री का क्या रुख रहता है।